krishnapedit
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11 hours ago
एक बार महर्षि नारद ने भगवान विष्णु से पूछकर एक नि:संतान स्त्री को बताया कि उसके भाग्य में संतान का सुख नहीं है। यह सुनकर वह स्त्री अत्यंत दुखी हुई। कुछ समय बाद, उस गाँव में एक साधु आए। उस स्त्री की सेवा और श्रद्धा से प्रसन्न होकर साधु ने उसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया और फलतः उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जब नारदजी ने उस स्त्री को पुत्र के साथ देखा, तो वे चकित रह गए और भगवान से इसका कारण पूछा। भगवान ने नारद से उनकी बीमारी के बहाने धरती से एक कटोरी मानव-रक्त लाने को कहा। नारदजी कई द्वारों पर गए, पर कोई भी अपना रक्त देने को तैयार नहीं हुआ। अंत में वही साधु मिला, जिसने बिना एक क्षण सोचे भगवान के लिए अपने शरीर से रक्त निकालकर दे दिया। तब भगवान ने समझाया कि जो भक्त अपने आराध्य के लिए प्राण देने को तत्पर हो, उसके वचनों को पूरा करने के लिए भगवान स्वयं भाग्य का लिखा (विधि का विधान) भी बदल देते हैं। निष्कर्ष: सच्ची भक्ति और पूर्ण समर्पण में इतनी शक्ति होती है कि वह प्रारब्ध की रेखाओं को भी मिटा सकती है। #जय श्री राम 🙏 #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस