गन्ने के खेत में प्रेमिका ने प्रेमी का प्राइवेट पार्ट ब्लेड से काटा
हरदोई का दहला देने वाला कांड: 'प्यार में धोखे' का खौफनाक बदला
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। प्यार, धोखा और फिर बदले की ऐसी इंतकाम भरी दास्तां शायद ही आपने पहले कभी सुनी हो।
क्या है पूरा मामला
पाली थाना क्षेत्र में एक प्रेमी की बेरहमी से की गई 'सजा' चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि युवक की कुछ दिन पहले ही कहीं और शादी हुई थी, जिससे उसकी 4 साल पुरानी प्रेमिका बेहद खफा थी।
खेत में बुलाई मौत की दावत
प्रेमिका ने युवक को मिलने के बहाने गन्ने के खेत में बुलाया। युवक को क्या पता था कि वह किसी रोमांटिक मुलाकात के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सजा भुगतने जा रहा है।
आज तुम्हारा आखिरी सेक .होगा
मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर पहुँचते ही लड़की ने ठंडे दिमाग से कहा— "जल्दी करो, घरवाले ढूंढ रहे होंगे। आज तुम्हारा आखिरी सेक्.. होगा, इसके बाद तुम कभी किसी के साथ नहीं कर पाओगे!"बात पूरी होते ही, लड़की ने अचानक ब्लेड निकाला और युवक के प्राइवेट पार्ट पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। दर्द से कराहता युवक जैसे-तैसे खेत से बाहर भागा और स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
कानून का डंडा चलेगा!सोशल मीडिया पर लोग इस घटना पर बंटे हुए हैं। जहाँ कुछ लोग इसे धोखे का परिणाम बता रहे हैं, वहीं कानून के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी परिस्थिति में कानून को हाथ में लेना और हिंसा करना अक्षम्य अपराध है।पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और आरोपी युवती पर सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
नोट: यह पोस्ट घटना की जानकारी देने के उद्देश्य से है। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। कानून का रास्ता ही सबसे सही रास्ता है। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
मथुरा के महोली गांव में चली तड़ा तड़ गोलियां, वीडियो हो रहा सोशल मीडिया पर वायरल #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
बांदा में बच्चे की मां अपने भाई के साथ मुंबई जाने के लिए मानिकपुर से ट्रेन पकड़ने जा रही थी, तभी आरोपी ने बच्चे का अपहरण कर लिया।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी बच्चे को मार डालने की साजिश के तहत उसे लेकर भागा था। घटना रविवार शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है।फिलहाल पुलिस अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है और उससे लगातार पूछताछ कर रही है #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
यूपी के इतिहास में ये पहली ऐसी घटना है जहां सेना ने कमिश्नर ऑफिस को कब्जे में ले लिया
जब पानी से सिर से ऊपर बहेगा तो सेना उतरेगी ही…
ITBP जवान विकास सिंह की माँ को साँस के रोग से पीड़ित थी लेकिन इलाज में लापरवाही करते हुए कानपुर के कृष्णा अस्पताल वालो ने हाथ काट दिया
बेचारा जवान तीन दिन तक FIR लिखाने के लिए भटकता रहा
किसी ने जब उसकी नहीं सुनी तो आज दोपहर में पूरी बटालियन ने जब कमिश्नर ऑफिस को कब्जे में लिया तो पुलिस वालों की चीखें निकल गई। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
जब ITBP जवान के मां की जिंदगी पर बात आई, हथियारबंद कमांडो ने कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय को घेर लिया
कानपुर। देश की सरहदों की हिफाजत में तैनात जवान और दूसरी तरफ उनकी मां के लिए सिस्टम की बेरुखी। कानपुर से आई यह तस्वीर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख देने वाली है। आईटीबीपी का जवान अपनी मां के कटे हाथ को लेकर इंसाफ के लिए दर-दर भटकता रहा।
अस्पताल की लापरवाही और फिर स्वास्थ्य व पुलिस विभाग का ढुलमुल रवैया दिखा तो मां के इंसाफ के लिए आईटीबीपी के कमांडों ने शनिवार को कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेर लिया।
