Ashok Dass90
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अशोक दास बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की
अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 29 पृष्ठ: 68-70 निष्कर्ष : परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि :- मन नेकी कर ले, दो दिन का मेहमान।। टेक ।। मात-पिता तेरा कुटम कबीला, कोए दिन का रल मिल का मेला। अन्त समय उठ चले अकेला, तज माया मण्डान ।।1 कहाँ से आया, कहाँ जाएगा, तन छूटै तब कहाँ समाएगा। आखिर तुझको कौन कहेगा, गुरू बिन आत्म ज्ञान।।2 कौन तुम्हारा सच्चा सांई, झूठी है ये सकल सगाई । चलने से पहले सोच रे भाई, कहाँ करेगा विश्राम । ।3 रहट माल पनघट ज्यों भरिता, आवत जात भरै करै रीता । जुगन- जुगन तू मरता जीता, करवा ले रे कल्याण ।।4 लख-चौरासी की सह त्रासा, ऊँच-नीच घर लेता बासा । कह कबीर सब मिटाऊँ रासा, कर मेरी पहचान । 5 । भावार्थ : परमेश्वर कबीर जी ने अपने मन को सम्बोधित करके हम प्राणियों को सतर्क किया है कि इस संसार में दो दिन का यानि थोड़े समय का मेहमान है। इस थोड़े-से मानव जीवन में आत्म ज्ञान के अभाव से अनेकों पाप इकट्ठे करके अनमोल मानव जीवन नष्ट कर जाता है। धन कमाने की विधि तो संसार के व्यकि बता सकते हैं, परंतु गुरूदेव जी के बिना आत्म ज्ञान यानि जीव कहाँ से आया? मनुष्य जीव का मूल उद्देश्य क्या है? सतगुरू धारण किए बिना यानि दीक्षा लिए बिना जीव का मानव जन्म नष्ट हो जाता है। यह बात गुरू जी के बिना कोई नहीं बताएगा। चाहे पृथ्वी का राजा भी बन जा, परंतु भविष्य में पशु जन्म मिलेगा। जन्म-मरण का चक्र गुरू जी के ज्ञान व दीक्षा मंत्र (नाम) बिना समाप्त नहीं हो सकता। जब तक जन्म-मरण का चक्र समाप्त नहीं होता तो बताया है कि :- यह जीवन हरहट का कुँआ लोई। या गल बन्धा है सब कोई ।। कीड़ी-कुंजर और अवतारा। हरहट डोर बन्धे कई बारा।। भावार्थ :- जैसे रहट के कँए में लोहे की चक्री लगी होती है। उसके ऊपर बाल्टियों की चैन वैल्ड की जाती है। उसको रहट कहा जाता था। पहले बैल या ऊँट से चलाते थे, जैसे कोल्हू बैल-ऊँट से चलाते हैं। (पहले अधिक चलाते थे) रहट की बाल्टियाँ नीचे कँए से पानी भरकर लाती है। ऊपर खाली हो जाती है। यह चक्र सदा चलता रहता है। इसी प्रकार पृथ्वी रूपी कँए से पाप तथा पुण्यों की बाल्टी भरी ऊपर स्वर्ग-नरक में खाली की। इस प्रकार जन्म-मरण के चक्र में जीव सदा रहता है। ऊपर के शब्द में यही समझाया है कि संसार में परिवार-धन सब त्यागकर एक दिन अकेला चला जाएगा। फिर कहीं अन्य स्थान पर जन्म लेकर यही क्रिया करके चला जाएगा। यदि आप घर से किसी अन्य शहर में जाते हैं तो जाने से पहले निश्चित करते हो कि वहाँ जाऐंगे। उसके बाद कहाँ विश्राम करेंगे। परंतु संसार छोड़कर जाते हो तो कभी विचार नहीं करते कि कहाँ विश्राम करोगे। हे जीव! चौरासी लाख प्रकार के प्राणियों के शरीरों में प्रताड़ना सहन करता है। मरता-जीता (नये प्राणी का जीवन प्राप्त करता) है। कभी राजा बनकर उच्च बन जाता है, कभी कंगाल बनकर नीच कहलाता है। परमात्मा कबीर जी समझा रहे हैं कि अवतार गण (राम, कृष्ण आदि-आदि) भी सत्य साधना न मिलने के कारण जन्म-मरण के चक्र में पड़े हैं। सत्य साधना मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। मैं तेरा जन्म-मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry ##santrampaljimaharaj
