सुबह की पहली किरणें आसमान को हल्के सुनहरे रंग में रंग रही थीं। मंद हवा बह रही थी और पूरा वातावरण शांत, पवित्र और प्रेममय लग रहा था। वृंदावन की गलियों में पक्षियों की मधुर आवाज़ गूंज रही थी।
राधा रानी मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे छत पर आईं। उनके हाथ में पानी से भरी एक छोटी बाल्टी थी और आँखों में वही प्यारी नटखट शरारत चमक रही थी, जिसे देखकर स्वयं कान्हा भी हार जाएँ।
नीचे श्रीकृष्ण गहरी नींद में विश्राम कर रहे थे। उनके चेहरे पर मासूम मुस्कान थी, मानो वे किसी मधुर स्वप्न में खोए हों।
राधा जी धीरे से आगे बढ़ीं…
और अगले ही पल हँसते हुए ठंडा पानी कान्हा जी पर डाल दिया।
जैसे ही पानी की बूँदें श्रीकृष्ण को छूती हैं, वे अचानक चौंककर उठ बैठते हैं। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आता, लेकिन जब उनकी नज़र ऊपर जाती है, तो वे राधा रानी को खिलखिलाते हुए देखते हैं।
बस फिर क्या था…
कान्हा जी के चेहरे पर भी प्यारी मुस्कान आ जाती है। उनकी आँखों में भी शरारत चमक उठती है, जैसे अब वे इस मस्ती का जवाब जरूर देंगे।
राधा जी हल्की हँसी के साथ पीछे हट जाती हैं और पूरा वातावरण प्रेम, आनंद और नटखटपन से भर जाता है।
वृंदावन का प्रेम ऐसा ही है —
जहाँ छोटी-सी शरारत भी भक्ति बन जाती है,
और हर मुस्कान में राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम झलकता है। 💛✨
🌹🌺राधे राधे🌼🌹 🙏
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️