CHANDNI
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1 days ago
श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुंदरम्। पट पीत मानहु तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्।। 🛕🍁🌼🍁🌼🍁🌼🍁🌼🍁🌼🍁🌼🛕 #🙏प्रातः वंदन