आईटीबीपी के कांस्टेबल विकास सिंह की मां का उपचार के दौरान हाथ कटने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट से नाराज उनके साथी जवानों ने शनिवार सुबह पुलिस आयुक्त कार्यालय घेर लिया। करीब आठ गाड़ियों में 50 से ज्यादा जवान पहुंचे। आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और लाइजनिंग अफसर अर्पित पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से मिलकर कार्रवाई करने को लेकर बात की।
पूरा कार्यालय छावनी में तब्दील हो गया। आईटीबीपी के कमांडेंट ने पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था विपिन ताडा से मिले। इसके बाद आधे से ज्यादा जवान गाड़ियों से परिसर के बाहर चले गए। लगभग एक घंटे से कमांडेंट समेत अफसर अपर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा से बात चली।
जांच से असंतुष्ट थे
अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था डा. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित आईटीबीपी जवान जांच रिपोर्ट के कई बिंदुओं पर असंतुष्ट थे। इसको लेकर वह अपने अधिकारियों और कई जवानों को लेकर आए थे। सीएमओ को बुलाया गया था। पीड़ित जिन बिंदुओं पर असंतुष्ट थे। उनकी पुनः जांच के लिए कहा गया है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया था मां को
महाराजपुर स्थित 32 बटालियन के अइटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को सांस की परेशानी पर 13 मई को टाटमिल स्थित कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान उनका हाथ काला पड़ गया था, जिसमें संक्रमण फैलने की वजह से उन्हें यहां से पारस हास्पिटल में भर्ती कराना पड़ा और 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा था।
डिब्बे में अपनी मां का कटा हाथ लेकर पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचा आइटीबीपी का जवान विकास। वीडियो ग्रैब
कटा हाथ लेकर पहुंचे थे कमिश्नर कार्यालय
20 मई को विकास अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर इंसाफ के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। पुलिस आयुक्त ने प्रकरण में सीएमओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस आयुक्त के अनुसार, जांच रिपोर्ट में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। पूरी रिपोर्ट संभावनाओं पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि हाथ का इंन्फेक्शन धर्मा एम्बोलिज्म की वजह से हो सकता है।
यह स्थिति कैसे बनी, यह रिपोर्ट में जिक्र नहीं
एम्बोलिज्म का मतलब है खून का थक्का बनना। यह स्थिति कैसे बनी, रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं है। इस रिपोर्ट को देख आईटीबीपी के अफसर भी नाराज हो गए। उन्होंने सीएमओ की गठित स्वास्थ्य विभाग की टीम पर अस्पताल प्रबंधन और डाक्टरों को बचाने का आरोप लगाया। शनिवार को कमांडेंट और 50 से अधिक जवानों में पुलिस आयुक्त कार्यालय घेर लिया। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
राजा भैया मेरे पापा सऊदी अरब की जेल में फंसे हैं मैं 2 महीने से गुहार लगा रही हूं मेरी मदद कीजिए #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों की गोलियों का सामना कर रहे जिले की सीमा पर स्थित झूंझुनूं जिले के गांव बलोदा के रहने वाले राजपूत राइफल के जवान शंकर सिंह अपने साथियों से बिछड़ गए थे।गोलियों के छर्रे लगने की वजह से बेहोश होकर कारगिल की पहाड़ियों में एक सप्ताह तक पड़े रहे। और बाद में उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया। आठ दिन की छुट्टियों के दौरान वह स्वस्थ नहीं हो सके तो उनकी अनुपस्थिति में कोर्ट मार्शल कर दिया गया।
13 साल तक जंजीरों में बांधकर रखा
इधर शंकर सिंह मानसिक रूप से इतना विक्षिप्त हो गए कि परिवार को जंजीरों में बांधकर रखना पड़ा। लगातार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी वह ठीक नहीं हुए और उन्हें 13 साल तक जंजीरों में बांधकर रखा गया। इस सैनिक की दर्दनाक कहानी का अंत फिर भी नहीं हुआ। उसे न तो सरकार की ओर से सहायता दी गई और न ही सेना की और से कोई मदद दी गई।
घरवालों ने इलाज में सब लुटाया
