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मुहब्बत , जंग में थोड़ी सियासत भी जरूरी है
बचाये जो फरेबों से , वो किस्मत भी जरूरी है
इरादे हो बुलंद , ओ हौसले हो आसमानों पर
खुदा की ऐसे सर पे अपने रहमत भी जरूरी है
कठिन है राहें माना मोहब्बत की इस जमाने मे
मिटाने नफरतो को दिलसे उल्फत भी जरूरी है
गुजर जाए युँ हसते गाते सबकी ज़िन्दगी यारो
लगा दो आग पानी मे ये जहमत भी जरूरी है
ले कर मय की सुराही हाथ मे अपने पिलाते हो
पिला के मारने को दिल मे नफरत भी जरूरी है
मिले अब कोई गम गुसार हमको भी यहाँ यारो
यहाँ पर जीने की खातिर मसर्रत भी जरूरी है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/11/2017
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