रील वाला डॉन प्लान फेल,असल जिंदगी में मिला एनकाउंटर,विदेश भागने का सपना भी टूटा .
हरदोई के टड़ियावां इलाके में अपराध की एक ऐसी “स्टार्टअप कहानी” सामने आई, जहां दिमाग तेज था लेकिन दिशा पूरी तरह गलत।यहां मेहनत और पढ़ाई की जगह शॉर्टकट,तमंचा और जल्दी अमीर बनने का सपना हावी हो गया।सीतापुर के लहरपुर के रहने वाले इस गैंग का मास्टरमाइंड प्रियांशु ,जिसने 29 जून 2025 की पहली FIR के बाद अपराध की राह पकड़ ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।उसने लहरपुर के ही रहने वाले तुषार,प्रशांत,सचिन,एक पॉलिटेक्निक छात्र, दो सेल्समैन और दो नाबालिगों को जोड़कर एक पूरा नेटवर्क खड़ा किया,जिसका मकसद सर्राफा व्यापारियों को निशाना बनाकर “क्विक कैश” कमाना, सोशल मीडिया पर रील जैसी चमक दिखाना और उसी कमाई से नेपाल भागकर नई जिंदगी शुरू करने की फिराक में लग जाना था।
लूट की कमाई हाथ लगते ही इनकी जिंदगी में अचानक “लक्ज़री मोड” ऑन हो गया। किसी ने iPhone खरीदा, किसी ने एंड्रॉयड, ताकि नेपाल की वादियों में फोटो सिर्फ याद नहीं बल्कि पूरा “डॉन-स्टाइल” शो बने। बैग पैक थे, प्लान फाइनल था और सपना साफ नेपाल जाकर मौज-मस्ती और फोटोशूट कर नई पहचान बनाना।लेकिन इन्हें यह समझ नहीं थी कि असली दुनिया में कैमरे सिर्फ फोटो नहीं लेते, बल्कि हर कदम की कहानी भी लिखते हैं।
सड़क किनारे लगे CCTV कैमरे और पुलिस का सर्विलांस सिस्टम इनकी हर चाल को धीरे-धीरे उजागर कर रहा था। जितना ये खुद को स्मार्ट समझ रहे थे, उतना ही इनकी हर हरकत सिस्टम की नजर में दर्ज होती जा रही थी। पूरा “क्राइम प्लान” अब पुलिस के रडार पर था और गिरोह की परतें खुलने लगी थीं।
8 अप्रैल की सुबह इस कहानी का क्लाइमेक्स बन गई,जब पुलिस मुठभेड़ में प्रियांशु, तुषार और प्रशांत घायल हुए और बाद में कुल छह आरोपी दबोच लिए गए, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। हालांकि इस गिरोह का सातवां सदस्य अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। नेपाल भागने का सपना वहीं खत्म हो गया और अब यह पूरा मामला जेल, सख्त कानून और टूटे हुए भविष्य की कहानी बन चुका है।
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