*🌹🌹🌹व्यवहार कला🌹🌹🌹*
व्यवहार की कला ही जीवन में मधुर संबधों को स्थापित करती है।
दूसरों के साथ अनुचित व्यवहार करने से पूर्व विचार करो कि हमारा व्यवहार किसी को आहत करने वाला न हो।
अपने जीवन को वेदमय बनाकर जियो, भेदमय बनाकर नहीं।
शास्त्र कहते हैं कि दूसरों के साथ कभी भी वह व्यवहार मत करो जो तुम्हे स्वयं अपने लिए भी पसंद ना हो।
आत्मरूप समझकर सबसे प्रेम करो और सबका सम्मान करना सीखो।
अपनी दृष्टि को व्यापक बनाते हुए ये जानने का प्रयास करें कि आत्मा, परमात्मा का ही एक रूप है।
सबके भीतर उसी एक परमात्म रूप का दर्शन करते हुए व्यवहार करना ही सर्वोत्तम व्यवहार है।
अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए बात-बात पर दूसरों की भावनाओं को आहत करना, दूसरों को प्रताड़ित करना ही तो भेद दृष्टि हैं।
हरि व्यापक सर्वत्र समाना की भावना रखते हुए सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना ही वेद दृष्टि है।
*विचार और शेयर करें*
🙏🌹🌹🙏
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख