!!माता पार्वती शिव विवाह!!
किया शिव ने पाणिग्रहण पार्वती का
हर्षाया हृदय देव,नर,मुनि, ऋषि का,
कौमारी कन्या हिम की अति सुन्दर
बिखेरी छटा प्रकृति ने मनभावन।
मंगल घड़ी के वेद उच्चारण
बजने लगे शंख ध्वनि पावन,
सुरभित,सुगंधित, महकी लताएँ
चहुँदिशा आनंदित हो पुष्प बर्षाएँ।
चंद्र, सर्प मालाओं से सजे शंभू
लिए संग त्रिशूल, नरमुंड, डमरू,
भूत प्रेत, पिचाश है भभूत उड़ाते
बाघंबर लपेटे शिव मंद मुस्काते।
बारात आई जब हिमराज द्वार
माता मैना हुई अचंभित बारंबार,
रूपवती पुत्री के भाग्य में क्या लिखा
बावला पति विधाता ने क्यों दिया?
माता के दुःख को बेटी ने पहचाना
स्वयं विधाता संग माँ मुझे है जाना,
आरंभ भयी तब आरती परछन
गाएं मंगल गीत सब ऋषि मुनिवर।
शिव शक्ति का अनूठा बंधन
संपन्न हुआ प्रेम विवाह प्रथम,
आशीष बधाइयां देते प्रियजन
लौटा पुनः कैलाश पर दांपत्य जीवन।।
मनोज चौहान,🌹✍️...
#🌷..chauhan..💐🌺