मेष संक्रांति
मेष संक्रांति को तमिलनाडु में पुथांडु (Puthandu), केरल में विशु (Vishu), बंगाल में नबा बर्ष (Naba Barsha) या पोहला बोइशाख (Pohela Boishakh), असम में बिहु (Bihu) और पंजाब में वैशाखी (Vaisakhi) के नाम से मनाया जाता है।मेष संक्रांति सौर मास का पहला माह भी माना गया है। सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय सौरमास कहलाता है। यह मास प्राय: तीस दिन का होता है। सूर्य एक राशि में 30 दिन तक रहता है। सौर माह का पहला माह है मेष। सौरमास के नाम : मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ, मकर, मीन।खगोलशास्त्र के अनुसार मेष संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायन की आधी यात्रा पूर्ण कर लेते हैं। सौर-वर्ष के दो भाग हैं- उत्तरायण छह माह का और दक्षिणायन भी छह मास का। देशभर में मेष संक्रांति को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। पंजाब में जहां मेष संक्रांति को वैशाख बोला जाता है वहीं तमिलनाडु में इसे पुथांदु के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा बिहार में इसे सतुवानी तो पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा उड़ीसा में इसे पना संक्रांति कहा जाता है।शास्त्रों के अनुसार मेष संक्रांति के दिन स्नान दान का विशेष महत्व माना जाता है। मेष संक्रांति के दिन अन्न दान करने का विशेष महत्व बताया जाता है। इस समय वैशाख महीने की प्रवृत्ति होती है। मेष संक्रांति के दिन ही सूरज देव उत्तरायण की अभी यात्रा को पूरा करते हैं। भारत में अलग-अलग जगहों पर मेष राशि को अलग अलग नाम से जाना जाता है। बंगाल में रहने वाले लोग मेष संक्रांति कोनए साल के रूप में मनाते हैं। मेष संक्रांति के दिन धर्मघट का दान, स्नान, तिल द्वारा पितरों का तर्पण किया जाता है। इस दिन मधुसूदन भगवान की पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों में बताया जाता है कि मेष संक्रांति के पुण्य काल में स्नान दान और पितरों का तर्पण करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है। मेष संक्रांति के दिन सूरज देव की पूजा अर्चना करने के साथ गुड और सत्तू खाने का नियम होता है। बिहार राज्य में मेष संक्रांति के दिन हो सतुआ के रूप में मनाया जाता है
#शुभ कामनाएँ 🙏