#जय श्री राधे
किशोरी मेरी जीवन प्रान अधार।
औरन से कुछ काम न मेरो,
तुम साँची सरदार॥
पतितन पावन टेक सदा की,
रसिकन की रिझवार।
शरणागत प्रतिपाल स्वामिनी,
करुणा की भंडार॥
तुमरो नाम रूप उर में धरि,
तजी जगत की लार।
“रूपमाधुरी" बात निभाज्यो,
आन पड़ी हूँ द्वार॥
सर्वोपरि म्हारी महरानी।
जीत लियौ घनश्याम लाड़ली,
स्ववस एक रस दानी॥
ललितादिक संग सखी सहचरी,
वृंदावन रज धानी।
ब्रह्मा विष्णु शंभु सनकादिक,
महिमा नैकु न जानी॥
वेद पुराण सबै पचि हारे,
श्री हरिवंश बखानी।
भोरी ओर कृपा करि हेरौ,
अलबेली ठकुरानी॥
श्रीराधे तेरी कृपा दृष्टि कब पाऊँ।
मेरी और ठौर गति नाहीं तुम्हरोई
दास कहाऊँ॥
सदा-सदा में शरण तुम्हरी,
तुम्हरो जस नित गाऊँ।
तुम्हरे मृदुल चरण कमलन में,
निशिदिन शीश नवाऊँ॥
तुम्हरो नाम लेत ही स्वामिनि,
तुम्हरोई ध्यान धराऊँ।
तुम जानो सब उर अन्तर की,
मैं कहा विनय सुनाऊँ॥
तुम्हरोई जय-जयकार होत,
जग महिमा कहि न अघाऊँ।
'भक्तमालि' को अब अपनाओ
माया से छुटि जाऊँ ॥
॥ राधे राधे राधे राधे राधे राधे ॥
…