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21 days ago
तंत्र और योग के गहन विज्ञान में , और जैसे ग्रंथों में आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री देवी — माँ हाकिनी — का अत्यंत रहस्यमय वर्णन मिलता है। माँ हाकिनी ज्ञान, ध्यान, अंतर्दृष्टि और आत्म-शक्ति की देवी हैं। उनका स्थान है — आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य), जहाँ से साधक की चेतना दिव्य स्तर पर प्रवेश करती है। हाकिनी साधना का प्रथम नियम: जो साधक माँ हाकिनी को सिद्ध करना चाहता है, उसे इंद्रिय संयम का पालन करना अनिवार्य है। वह साधक किसी भी प्रकार के काम-भोग, आकर्षण या स्त्री-संग से दूर रहेगा, तभी उसकी ऊर्जा (ओजस) ऊपर उठकर आज्ञा चक्र में स्थिर होगी। बिना ब्रह्मचर्य और मानसिक शुद्धता के हाकिनी साधना केवल कल्पना बनकर रह जाती है। सच्चा साधक वही है — जो अपने मन, इंद्रियों और इच्छाओं पर विजय पा ले। तभी माँ हाकिनी की कृपा से उसे दिव्य दृष्टि, गहन ज्ञान और अंतर-जागृति प्राप्त होती है। यह साधना अत्यंत गूढ़ और शक्तिशाली है, इसे केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। #लोकप्रिय । #💥🔥आज के चर्चित मुद्दे🔥💥 #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं