॥ 'श्रीरामरक्षास्तोत्रम्' ॥
॥ श्रीराम स्तुति ॥ श्लोक ॥
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः,
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः,
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥
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॥ हिंदी अर्थ ॥
इस श्लोक में भक्त अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करते हुए कहता है:
🌸 माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः: श्री रामचंद्र जी ही मेरी माता हैं और श्री रामचंद्र जी ही मेरे पिता हैं।
🌸 स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः:श्री रामचंद्र जी ही मेरे स्वामी (प्रभु) हैं और श्री रामचंद्र जी ही मेरे परम मित्र हैं।
🌸 सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः: वे अत्यंत दयालु श्री रामचंद्र जी ही मेरा सब कुछ (सर्वस्व) हैं।
🌸 नान्यं जाने नैव जाने न जाने: उनके अतिरिक्त मैं किसी और को नहीं जानता, सचमुच नहीं जानता, बिल्कुल नहीं जानता।
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भावार्थ (महत्व):
यह श्लोक सिखाता है कि जब हम ईश्वर को अपने हर सांसारिक रिश्ते (माता, पिता, मित्र) के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तब हमारा भय समाप्त हो जाता है। यहाँ 'न जाने' की तीन बार पुनरावृत्ति दृढ़ विश्वास को दर्शाती है कि श्री राम के अलावा भक्त का कोई दूसरा आश्रय नहीं है।
जय श्री राम 🙏🚩
🚩।। जय जय सियाराम ।।🚩
🚩।। जय बजरंगबली ।।🚩
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
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