बैसाख पूर्णिमा
सनातन धर्म में वैशाख Purnima को अत्यंत पवित्र तिथि माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य और धर्म कर्म के अनेक कार्य किए जाते हैं। वैशाखी / बैसाख पूर्णिमा स्नान लाभ की दृष्टि से ये एक मुख्य पर्व है। मान्यता है कि इस दिन मिष्ठान, सत्तू, जलपात्र, वस्त्रदान करने और पितरों का तर्पण करने से बहुत पुण्य की प्रप्ति होती है। वैशाखी पूर्णिमा को सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण से उनके बचपन के सहपाठी-मित्र ब्राह्मण सुदामा जब द्वारिका मिलने पहुंचे तो Shri Krishna ने उनको सत्य विनायक व्रत Vaishakh Purnima vart का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता दूर हुई और वह सर्वसुख सम्पन्न और ऐश्वर्यशाली हो गए। वैशाख पूर्णिमा पर धर्मराज की पूजा करने का विधान है, इसलिए इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के बचपन के साथी सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे थे, तो भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक पूर्णिमा व्रत का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता दूर हुई। वैशाख पूर्णिमा का बड़ा ही महत्व है। इस दिन दान-पुण्य और धर्म-कर्म के अनेक कार्य किये जाते हैं। इसे सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैशाख पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु का तेइसवां अवतार महात्मा बुद्ध के रूप में हुआ था, इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। यमराज देव को मृत्यु का देवता माना जाता है. इन्हें प्रसन्न करने के लिए वैशाख पूर्णिमा के दिन व्रत रखा जाता है और विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दौरान जल से भरा घड़ा, कुल्हड़, पंखे, खड़ाऊ, छाता, घी, खरबूजा, ककड़ी, चीनी, साग, चावल, नमक का दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से अगले जन्म में व्यक्ति को अनुकूल प्रभाव देखने को मिलते हैं. इस दिन दान और द्रव्य दान से मन को शांति मिलती है और बेहद शुभ फलदायी माना गया है.ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के साथ यमराज का वरदान भी प्राप्त होता है. और व्यक्ति को मृत्यु पर विजय प्राप्त होती है।
#शुभ कामनाएँ 🙏