"कृष्ण मनोहारीणी" राधिका~
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3 days ago
तुम्हें देखकर नहीं__ प्यारे.. तुम्हें समझकर प्रेम हुआ है हमें, कि, तेरे नाम का एक सूक्ष्म धागा- अन्तर्मन में कहीं बांध रखा हैं... न कलाई पर प्रत्यक्ष होता हैं, न किसी गिरह में परिलक्षित होता हैं, बस, इतना सा संबंध है, कि, हर संवाद के उपरांत एक सिरा__ अनायास तुम्हारी दिशा में ठहर जाता हैं, न आकर्षित करता हैं, न अवरुद्ध हीं करता हैं - फिर भी जितना दूर निकल जाऊं, पुनः लौट आने का कारण- यही कहीं__ निःशब्द बंधा रह जाता हैं...!! ❣️🫰 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #☝ मेरे विचार #✍️ अनसुनी शायरी #👍मोटिवेशनल शायरी और स्टेटस #एक रचना रोज़✍