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1 दिन पहले
122 122 122 122 झुकाकर पलक मुस्कराना तुम्हारा अदा से मुझे युँ रिझाना तुम्हारा सितम ढा रही है ये दिल पे हमारे उठाकर ये पलकें गिरना तुम्हारा बहुत याद आते है वो लम्हे हमको मना कर गले से लगाना तुम्हारा कहीं बिजलियाँ ना गिरा दे दिलो पर युँ शाने से आँचल गिराना तुम्हारा बहुत बार लुट चुका मोहब्बत में हमे याद है वो रुलाना तुम्हारा उठाकर कफन देख चहरा न मेरा मुझे भाए ना सर झुकाना तुम्हारा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 30/9/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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613 ने देखा
2 दिन पहले
221 2121 1221 212 बस देखते है तुम्हे हि दीवानगी से हम घायल हुए है यार तेरी सादगी से हम होशो हवास खोये हुए बैठे है यहाँ मदहोश हुए यार तेरी आशिकी से हम शिद्दत -ऐ -दर्द का था न अहसास भी हमे अब तो तड़फ रहे यार बेबसी से हम खोई है मंजिले ओर राहें बदल गई बेज़ार यार हो गए है ज़िन्दगी से हम खुश्बू चमन में प्यार कि तेरे सदा रही खुद को जुदा न कर पाये बानगी से हम किस मार्ग पर ले आई मुहब्बत में ज़िन्दगी अब खो न जायेअपने ही आवारगी से हम ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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655 ने देखा
3 दिन पहले
212 1222 212 1222 सजदे में तेरे सर अब भी झुका हमारा है जो खुदा तुम्हारा है , वो खुदा हमारा है देख ले कभी झुकाके नज़र ये दिलमे भी अक्स दिलमे तेरे अब भी बसा हमारा है होते हो पशेमाँ क्यूँ दिलसे अपने ऐ यारा हाथ आज भी दुआ में उठा हमारा है दिख रही फिजाओं में जोउदासियाँ तुम्हे एक दिल फिंजा मे टूटा हुआ हमारा है रौनके सभी चहरे की बिखर गईं मेरे हिज्रे गममें ये जीवन ढल गया हमारा है गमन कर निगाहों सेबहते हुएअश्को का दर्द मोहब्बत का इनमें छुपा हमारा है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 20/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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630 ने देखा
4 दिन पहले
2122 1212 22/112 ना खलिश ना मलाल रखते है दिल में पर कुछ सवाल रखते है जब से उन से हुई मोहब्बत है दर्दे दिल बे मिसाल रखते है जब सुनाते है हाले दिल अपना दिल कलेजा निकाल रखते है दिल में नफरत नही मुहब्बत है जाने क्यों इसको पाल रखते है हो न हमसे कभी खफा जाना दिल में ऐसा खयाल रखते है इसतरह उलझे उनके ज़ुल्फो में हुस्न का ऐसा जाल रखते है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 15/2/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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680 ने देखा
6 दिन पहले
221 2121 1221 212 दिल चाहता है फिर एक अहसान ले ले तू फिर इश्क कर के दर्द का तूफान ले ले तू छुपा के गम पुराने सभी मोहब्बत के तुम झूठी सही लबो पे ये मुस्कान ले ले तू आ जायेगा युँ चहरे पे तेरे निखार वो हाथो में हाथ थाम के गुलदान ले ले तू कब तक बिताएगा युँ उदासी में ज़िन्दगी इस ज़िन्दगी में जीने का सामान ले ले तू जिन्हें है ज़िन्दगी पे तेरी रस्क होने दो लगती है राहें तुम्हे जो आसान ले ले तू कट जायेगी फिर तेरी खुशहाल ज़िन्दगी दिल मे बसा के कोई ,तो अरमान ले ले तू ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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687 ने देखा
7 दिन पहले
2122 1212 22/112 बहते अश्को के जाम रहने दो शामें गम मेरे नाम रहने दो सजदे में है सदा से हम तेरे मुझे अपना गुलाम रहने दो आरजुएं दफ़न है दिल में सब इनका कुछ एहतिराम रहने दो कबतलक तरसूँ हिज्र-ऐ-गम में शाम इक मेरे नाम रहने दो कहने है राज दिलके हमको भी दर्दे दिल की एक शाम रहने दो तुम मिटा ना सकोगे सर से ये सर मेरे ये इल्जाम रहने दो मिट न जाऊं मैं इल्जाम से तेरे कुछ मेरा भी मकाम रहने दो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 12/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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663 ने देखा
8 दिन पहले
2122 2122 212 माजरत जिस दिन खता हो जाएगा लग्जिशों का तब मजा हो जाएगा कर रहे हो आज जिसपे तुम यकीं देखना कल बे वफा हो जाएगा पूजेगा तब कौन पत्थर को यहाँ आदमी जिस दिन खुदा हो जाएगा फिर मिला ना पाएंगे हमसे नज़र सच से जब भी सामना हो जाएगा लर्जिशे लब को कभी महसूस कर दर्दे दिल तेरा दफा हो जाएगा साथ काँटो पर मेरे चल के देखो जोश ओ जुनू हवा हो जाएगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 5/12/2017 माजरत - क्षमा याचना लग्जिशों - भयंकर भूलें लर्जिशे लव - होंठो की कंपन #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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846 ने देखा
9 दिन पहले
122 122 122 12 सदा साथ हम जिनके चलते रहे वही राहे मंजिल पे छलते रहे जगी दिल में उम्मीदे जिनसे मेरी निगाहों में उन ही के खलते रहे किये वादे थे उम्र भर साथ के मुसाफिर से रस्ते बदलते रहे लबो से हँसी छीन कर मेरे लहू से मेरे लब वो रंगते रहे कुचल सारे अरमां दिलो के मेरे मिला हाथ गैरो से हसते रहे यही ज़िन्दगी की कहानी रही सदा साथ मेरे झगड़ते रहे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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10 दिन पहले
2122 1212 22 राजे दिल अपना में बताता हूँ जख्म खा कर भी मुस्कराता हूँ पूछ ना हँसने की वजह हम से आँख नम मैं भी कर दिखता हूँ लाख गहरा हो इश्क का दरिया वादे जाँ दे के भी निभाता हूँ राह में मोड़ तो कई आये हरकदम खुद को आजमाता हूँ मौज हर इक़ बहा के ले जाती बन के चट्टान में अड़ जाता हूँ है मुबारक मुझे ये तन्हाई रोज दिल इस से बाहलाता हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/12/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह