sn vyas
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11 days ago
#जय श्री कृष्ण यह अद्भुत कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है। 🙏🦚 एक दिन श्री कृष्ण के पुत्र खेलते-खेलते एक प्राचीन कुएँ के पास पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि एक विशालकाय गिरगिट कुएँ में फँसा हुआ है। सभी ने मिलकर उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। अंत में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को बुलाया। भगवान श्री कृष्ण ने सहज भाव से उस गिरगिट को स्पर्श कर बाहर निकाला। जैसे ही प्रभु का स्पर्श हुआ, वह गिरगिट तुरंत दिव्य रूप धारण कर एक तेजस्वी पुरुष बन गया। उन्होंने अपना परिचय महान दानी राजा नृग के रूप में दिया। राजा नृग अत्यंत धर्मात्मा और उदार थे। उन्होंने असंख्य गायों का दान किया था। किंतु एक बार भूलवश एक ही गाय दो अलग-अलग ब्राह्मणों को दान में दे दी गई। इस कारण विवाद उत्पन्न हो गया। राजा ने बहुत प्रयास किए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। उसी एक भूल के कारण मृत्यु के बाद उन्हें गिरगिट की योनि प्राप्त हुई। राजा नृग ने बताया कि वे वर्षों तक उस कुएँ में पड़े रहे और अंततः भगवान श्री कृष्ण के दिव्य स्पर्श से उन्हें मुक्ति प्राप्त हुई। ✨ इस कथा से मिलने वाली शिक्षाएँ ✨ • धर्म और पुण्य के कार्यों में भी सावधानी आवश्यक है। • छोटे से छोटा कर्म भी अपना फल अवश्य देता है। • न्याय और सतर्कता के बिना दान अधूरा माना जाता है। • भगवान की कृपा हर बंधन को समाप्त कर सकती है। यह कथा हमें सिखाती है कि केवल अच्छे कर्म ही नहीं, बल्कि सही भावना, न्याय और जागरूकता भी जीवन में अत्यंत आवश्यक हैं। जय श्री कृष्ण! 🙏🦚✨