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15 घंटे पहले
2122 1212 22/112 हक़ मुहब्बत का भी अता कीजै हर किसी पर न यूँ मिटा कीजै क़त्ल इंसानियत हुई अब तो आप बेशक मेरी गिला कीजै हर तरफ है लहू मेरा बिखरा ज़ख्मे दिल की मेरे दवा कीजै जल रही आरजुएं सब दिल में कुछ मेरे वास्ते भी दुआ कीजै कर दफ्न सब शिकायते अपनी बैठ कर हम से मश्वरा कीजै सर ख़ुशी से झुका दिया हमने माफ़ अब सब मेरी खता कीजै ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
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631 ने देखा
1 दिन पहले
122 122 122 122 झुका सजदे में सर हिकारत नहीं है अदब है इबादत तिजारत नहीं है करूँ तो करूँ कैसे शिक्वे तुमारे मेरी मोहब्बत की हिमाकत नहीं है सबक- ऐ-वफ़ा रोज पढ़ लेते है हम वफ़ा की मगर कोई कीमत नहीं है सभी कर रहे बस दिखावा मुहब्बत किसी के मुहब्बत में चाहत नहीं है पिला दे निगाहों से मय अपने तू भी हमें वैसे पीने कि आदत नहीं है मिलेगा कही कैसे सुकूँ घडी भर सभी की सूरत साफ सीरत नहीं है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 21/4/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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727 ने देखा
2 दिन पहले
212 212 212 212 कुछ मोहब्बत का मेरी सिला दीजिये जाम नज़रो के अपने पिला दीजिये कर ले मकबूल चाहत मेरी जाने जाँ दिल को मेरे न इतनी सजा दीजिये इश्क में तेरे मगलूब हूँ ऐ सनम अपने आगोश में अब सुला दीजिये दिल में तन्हाई चुभती रही है मेरे पास आ कर गले से लगा दीजिये तीरगी में कदम लड़खड़ा जायें ना ज़िन्दगी से अंधेरे मिटा दीजिये छुप के रोता रहा हूँ तेरी याद में आरजू अपने दिल की बता दीजिये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 20/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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685 ने देखा
3 दिन पहले
1212 1122 1212 22/112 इबादतों में अपना सर झुका के रखते है नज़र में तुम्हे खुदा हम बना के रखते है भुला दें तुम्हे भला कैसे अपने दिल से हम तुमारे रंग में खुद को नहा के रखते है गवाह बन के खड़े चाँद ओ सितारे भी तुमारे इंतजार में दिल जला के रखते है जानते है न आओगे कभी मेरे घर तुम न जाने क्यूँ फिर भी घर सजा के रखते है जुनूने इश्क का आलम कहाँ छुपा तुमसे ये फूल दिल-ऐ-मुहब्बत खिला के रखते है न जाने वक़्त वहीँ क्यों ठहर गया अपना दुआ में हाथ अपने हम उठा के रखते है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 19/4/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
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745 ने देखा
4 दिन पहले
2122 2122 2122 212 हमने कब माँगी खुदाई जो सजा देने लगे हर सवालो और शिकवो की सदा देने लगे दर्द दिल में बारहा उठता रहा देख के तुझे इश्क के शोलों को जल्फो की हवा देने लगे तर्क ना कर वस्ल के अपने इरादों पे सनम गैर मुझको जान कर तुम फैसला देने लगे आरजू आके लबो पे रुक गई क्यों जानेजाँ चाहतें अपनी छुपा कर क्यों दुआ देने लगे है नहीं इकरार की उम्मीद अब कोई तेरे ख्वाब सब झूठे दिखा कर रास्ता देने लगे ठान ही ली बेवफाई करने की तुमने सनम फिर बना कर हिज्र मेहमाँ आसरा देने लगे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 18/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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660 ने देखा
6 दिन पहले
2122 1122 22/122 इश्क के नाम छला था पहले बन के हम दर्द मिला था पहले खो गया क्यों सुकूँ दिल का मेरे दिल कई बार दुखा था पहले रह गया बनकेआहें दिल में अब जो कभी लब पे दुआ था पहले है सिला दर्द मुहब्बत का बस ये ज़माने से सुना था पहले जल रहा याद में जिसके दिल ये वो कभी मेरा खुदा था पहले सच नहीं होंगे कभी सपने ये दिल के मारो ने कहा था पहले ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 18/4/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
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801 ने देखा
7 दिन पहले
2122 1212 22 गम के सायों से डर रहा हूँ मै याद बस तुम्हें कर रहा हूँ मै हो रही खत्म ज़िन्दगी मेरी रेत बनकर बिखर रहा हूँ मै थम रही धीरेधीरे धड़कन भी लम्हे लम्हे में मर रहा हूँ मै छोड़कर साथ तुम गये जबसे हर सफर दर - बदर रहा हूँ मै भाग जाती है छोड़ कर खुशी गर्दिशे वो बशर रहा हूँ मै फिर मिलादे उसीसे खुदाअब जिस लिएआहें भर रहा हूँ मै ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/3/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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680 ने देखा
8 दिन पहले
1222 1222 1222 तुमारी यादें जब हमको सताती है खनकती चूड़ियाँ तुमको बुलाती है यकीं कर ले खुदाया मेरे बातों पर रुला कर दास्ताँ अपनी सुनाती है बुझाने से कहाँ बुझती अगन दिल की दिखा कर खाब सुहाने बढाती है सुबहओ शाम तो फिर भी गुजर जाते लगा कर सीने से ,रातों को जगाती है बड़ी ही संगदिल आवाज है इसकी सुना कर धुन मुहब्बत की रुलाती है करूँ जब शिक्वे मैं तेरी जफ़ाओं के बना कर बातें वो झूठी मनाती है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 15/4/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
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10 दिन पहले
2122 2122 212 दर्द दिल का अब बताकर क्या करें आप के नजदीक आकर क्या करें रूठ चूका है नसीबा जब मेरा अब खुदा पत्थर बनाकर क्या करें घुल गई है मोहब्बत में नफ़रतें वक्त वो फिर से बुलाकर क्या करें मेरे हो कर हम कदम बन ना सके अक्स आँखों में सजाकर क्या करें छोड़िये भी सिलसिला ये प्यार का इश्क में खुद को फ़नाकर क्या करें खूब महफ़िल को सजाओ अपने तुम नज्म हम अपनी सुनाकर क्या करें ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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715 ने देखा
11 दिन पहले
22 22 22 22 कण कण में बस तू ही तू है साँसों में तेरी ही रू है देखूँ जिधर आये तू नजर छाया कैसा ये जादू है कर रही मदहोश जो हमको तेरी ही तो वो खुशबू है तेरी बाहों के घेरे में गुजरे शामें ये आरजू है बहक न जाये ये मौसम भी चल रही प्यार की वो लू है हम साया बन के तू जानिब लिपटी जिस्म से हू ब हूँ है नर्म लबो पर बन के लाली मैं बिछ जाऊँ ये जुस्तजू है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/12/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह