तुमसे ना मिलने का दुख
किसी
कठोर पत्थर की भांति
आंखों में निरंतर जागता है
जिसने अपनी पैनी नोंक से
गोद दिया है
बादलों की देह पर मेरा प्रेम.
तुम अगर कभी लौटो तो
ले आना यही प्रेम इतनी मात्रा
में कि पत्थर पानी बन सके और
जिसके हिस्से आ सके
तुम्हारे कंधे की नींद के
कुछ टुकड़े.💔❤️✍️
#💝 इज़हार-ए-मोहब्बत #💑मेरे जीवनसाथी💍