शंकर सिंह पिछले 27 साल से मानसिक रूप से बीमार हैं। उनका परिवार लगातार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहा है। शंकर सिंह की पत्नी कमोद सिंह ने प्रशासन और सेना से कई बार मदद की गुहार लगाई। कारगिल युद्ध से लौटने के बाद शंकर सिंह मानसिक स्थित लगातार बिगड़ती चली गई। परिवार ने उनके इलाज की अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी। लेकिन पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाई।
कोर्ट मार्शल कर दिया गया
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूर्व सैनिक को बेहतर चिकित्सा सुविधा, पेंशन और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की है। कमोद सिंह ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि सेना के कमांडर ने बगैर उनके पति शंकर सिंह का पक्ष जाने और उनकी स्थिति को समझे, कोर्ट मार्शल कर दिया गया।
सैन्य अस्पताल से नहीं मिला सहारा
शंकर सिंह मानसिक रूप से इतना विक्षिप्त हो चुके थे कि वह न तो बात कर सकते थे और ही अपनी दिनचर्या खुद चला पाते थे। मजबूरी में उन्हें बांधकर रखना पड़ा। सेना के अस्पताल में गए तो भगा दिया गया। जयपुर व झुंझुनूं के अस्पतालों में इलाज करवाते-करवाते जीवनभर की पूंजी खर्च कर दी है। किसी ने उनकी कोई सुध नहीं ली है।
कोर्ट से करेंगे मदद की अपील
ऑल इंडिया एक्ससर्विसमैन सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता धर्मपाल चौधरी ने कहा कि रक्षा मंत्री और सेना, सैनिकों के हित में कार्य करती है। शंकर सिंह का मामला अपवाद रहा। इसका कारण यह है कि इनके परिवार में कोई पढ़ा लिखा नहीं था और खुद शंकर सिंह मानसिक रोग से पीड़ित होने की वजह से अपना पक्ष नहीं रख पाए। निश्चित तौर पर शंकर सिंह के साथ अन्याय हुआ है। उनके समर्थन में हम न्यायालय की शरण लेंगे और इंसाफ दिलाने का कार्य करेंगे। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
हरदोई में सांसद जयप्रकाश रावत के आवास बाहर वादाखिलाफी के लगे पोस्टर, की
हरदोई में हरदोई से गुरसहायगंज तक वाया सांडी नई रेल लाइन निर्माण की मांग को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सांसद जयप्रकाश रावत के आवास के बाहर लगाए गए पोस्टरों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। पोस्टरों में सांसद पर चुनावी वादाखिलाफी के आरोप लगाए गए हैं और नई रेल लाइन निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।पोस्टर में लिखा गया है कि चुनाव के दौरान सांसद ने हर मंच से क्षेत्रवासियों को नई रेल लाइन बनवाने का भरोसा दिलाया था। लोगों को उम्मीद थी कि हरदोई, सांडी और गुरसहायगंज को जोड़ने वाली रेल परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। इसी को लेकर नाराजगी जाहिर की गई है।पोस्टर में सांडी रेलवे स्टेशन का एक काल्पनिक चित्र भी लगाया गया है। इसके साथ लिखा गया है कि यह रेल लाइन केवल यात्रा का साधन नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास, रोजगार, व्यापार, शिक्षा और बेहतर संपर्क का बड़ा माध्यम बन सकती है।पोस्टर के जरिए दशकों से लंबित इस मांग को जल्द पूरा करने की अपील की गई है।पोस्टरों में सांसद से पूछा गया है कि आखिर नई रेल लाइन का सपना कब साकार होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाएं तो संसद और रेल मंत्रालय में इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।पोस्टर के नीचे “सांडी रेल लाइन संघर्ष समिति” और “श्री शैलिक विधायक सेवा समिति” का नाम दर्ज है। समिति की ओर से लोगों से इस अभियान से जुड़ने और हरदोई से गुरसहायगंज वाया सांडी नई रेल लाइन निर्माण की मांग को समर्थन देने की अपील की गई है। सांसद आवास के बाहर पोस्टर लगाए जाने के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
नगर पालिका सीमा का हुआ बड़ा विस्तार, 6220 गाटा संख्या नए क्षेत्र में शामिल