#santrampaljimaharaj - काल लोक में जन्म- मरण रूपी हरहट (चक्र ) लोई, या गल बंध्या है सब कोई। योह हरहट का कुआँ ' कीडी कुंजर और अवतारा हरहट डोरी बंधे कई बारा।। भावार्थ : हरहट के कुएँ की तरह यह संसार भी एक चक्र है, जिसमे जीव पाप ्पुण्य के अनुसार जन्म ्मरण मे घूमता रहता है। मनुष्य सब कुछ छोड़कर अकेला जाता है और फिर नया जन्म लेकर वही प्रक्रिया दोहराता है। जीव ८४ लाख योनियो मे दुख सहता है और कभी ऊँचा तो कभी नीचा जन्म पाता है। संसार छोड़ते समय मनुष्य यह नहीं सोचता किआगे कहाँ जाएगा। मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को सत्य साधना पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। मैं तेरा जन्म॰्मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ काल लोक में जन्म- मरण रूपी हरहट (चक्र ) लोई, या गल बंध्या है सब कोई। योह हरहट का कुआँ ' कीडी कुंजर और अवतारा हरहट डोरी बंधे कई बारा।। भावार्थ : हरहट के कुएँ की तरह यह संसार भी एक चक्र है, जिसमे जीव पाप ्पुण्य के अनुसार जन्म ्मरण मे घूमता रहता है। मनुष्य सब कुछ छोड़कर अकेला जाता है और फिर नया जन्म लेकर वही प्रक्रिया दोहराता है। जीव ८४ लाख योनियो मे दुख सहता है और कभी ऊँचा तो कभी नीचा जन्म पाता है। संसार छोड़ते समय मनुष्य यह नहीं सोचता किआगे कहाँ जाएगा। मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को सत्य साधना पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। मैं तेरा जन्म॰्मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज f SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat
याद है न भाइयों और बहनों कल रविवार है अपने गुरु जी के सत्संग में भी जाना हैं सभी को। बोलो बंदीछोड़ सतगुरू संत रामपाल जी भगवान जी की जय हो 🙏❤️‍🩹 . . . . . . . 🙇‍♂️≛⃝ 𝗟𝗶𝗸𝗲..♥️!! 😇❥≛⃝ 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗻𝘁.. 🌐 !! . 🌼≛⃝ 𝗦𝗵𝗮𝗿𝗲..🪄!! Follow Saurabh Dass And Mention in your story 🙏💖 #AnnpurnaMuhim ##santrampaljimaharaj
AnnpurnaMuhim - थाद है न रविवार को सतंग में जाना है। @TR எனன २त  Follow Saurabh Dass] थाद है न रविवार को सतंग में जाना है। @TR எனன २त  Follow Saurabh Dass] - ShareChat
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#santrampaljimaharaj - CEliIEEts ये सब खेल हमारे किए, हमसे मिले सो निश्चय जिए संत सामपाल जी मह्यायाज slive Sant Rampalزl Maharay 03   Spiritualleadersaintrampalji @SaintRampalJiM CEliIEEts ये सब खेल हमारे किए, हमसे मिले सो निश्चय जिए संत सामपाल जी मह्यायाज slive Sant Rampalزl Maharay 03   Spiritualleadersaintrampalji @SaintRampalJiM - ShareChat
अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 28 पृष्ठ: 66-68 *सत्संग में यह भी बताया गया कि घर में कलह का कारण परमात्मा के विधान को न समझकर संसार के भाव में चलना है। घर का कोई सदस्य घर में हानि नहीं करना चाहता। किसी कारण से हानि हो जाती है तो उसको लेकर कलह नहीं करनी चाहिए। जो हानि होनी थी, वह तो हो चुकी है, वह तो ठीक होनी नहीं। व्यर्थ की कलह करना समझदारी नहीं है। जिससे गलती से कोई हानि हो जाती है तो उसे कहना चाहिए, हे बेटा-बेटी, माता-पिता या सास-बहू! यह जो हो गया, यह अपने भाग्य में नहीं था। आपने जान-बूझकर तो किया नहीं है। इस बात से घर में शांति कायम रहती है। कलह में काल निवास करता है। भूत-प्रेतों का उस घर में डेरा होता है। जो कलह नहीं करते, वे सुख से बसते हैं। जिस घर में परमात्मा की भक्ति (आरती-स्तुति, ज्योति यज्ञ) होती है, उस घर में देवताओं का निवास होता है। सत्संग सुनकर सब अपने-अपने घर चली गई। सत्संग दिन के 12 बजे से 02 बजे तक हुआ था। पुत्रवधु को पता नहीं था कि सासू माँ सत्संग में गई थी। अगले दिन सुबह भैंस का दूध निकालकर पुत्रवधु उस दूध की भरी बाल्टी को छत में लगे कुण्डे वाले सरिये में प्रतिदिन की तरह टांगने लगी। उसे लगा कि बाल्टी टंग गई, परंतु सरिये के उल्टी ओर बाल्टी का कड़ा लगा था। पुत्रवधु ने सोचा कि ठीक लगा है और बाल्टी छोड़ दी। बाल्टी पृथ्वी पर गिर गई। दूध बिखर गया। आवाज सुनकर भतेरी आई और