Sagar Saini
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1 days ago
#GodMorningSaturday #शराब_पीना_महापाप . कबीर साहिब जी का शास्त्र प्रमाणित तत्वज्ञान आज का समाज परमात्मा कबीर जी को एक सामान्य संत समझता है जबकि अपनी महिमा बताते हुए परमात्मा कबीर जी ने हमें बताया कि वही सृष्टि के रचनहार हैं और चारों युगों में आते हैं अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं जो युगों- युगों से परमात्मा प्राप्ति के लिए भटक रहे हैं। आज तक हम जो भी साधना भक्ति करते आ रहे थे। उससे ना तो सुख की प्राप्ति होती है और ना ही मोक्ष की। जितने भी संत, गुरु व महामंडलेश्वर हुए हैं उन्हें स्वर्ग तक की ही जानकारी है। परंतु कबीर परमेश्वर ने हमें सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां कोई कष्ट नहीं है सुख ही सुख है। जिस की गवाही संत गरीबदास जी ने अपनी वाणी में दी है। संखों लहर मेहर की ऊपजैं, कहर नहीं जहाँ कोई। दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई। कबीर परमेश्वर ने ही यथार्थ ज्ञान बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की जन्म और मृत्यु होती है, ये अविनाशी नहीं हैं। यही प्रमाण श्रीमद्देवी भागवत पुराण, स्कंद 3, अध्याय 5 में है। कबीर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है। इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल (ब्रह्म) हैं। कबीर, मां अष्टंगी पिता निरंजन, ये जम दारुण वंशन अंजन। तीन पुत्र अष्टंगी जाए, ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराए।। जहां हम रह रहे हैं यह काल का लोक हैं यह 21 ब्रह्मांडों का स्वामी हैं इस काल को एक लाख मानव शरीरधारी प्राणियों का आहार करने का शाप लगा है काल (ब्रह्म) इक्कीस ब्रह्मण्ड के प्राणियों को तप्तशिला पर भून कर खाता है। इसीलिए जन्म-मृत्यु तथा अन्य दुःखदाई योनियों में पीड़ित करता है तथा अपने तीनों पुत्रों रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी, तमगुण शिव जी से उत्पत्ति, स्थिति, पालन तथा संहार करवा कर अपना आहार तैयार करवाता है। जितने भी धर्मगुरु हुए हैं उनका कहना है कि मनुष्य को अपने किये कर्मों को भोगकर ही पूरा करना पड़ता है। जबकि यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमात्मा साधक के घोर से घोर पापों का भी नाश कर देता है ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में स्पष्ट है कि यदि रोगी की जीवन शक्ति नष्ट हो गई हो और रोगी मृत्यु के समीप पहुंच गया हो तो भी परमात्मा उसको सही करके सौ वर्ष की आयु प्रदान करता है। आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के रूप में पूर्ण संत (तत्वदर्शी) संत की भूमिका निभाने वाले कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी आये हुए हैं उनका लक्ष्य है संपूर्ण विश्व के सभी मानव समाज को अपने शास्त्रों से परिचित कराकर एक परमात्मा की सत भक्ति करवाकर मोक्ष प्रदान करना अपने निज घर सतलोक ले जाना है। Sa True Story YouTube #शराब_पीना_महापाप