2122 2122 2122 212
दर्द दिल का अपने सब मेरी नज़र कर दीजिए
अब ये काँटो से भरी मेरी डगर कर दीजिए
चल गयी शमशीर मेरे दिल पे नज़रो की तेरे
अब बना या चाक मेरा ये जिगर कर दीजिए
है बहुत मुश्किल मुहब्बत का सफर ऐ जाने जां
साथ चल के मेरे अपना हम सफर कर दीजिए
हिज्र - ऐ - गम में तेरे घुट के न मर जाऊँ कहीं
कुछ मुहब्बत की इनायत ये इधर कर दीजिए
हम समझ तुमको मसीहा आये है दर पर तेरे
हाल -ऐ - दिल अब मेरा भी बेहतर कर दीजिए
ज़िन्दगी की मेरे साँसे थम रही उनके बिना
आखरी है दम मेरा उनको खबर कर दीजिए
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
25/2/2017
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