*स्त्रीषु नर्मविवाहे च वृत्त्यर्थे प्राणसंकटे।*
*गोब्राह्मणार्थे हिंसायां नानृतं स्याज्जुगुप्सितम्॥*
स्त्रियोंको प्रसन्न करनेके लिये, हास-परिहासमें, विवाहमें, कन्या आदिकी प्रशंसा करते समय, अपनी जीविका की रक्षाके लिये, प्राणसंकट उपस्थित होनेपर, गौ और ब्राह्मणके हितके लिये तथा किसी को मृत्युसे बचानेके लिये असत्य-भाषण भी उतना निन्दनीय नहीं है।
*सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो ।* #apna Lmp #संस्कृत #सुप्रभात