हरदोई नगर पालिका परिषद की सीमा का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में करीब 1888.595 हेक्टेयर नए क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसके साथ ही 6220 गाटा संख्या अब नगर परिषद के दायरे में आ गई हैं।सीमा विस्तार के तहत बेहटा चांद, बहलोली, नानकगंज ग्रांट, रामनगर समेत कई गांवों और आसपास के क्षेत्रों को नगर पालिका सीमा में शामिल किया गया है। शासन के इस फैसले के बाद इन क्षेत्रों में नगर निकाय की सुविधाएं, विकास योजनाएं और शहरी सेवाएं लागू होंगी।नगर सीमा विस्तार को हरदोई शहर के बढ़ते दायरे और आबादी को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सड़क, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में शामिल हुए लोगों को अब नगर पालिका के नियमों और कर व्यवस्था के दायरे में भी आना होगा।प्रशासन के अनुसार अधिसूचना लागू होने के बाद संबंधित क्षेत्रों का राजस्व और प्रशासनिक रिकॉर्ड भी नगर निकाय के अनुसार अपडेट किया जाएगा। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट
दो बेटियों ने भागकर की थी शादी, तीसरी भी करती थी हिंदू लड़के से बात... पिता अंसारी ने काट डाला; ट्रेन में मिली सिर कटी लाश को लेकर बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस की एक बोगी में रखे बक्से से किशोरी के शव के टुकड़े बरामद हुए। बीते रविवार सुबह ट्रेन संख्या 15114 स्टेशन पहुंची तो सफाई के दौरान संदिग्ध बक्सा मिला।
जब उसे खोला गया तो अंदर प्लास्टिक और पुराने कपड़ों में लिपटे शव के पांच टुकड़े मिले। शव का सिर गायब था। मामला सामने आते ही जीआरपी और आरपीएफ की कई टीमें जांच में जुट गईं।
पुलिस ने स्टेशन और ट्रेन में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति अपने साथियों के साथ भारी बक्सा लेकर ट्रेन के स्लीपर कोच एस-1 में चढ़ता दिखाई दिया। जांच आगे बढ़ी तो आरोपी की पहचान कुशीनगर जिले के सेवरही निवासी बिग्गन अंसारी के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि बक्से में उसकी 16 वर्षीय बेटी शब्बा का शव था। पुलिस की मानें तो यही फुटेज पूरे मामले के खुलासे की सबसे बड़ी कड़ी साबित हुई।
प्रेम संबंध बना हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि शब्बा एक हिंदू युवक से फोन पर बातचीत करती थी। पिता बिग्गन अंसारी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। उसने कई बार बेटी को समझाया और युवक से दूर रहने की चेतावनी दी, लेकिन शब्बा ने संपर्क खत्म नहीं किया। इसी बात से नाराज होकर पिता बेटी से नफरत करने लगा। सूत्रों के अनुसार, आरोपी की दो बेटियां पहले ही प्रेम विवाह कर चुकी थीं, जिससे वह सामाजिक बदनामी महसूस कर रहा था। उसे डर था कि शब्बा भी उसी रास्ते पर चली जाएगी। इसी मानसिकता ने उसे इतना क्रूर बना दिया कि उसने अपनी ही बेटी की हत्या की साजिश रच डाली।
परिवार के साथ मिलकर रची गई साजिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने वारदात को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। पांच दिन पहले उसने अपनी पत्नी और दोनों बेटों को रिश्तेदारों के घर भेज दिया था। घर में केवल शब्बा और उसकी बुजुर्ग दादी बची थीं। 16 मई को बिग्गन ने अपनी बहन नूरजहां और बहनोई मजबुल्लाह को घर बुलाया। देर शाम तीनों ने मिलकर शब्बा की हत्या कर दी।
इसके बाद धारदार हथियार से शव के छह टुकड़े किए गए। पहचान छिपाने के लिए सिर धड़ से अलग कर गांव के तालाब में फेंक दिया गया। बाकी हिस्सों को प्लास्टिक और कपड़ों में लपेटकर बक्से में बंद किया गया और ई-रिक्शा से तमकुही रोड स्टेशन पहुंचाया गया।
तालाब से मिला सिर, जल्द करेगी खुलासा
आरोपी और उसके साथी बक्से को छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में रखकर एसी कोच की तरफ से बाहर निकल गए। हालांकि कैमरों में उनकी हर गतिविधि कैद हो गई। पूछताछ के बाद आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने गांव के तालाब में गोताखोर उतारे, जहां से किशोरी का कटा हुआ सिर और हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया गया। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। जीआरपी अब आरोपी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है और मामले का जल्द आधिकारिक खुलासा करेगी। #📰 उत्तर प्रदेश अपडेट