पुत्रवधु दूध की बजाय सासू-माँ की ओर मायूस से देख रही थी। बोलना उचित नहीं समझा क्योंकि पुत्रवधु को पता था कि सासू- माँ किसी भी सफाई के वचन नहीं सुनती थी। सोच रही थी कि आज का सारा दिन कलह में जाएगा। शाम को पति आएगा, उससे भी पिटाई करवाएगी। हे परमात्मा यह कौन बनी? ऐसी गलती तो कभी नहीं हुई थी। हे सतगुरू ! कुछ तो दया करो। मैं तो आपकी भक्ति भी भूलने को हो रही हूँ। मुझे तो सारा दिन सासू-माँ के श्लोक याद रहते हैं। भतेरी बोली, बेटी! जो होना था, वह हो गया। आज हमारे भाग्य दूध है नहीं। चिंता ना कर। इस दूध को ऊपर से हाथों से बाल्टी में डालकर भैंस को पिला दे। यह कहकर जो नाम दीक्षा ली थी, उसका जाप करने लग गई पुत्रवधु को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। सोच रही थी कि माता आज पता नहीं कौन-सा स्टेशन (रेडियो आकाशवाणी) पकड़ गई। ये शीतल वचन भतेरी की बोरी (बारदाना) में नहीं थे। इसमें खल भरी थी। आसपास से निकलती थी, तब भी बड़बड़ की झल निकलती थी। पुत्रवधु का नाम निशा था। वह सोच रही थी कि :- निशा आज निशा (रात्रि) में तेरी बुरी होगी दशा। निशा की सोच थी कि पति को बताएगी। वह माता की बात सुनकर मेरी कुछ नहीं सुनता। अच्छी-बुरी कहेगा। सारा दिन और रात्रि रोने में जाएगी। निशा ने दूध बाल्टी में डालकर भैंस को पिला दिया। बाल्टी धोकर रख दी। भतेरी आई और बोली कि बेटी! रोटी खा ले। चिंता मत कर। बेटी! मैं कल मेरी बहन दयाकौर के साथ दिन में सत्संग में गई थी। मेरी तो आँखें खुल गई। मैं तो बहुत कलहारी बनी हुई थी। बेटी हो सके तो क्षमा कर देना। पीछे हुआ सो हुआ, आगे से अपनी बेटी को पलकों पर रखूँगी। मेरी असली बेटी तो तू है। जन्मी बेटी तो अगलों की थी, वह चली गई। अपना दुःख-सुख साझा है। मेरी तो एक दिन के सत्संग ही आँखें खोल दी। बेटी! अगले रविवार को आप भी चलना, मैं भी चलूँगी। धीरे- धीरे बेटे को भी ले चलेंगे। निशा ने अपने गुरू जी का फोटो (स्वरूप) कपड़ों में ही रखा था। फोटो निकालकर चरणों में शीश रखकर कहा कि हे गुरूवर! आज आपने अपनी बेटी की पुकार सुन ली। घर स्वर्ग बना दिया। शाम को चत्तर सिंह आया तो माता ने दूध गिरने का जिक्र भी नहीं किया। कुछ दिन बाद चत्तर सिंह को भी नाम दिला दिया। कुछ समय पश्चात् निशा के गुरू जी आ गए। निशा ने बताया कि गुरू जी! मेरी सासू-माँ बहुत अच्छी हैं। इसने भी गुरू का नाम ले लिया है। भतेरी ने कहा, महाराज जी! निशा ने कभी नहीं बताया कि इसने दीक्षा ले रखी है। यह मेरी कलह से डरती होगी। अब बताया है जब मैंने नाम ले लिया। अच्छा किया इसने, यदि पहले बता देती तो मैं और अधिक दुःखी करती और पाप की भागी बनती। निशा के गुरू जी ने कहा, माई भतेरी! आप तो आसमान से गिरी और खजूर में अटकी हो क्योंकि आपकी दीक्षा शास्त्रानुकूल नहीं है। सत्य साधना बिना मोक्ष नहीं हो सकता। जैसे रोग की सही औषधि खाने से ही रोग से मोक्ष मिलता है। इसी प्रकार सत्य साधना करने से जन्म-मरण के रोग से मुक्ति मिलती है। निशा ने सोचा कि सासू-माँ नाराज ना हो जाए। इसलिए बीच में ही बोल उठी कि गुरू जी! सुना है आपने नई पुस्तक लिखी है, वह संगत ने छपवाई है। क्या आपके पास है? गुरू जी बोले, हे बेटी! आपको देने के लिए आया हूँ। यह कहकर गुरू जी दूसरे कक्ष में गए जिसमें ठहरे थे। उसमें थैला रखा था। निशा भी साथ-साथ गई और बोली, गुरूदेव! भिरड़ के छत्ते को मत छेड़ो, मुश्किल से शांत हुआ है। गुरू जी बोले, हे बेटी! अब तेरी सास जी की पूरी रूचि भक्ति में है, अब यह मानेगी। गुरू जी तीन दिन रूके, तत्वज्ञान समझाया। भतेरी ने भी गुरू बदल लिया और अपना कल्याण करवाया। सत्संग से घर स्वर्ग बन गया। चारों ओर शांति हो गई। जहाँ गाली-गलौच के सारा दिन गोले छूटते थे, अब उस घर में परमात्मा के ज्ञान की गंगा बहने लगी। भक्तमति निशा के गुरू जी परमेश्वर कबीर जी थे जो अन्य वेश में सत्य भक्ति प्रचार करने के लिए घूमते-फिरते थे। उन्होंने बताया कि किस प्रभु की भक्ति करनी चाहिए? ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry ##santrampaljimaharaj
#santrampaljimaharaj - सत्संग का प्रभाव जब दूध बिखर गया , तब सासू माँ ( भतेरी) के शीतल वचनः "बेटी ! जो होना था, वह हो गया| दूध है ही नहीं | चिंता मत कर ।" भाग्य में HR आज भतेरी ने शीतल वचन कहे और घर स्वर्ग बना दिया। सत्संग सुनकर Rசர் जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGODORG  @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ सत्संग का प्रभाव जब दूध बिखर गया , तब सासू माँ ( भतेरी) के शीतल वचनः "बेटी ! जो होना था, वह हो गया| दूध है ही नहीं | चिंता मत कर ।" भाग्य में HR आज भतेरी ने शीतल वचन कहे और घर स्वर्ग बना दिया। सत्संग सुनकर Rசர் जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGODORG  @SAINTRAMPAUIM SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat
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AnnpurnaMuhim - মসথ কন্রীযক अनेकों सुदमाओं के महल गरोबोंके मसोहा संत रामपाल जो महाराज , बनकर आए जिनके आशीर्वाद से சனசீபனி zof-ikgal Eiugelaea झोपड़ियाँ। सेक्टर २० रोहिणी নিলভী २०, Rohini Sec 0 AnnaPurna Muhim YouTube au @AnnapurnaMuhlmolticlal  Channel @f6X Annapurna Muhim Official Annapurna Muhim মসথ কন্রীযক अनेकों सुदमाओं के महल गरोबोंके मसोहा संत रामपाल जो महाराज , बनकर आए जिनके आशीर्वाद से சனசீபனி zof-ikgal Eiugelaea झोपड़ियाँ। सेक्टर २० रोहिणी নিলভী २०, Rohini Sec 0 AnnaPurna Muhim YouTube au @AnnapurnaMuhlmolticlal  Channel @f6X Annapurna Muhim Official Annapurna Muhim - ShareChat
भारतीय हैंडबॉल टीम के प्रमुख कोच नवीन पुनिया ने किसान मसीहा संत रामपाल जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया 🙏 #SantRampalJiMaharaj #NavinPunia #HandballIndia #AnnpurnaMuhim
AnnpurnaMuhim - NEWS के प्रमुख कौच  हैंडबॉल टीम  भारतीय  पुनियाने नवीन " जी महाराज से रामपाल किया। संत मसीहा I किसान आशीर्वाद @SATLOKCHANNEL ৮]) SA NEWS CHANNEL SA NEWS CHANNEL @SANEWSCHANNEL SANEWS IN NEWS के प्रमुख कौच  हैंडबॉल टीम  भारतीय  पुनियाने नवीन " जी महाराज से रामपाल किया। संत मसीहा I किसान आशीर्वाद @SATLOKCHANNEL ৮]) SA NEWS CHANNEL SA NEWS CHANNEL @SANEWSCHANNEL SANEWS IN - ShareChat
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#santrampaljimaharaj - सच्चे भगवान की भक्ति बिना मानव जीवन अधूरा है वस्त्र आभूषण तन की शोभा, यह तन कच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडों।। भावार्थ : सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से॰ किस और आयु में कब खत्म हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी| फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी| बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज { SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ सच्चे भगवान की भक्ति बिना मानव जीवन अधूरा है वस्त्र आभूषण तन की शोभा, यह तन कच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडों।। भावार्थ : सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से॰ किस और आयु में कब खत्म हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी| फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी| बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज { SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
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