शौर्य, त्याग और लोक कल्याण का महान पर्व: बैसाखी 🌾⚔️
क्या आप जानते हैं कि बैसाखी केवल नई फसल के पकने का जश्न नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब 13 अप्रैल 1699 को दशम गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी?
जब समाज पर जुल्म और अत्याचार अपनी चरम सीमा पर थे, तब गुरु जी ने आनंदपुर साहिब में 80 हजार की भीड़ के सामने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए 5 शीशों का बलिदान मांगा। उन 5 शूरवीरों—भाई दयाराम जी, भाई धरमदास जी, भाई मोहकमचंद जी, भाई हिम्मत राय जी, और भाई साहबचंद जी—को गुरु जी ने अमृत छकाकर 'पंच प्यारे' का रूप दिया और सदियों से चली आ रही जात-पात की दीवारों को हमेशा के लिए गिरा दिया।
“खालसा अकाल पुरख की फौज, प्रगटिओं परमात्म की मौज” 🙏
यह दिन हमें सिखाता है कि निडरता, स्वाभिमान और परोपकार ही सच्चा धर्म है। इसी दिन किसान अपनी मेहनत की रबी फसल कटाई का जश्न भी मनाते हैं।
आइए, इस महान पर्व पर हम भी उन संत-सिपाहियों के त्याग को नमन करें।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह! ✨
🚩।। जय जय सियाराम ।।🚩
🚩।। जय बजरंगबली ।।🚩
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
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