Mukesh Sharma
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16 hours ago
_*🌷 चिंतन🌷*_ _*जब हम “लेने” पर जीते हैं, तो हमारा ध्यान रहता है, मुझे क्या मिला? मुझे कितना मिला? मुझे और क्यों नहीं मिला? यह सोच भीतर असंतोष, तुलना और अपेक्षा पैदा करती है। और जहाँ अपेक्षा होती है, वहाँ दुख जल्दी आता है। लेकिन जब हम “देने” की चेतना में जीते हैं, तब जीवन का केंद्र बदल जाता है। फिर हमारा ध्यान होता है मैं किसके काम आ सकता हूँ? मैं किसके जीवन को आसान बना सकता हूँ? देना सिर्फ धन देना नहीं होता।*_ _*कोई अपना समय देता है, कोई ध्यान देता है, कोई सम्मान देता है, कोई प्रेम देता है, कोई धैर्य देता है। और यह सब वही दे सकता है जिसके भीतर भराव हो। इसलिए हमेशा कहें “ईश्वर,मुझे ऐसा बना दो कि मैं खाली होकर माँगने वाला नहीं, बल्कि भरा हुआ होकर बाँटने वाला बन जाऊँ।”*_ _*॥ जय श्री राधे कृष्ण ॥*_ _*🌺🌷🌷🌺*_ #☝अनमोल ज्ञान #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी