R. K Tomar
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1 days ago
*पार्थ:*```हे माधव! जब लोग मेरी प्रशंसा करते हैं, तो मन अहंकार से भर जाता है, और जब आलोचना होती है, तो हृदय टूट जाता है। इस झूठे संसार के मान-अपमान से कैसे बचूँ?``` *माधव:* ```हे अर्जुन! प्रशंसा का नशा और आलोचना का घाव, दोनों ही तुम्हें सत्य से दूर ले जाते हैं। लोग अपनी समझ के अनुसार तुम्हारी छवि बनाते हैं, उसमें तुम्हारा कोई दोष या गुण नहीं। तुम कमल के पत्ते की तरह बनो जो जल में रहकर भी गीला नहीं होता। अपना मूल्यांकन स्वयं करो, दूसरों के शब्दों में अपनी खुशी मत ढूंढो।``` #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓ #🌙 गुड नाईट