"नाप-तौल"
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बहुत ही जोर है हरएक अंगराइयों के,
इन फिसलते हुए गिरते-पड़ते दौर में...
किस ओर भला कहाँ किधर को अब यूँ ,
बार-बार ही खुद पे ही आदमी गौर करेंगे!
बचा कुछ भी नही पाने मिलने लेने देने में
गया सबकुछ उजाड़ने आशियाँ बनाने में...
जो कुछ बचा हाल है बिखेरे हुए सपनों के,
फिर कैसे कोई भी दिल इसपे ही शोर मढेंगे!
कहीं कदमों के आहिस्ते पदचाप हैं तो,
कभी कोई तोड़ते हैं शान्त हुए माहौल को...
कहीं कोई चुपके से ओठों के आरे बैठे हैं,
तब भला इन नजराने पे दिल किस ओर चढ़ेंगे!
एक पाँव प्रगति के अनगिनत उत्कृष्ट पथ को,
दूसरे को रखने होंगे जंगल खेत खलिहानों में...
करोड़ों अरबों के टॉवर-बंगले जब बदले रूप में,
प्लॉट बगान बड़े-बड़े बारों से बँध आकार धरेंगे!
सेवानिवृत्त/सन्यासी के अनुभव व विशिष्टता,
पहुँचेंगे उन छुपे अनछुए समय से पहलुओं तक....
निश्चय ही एक-एक फ्लैट के कीमत में ही,
गाँव के गाँव घने सुनहरे सपनों के बाग बनेंगे!
पेड़-पौधे पशु-पक्षीयों की चहचहाहट आदि,
बहते झरनों से निकलती हुई लड़ियाँ...
पूछती जाती हों जब कहो चलना है संग में,
फिर अकेले हुए दिलों पे ये बातें भी जोर भरेंगे!
प्रकृति पूछती रहती है अपने ही रंग में,
जो कुछ लिया है मुझसे लौटना होगा...
समय के संग या फिर लम्बे अंतराल पे,
समझे तो सही है नही तो लम्बी छोड़ सहेंगे!
जीने के तेवर और तरीके बदलने होंगे,
लम्बी दूरियों के नाप-तौल के पैमानों में...
तभी साँसों सपनों को चैन मिलेंगे जब,
जीने के रंग....
खेलते बच्चों सा होकर ही हर भोर करेंगे!💕💞
.............✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #😘लव डोज💓 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️