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2122 2122 2122 212 आज फिर यादों में तेरी रतजगा हो जाएगा ख्वाब आँखों मे पलेगा ओ हवा हो जाएगा गर्दिशे अय्याम में गुजर रही है ज़िन्दगी सर पे जो तुम हाथ रख दे तो दुआ हो जाएगा जैसे तैसे ज़िन्दगी कट जाएगी अपनी सनम वक़्त से पहले फ़ना हुए तो क्या हो जाएगा जिसके खुशबू से महकता था मेरा सारा जहाँ क्याखबर थी एक दिन वोभी जुदा हो जाएगा कब मिला हमको वफाओ कासिला मेरे खुदा दर्द दिल का एक दिन खुद ही दवा हो जाएगा कब किसी को है मिली दुश्वारियों से मंजिलें सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा जिदन कर ए दिल-ए-नादाँ चाँदको तू पानेकी सुन लिया जो चाँद ने वोभी खफा हो जाएगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/12/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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2122 2122 212 कहते हैं सब मुझे आवारा हूँ मैं ज़िन्दगी से अपने ही हारा हूँ मैं बात जो थी खत्म कब की हो गई अपने ही किस्मत से हरकारा हूँ मैं बेवजह बदनाम हूँ मैं हर जगह आसमाँ से टूटता तारा हूँ मैं क्या किसी के काम आऊँगा कभी बे वजह , बे कार नाकारा हूँ मैं बेमुरव्वत धड़कने सुनती नहीं उलझनों का इनके ही मारा हूँ मैं चन्द रोज़ा ज़िन्दगी बाकी बची ज़िन्दा रहमत से तेरी यारा हूँ मैं रोऊँ क्या रोना बे रुखी का तेरी अवगुणों काखुद एक पिटारा हूँ मैं ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 28/12/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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2122 1212 22/112 हुई मुझसे बता खता क्या है और किस्मत में अब लिखा क्या है लुट गई ज़िन्दगी की हर खुशी पास अब मेरे ओ बचा क्या है इक चिंगारी सुलग रही दिल में पूछते हो मुझ से जला क्या है ना दवा काम आई , ना दुआ ऐ खुदा अब तेरी रज़ा क्या है मंजिलें तो नज़र नही आती अब धुंध में दिख रहा धुआँ क्या है बस यहीं तक रहा सफर यारो पूछ मत मर्जे दिल हुआ क्या है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 20/1/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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212 212 212 212 लोग आते रहे , लोग जाते रहे जख्म खा कर भी हम मुस्कराते रहे दो घड़ी साथ तो कोई बैठा नहीं बस सलीके हमें सब सिखाते रहे रह गई बोझ बन कर मेरी ज़िंदगी दर्द अपना जिगर में छुपाते रहे देख पाये न वो जख्म दिल के मेरे चोट पर चोट दिल पे लगाते रहे ढाल कर दर्द गीतों में उनके लिए गैर की बज्म में गुन गुनाते रहे दर्द दिल का मेरे पढ़ सके न जो वो लेख किस्मत का हम को पढ़ाते रहे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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2122 2122 212 आँख में अश्को के धारे हो गये दूर हम से सब किनारे हो गये हमने चाहा था दिलो जाँ से जिसे वो खुदा को मेरे प्यारे हो गये अब न उम्मीदें रहीं ना आरजू ख्वाब मेरे सब तुम्हारे हो गये सामने हो कर मेरी आँखों के भी गुम निगाहों से नजारे हो गये ज़िन्दगी में मेरे भर कर अंधेरे आसमाँ के वो सितारे हो गये बद नसीबी रोकता कैसे भला गर्दिशों में सब ही तारे हो गये चार दिन की चाँदनी थी ज़िन्दगी अपने ही किस्मत के मारे हो गये युँ छुड़ा कर हाथ हाथो से मेरे अपने गैरो के सहारे हो गये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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122 122 122 122 निगाहों में तुम्हे बसाये हुए है तुम्हारे नयन दिल पे छाये हुए है खफा हो रहे क्यों मुहब्बत से मेरी दिलो जाँ तुम पे ही लुटाये हुए है अहद -ऐ- मुहब्बत से मुकरते क्यूँ हो तेरे सजदे में सर झुकाये हुए है छलक जायें ना आँसु आँखों से मेरी बड़ी मुश्किलों से दबाये हुए है शिकायत है गर बैठ के बात कर लो गिले शिक्वे सब हम भुलाये हुए है बसे होयुँ सांसो में तुम बनके खुशबू तुम्हे तन बदन पर लगाये हुए है कहीं बुझन जाये कसक मेरे दिलकी धुनी हम तेरी ही रमाये हुए है गुजर जाऊंगा देखना शाम ढलते कजा पास अपने बुलाये हुए है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 25/11/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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122 122 122 122 सभी ख्वाहिशे अब दुआ से कहेंगे गुजारिश करेंगे , खुदा से कहेंगे लिखा क्यों नसीबो में ये जख्म मेरे छुपा आँसुओ को अदा से कहेंगे बढ़ी जा रही दिल की बैचेनियाँ ये बदलती हुई इस फिजा से कहेंगे अगर रुक सके तो कभी रोक लेना दिलो को जलाती हवा से कहेंगे नही और कुछ पास बाकी रहा है बहारों में बिखरी खिजा से कहेंगे ये घुप अंधेरे मार डालेंगे हमको रहम कर जरा अब निशा से कहेंगे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 19/1/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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2122 2122 2122 ख्वाब आँखों में सजाना चाहता है आज फिर दिल गुनगुनाना चाहता है रह गये जज्बात दिल के जो अधूरे वो ग़ज़ल गा कर सुनाना चाहता है है मेरे अहसास में शामिल तु अब भी राज दिल का ये बताना चाहता है खाके झूठी कस्मे कर के झूठे वादे आज फिर हमको हसाना चाहता है सोई है जो हसरते दिल में तेरे भी प्यार से अपने जगाना चाहता है कर यकीं इस बार अपने आशिक पे वादे सब अपने निभाना चाहता है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/12/2016 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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