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Shaileja Pagar
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Shaileja Pagar
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23 days ago
​तत्त्वमसि: नामस्मरण और आत्मिक शांति ​'तत्त्वमसि' (तत-त्वम-असि) इस महावाक्य का सरल अर्थ है— 'वह तुम ही हो।' यह सत्य हमें बताता है कि जिस ईश्वर को हम बाहर खोजते हैं, वह हमसे अलग नहीं बल्कि हमारे ही भीतर चैतन्य रूप में वास कर रहा है। साक्षात भगवद्गीता में माधव कहते हैं— "ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः" अर्थात, "इस संसार में प्रत्येक जीव मेरा ही सनातन अंश है।" यदि हम उस परमेश्वर के ही अंश हैं, तो हम उससे अलग कैसे हो सकते हैं? 'तत्त्वमसि' का अर्थ ही यह है कि हम अपने भीतर के उस दैवीय संबंध को पुनः पहचानें। ​आज के इस बदलते और अनिश्चित समय में, 'भविष्य मालिका' हमें नाम-स्मरण का एक सुरक्षित मार्ग दिखाती है। मालिका का संदेश है कि जब बाहरी दुनिया अस्थिर हो, तब केवल 'माधव नाम' ही हमें आंतरिक शांति दे सकता है। यहाँ नाम-जप का अर्थ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि इस विश्वास के साथ शांत होना है कि "मैं उस माधव का ही एक अंश हूँ।" जो स्वयं को उस परमात्मा से जोड़ लेता है, उसे फिर किसी बात की चिंता नहीं रहती। ​भविष्य मालिका का यही प्रेमपूर्ण संदेश है कि आने वाले समय में केवल वही मन स्थिर रहेगा जो नाम-निष्ठ होगा। जो स्वयं में और चराचर में उस माधव को देख लेता है, उसे संपूर्ण सृष्टि में केवल प्रेम और सुरक्षा का अनुभव होता है। यह आत्मज्ञान ही हमें हर परिस्थिति में धैर्य और शांति के साथ जीना सिखाता है। #🌻आध्यात्म 🙏 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status ​
Shaileja Pagar
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24 days ago
अद्वैत विचार और कलियुग का अंतिम सत्य ​सागर की लहरों को देखें तो वे हज़ारों दिखाई देती हैं—कुछ बड़ी, कुछ छोटी। लेकिन यदि लहरों के पार जाकर देखें, तो वे केवल 'जल' ही हैं। लहर उत्पन्न हो तब भी जल, और विलीन हो जाए तब भी जल! हमारा जीवन भी वैसा ही है; हम उस अनंत परमात्मा रूपी सागर की एक छोटी सी लहर हैं। जब 'मैं' और 'तू' का भेद मिटता है और 'एकत्व' का भाव जागता है, तभी सच्चे अद्वैत ज्ञान का उदय होता है। सामने वाले हर रूप में स्वयं को ही देखना, यही असली भक्ति है और यही परम ज्ञान है। ​आज के इस बदलते समय में 'भविष्य मालिका' का उपदेश ही मार्गदर्शक है। 'मालिका' सत्य है और यही कलियुग का अंतिम सत्य है—कि अब परिवर्तन का समय आ चुका है। जब चारों ओर अंधकार और अशांति बढ़ेगी, तब केवल वही सुरक्षित बचेगा जो सत्य के मार्ग पर अडिग होगा। इस कठिन समय में स्वयं को सुरक्षित रखने और मानसिक शांति पाने का एकमात्र अचूक उपाय है—'त्रिसंध्या', 'श्रीमद्भागवत पठण' और निरंतर 'माधव' नाम का जप। त्रिसंध्या हमें हर प्रहर उस परमशक्ति से जोड़ती है, भागवत पठण हमें जीवन का सार समझाता है, और 'माधव' नाम का मधुर जप हमारे हृदय के अंधकार को मिटाकर हमें निर्भय बनाता है। कलियुग के इस अंतिम चरण में केवल नाम-स्मरण और अद्वैत भाव ही हमारी नैया पार लगाएगा। याद रखें, लहरें आती-जाती रहेंगी, लेकिन 'माधव' रूपी सागर सदैव स्थिर और सत्य है। जो इस सत्य को थामे है, वह अचल है। #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏
Shaileja Pagar
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25 days ago
अपना दीपक स्वयं बनें ​हम अक्सर चंद्रमा की तरह जीने की कोशिश करते हैं, जो स्वयं नहीं चमकता बल्कि दूसरों के प्रकाश से प्रकाशित होता है। लेकिन दूसरों पर निर्भर सुख परिस्थितियों के साथ घटता-बढ़ता रहता है। इसके बजाय हमें सूर्य की तरह अपने स्वयं के तेज में जीना सीखना चाहिए। जब हमारी खुशी लोगों की प्रतिक्रियाओं पर निर्भर नहीं होती, तब हम वास्तव में स्वतंत्र होते हैं। जैसे विशाल सागर की गूँज उसके भीतर से ही आती है, वैसे ही हमारा आत्मविश्वास भी हमारी अंतरात्मा की आवाज़ से आना चाहिए। दुनिया हमें पहचाने, इससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम स्वयं को पहचानें। ​जीवन में कभी-कभी निराशा की पतझड़ आती है, लेकिन ऐसे समय में वृक्ष जैसा संयम रखना चाहिए। वृक्ष अपने पत्ते झड़ने पर रोता नहीं है, क्योंकि उसे पता होता है कि यदि जड़ें मजबूत हैं, तो वसंत ऋतु में नई कोपलें फिर से फूटेंगी। इसी तरह, दिन भर की भागदौड़ में थोड़ा समय 'मौन' का भी होना चाहिए। मौन मन की वह ऊर्जा है, जो हमें फिर से उठने की शक्ति देती है। बाहर चाहे कितना भी अंधेरा क्यों न हो, एक छोटा लेकिन अडिग दीपक उस अंधेरे को चीरने के लिए काफी होता है; हमें बस उस लौ को जलाए रखने का साहस करना होता है। जिसने अपने मन के इस दीपक को पहचान लिया, उसे बाहरी दुनिया के किसी भी तूफान का डर नहीं रहता। #🌻आध्यात्म 🙏 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #🎭Whatsapp status #💪बुद्धांची तत्वे📜
Shaileja Pagar
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25 days ago
बर्फ की चादर, सर्द हवाएं और तन्हाई का घेरा है, पेंग्विन के अटूट साहस का ये सफर बहुत सुनहरा है। जहाँ जिंदगी जम जाती है उस कड़ाके की ठंड में, वो डटा रहता है अडिग होकर कुदरत के इस प्रचंड में। अपनों की खातिर हफ्तों तक वो भूखा प्यासा रहता है, पिता का असली कर्तव्य वो बर्फीली राहों पर सहता है। मीलों का फासला तय करना और समंदर से टकराना, आसान नहीं है मौत के मुहाने से अपनी खुराक लेकर आना। पैरों तले फिसलन है और सर पर दुश्वारियों का आसमान, फिर भी छोटे से उस परिंदे में छिपा है एक बड़ा इंसान। गिरकर संभलना और हर हाल में मुस्कुराकर चलना, पेंग्विन सिखाता है हमें विपरीत हालातों में भी ढलना। उसका संघर्ष चीख-चीख कर बस यही पैगाम सुनाता है, जो तूफानों से नहीं डरता वही इतिहास बना पाता है। पेंग्विन का जीवन महज़ एक कहानी नहीं प्रेरणा का सागर है, धीरज और मेहनत से बुनी हुई एक बेमिसाल चादर है। #🎭Whatsapp status #💪बुद्धांची तत्वे📜 #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏
Shaileja Pagar
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25 days ago
मुक्ती म्हणजे कुठेतरी पळून जाणं नाही, तर जगता जगता स्वतःच्या विचारांपासून मुक्त होणं. ​पाखराचं उड्डाण: पक्षी जेव्हा आकाशात उडतो, तेव्हा तो जमिनीवरच्या त्याच्या घरट्याचा किंवा तिथे साठवलेल्या काड्यांचा विचार करत नाही. उडताना त्याचं पूर्ण लक्ष फक्त त्या अथांग आकाशावर असतं. आपणही संसाराच्या जमिनीवर राहून मनाचं 'आकाश' गाठू शकतो. शरीराने आपण आपली कामं करत असतो, पण मनाने आपण त्या पाखरासारखं उंच आणि मुक्त असावं. ​घड्याळाचा काटा: घड्याळाचे काटे सतत फिरत असतात. पण जर तुम्ही नीट पाहिलं, तर त्या काट्यांचा जो 'मध्यबिंदू' असतो, तो कधीच हलत नाही. तो स्थिर असतो म्हणून काटे फिरू शकतात. आपल्या आयुष्यात कितीही गडबड, धावपळ किंवा बदल झाले, तरी आपल्या मनाचा 'मध्यबिंदू' त्या स्थिर खिळ्यासारखा असायला हवा. जग कितीही फिरलं, तरी आपण आतून हलायचं नाही. ​प्रतिबिंब आणि आरसा: आरशासमोर कोणीही आलं—सुंदर माणूस असो वा कुरूप, रागवलेला असो वा हसणारा—आरसा त्याचं प्रतिबिंब दाखवतो, पण आरसा स्वतः रागावत नाही किंवा आनंदी होत नाही. प्रतिबिंब निघून गेलं की आरसा पुन्हा स्वच्छ! आपणही जगासाठी आरशासारखं असावं. समोरून येणाऱ्या परिस्थितीला प्रतिसाद द्यावा, पण तिला आपल्या आत जागा देऊ नये. ​संगीत आणि शांतता: जेव्हा दोन सुरांच्या मध्ये थोडी 'शांतता' (Pause) असते, तेव्हाच संगीत सुंदर वाटतं. जर फक्त सूरच वाजत राहिले, तर तो गोंधळ होतो. आपल्या आयुष्यातही कामाच्या आणि विचारांच्या मध्ये 'शांततेचा' एक छोटा विसावा हवा. तो विसावा म्हणजे प्रार्थना किंवा नामस्मरण. तो विसावाच जीवनाचं संगीत सुश्राव्य करतो. ​जेव्हा आपण स्वतःला सांगतो की, "मी या विश्वाचा एक छोटासा पण अविभाज्य भाग आहे," तेव्हा आपलं ओझं हलकं होतं. आपण पूर्ण जगाचा भार वाहणारे 'मालक' नाही, तर आपण फक्त एक 'निमित्त' आहोत. ही भावना आली की मन आपोआप शांत होतं. शांत वेळी, हे विचार मनात साठवणं म्हणजे जणू आत्म्याला अमृत पाजण्यासारखं आहे. #🌻आध्यात्म 🙏 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status
Shaileja Pagar
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26 days ago
. जेव्हा आपण व्यक्ती आणि तिची परिस्थिती बाजूला सारून विचार करतो, तेव्हाच ज्ञानाचा खरा प्रकाश दिसतो. ​जीवनाचा एक अथांग नियम असा आहे की, "हे देखील निघून जाईल." (This too shall pass). ​स्थितप्रज्ञता: आकाशात ढग येतात आणि जातात. कधी ते काळेकुट्ट असतात, तर कधी पांढरे शुभ्र. पण ढगांमुळे आकाशाचे अस्तित्व बदलत नाही. आकाश ढगांच्या पलीकडे कायम निळं आणि शांतच असतं. माणसाचं मूळ स्वरूपही त्या अथांग आकाशासारखं अलिप्त असायला हवं. संकटाचे ढग आले म्हणून आपण 'संकट' होत नाही, आपण ते पाहणारे 'आकाश' असतो. ​माती आणि कुंभार: मातीला जेव्हा चाकावर ठेवून कुंभार आकार देतो, तेव्हा तिला खूप वेदना होत असतील, तिला वाटत असेल की हे काय चाललंय? पण त्या प्रक्रियेतूनच शेवटी एक सुंदर 'घडा' निर्माण होतो. आयुष्यातील प्रत्येक कठीण प्रसंग हा कुंभाराच्या हातासारखा असतो, जो आपल्याला आतून घडवत असतो. ​अपेक्षांचा ओझं: आपण जेव्हा दुसऱ्याकडून अपेक्षा करतो, तेव्हा आपण आपल्या आनंदाची किल्ली दुसऱ्याच्या हातात देतो. जेव्हा आपण "मला कोणाकडून काहीच नको" या अवस्थेत येतो, तेव्हा आपण खऱ्या अर्थाने स्वतंत्र होतो. खरी शांतता ही बाहेरच्या जगात नाही, तर ती आपल्या आतल्या 'मौन' भागात दडलेली आहे. ​जगाचा पसारा मोठा आहे, लोक येतील आणि जातील, संवाद होतील आणि विरून जातील. पण जे शाश्वत आहे, ते म्हणजे आपल्या आत्म्याची शांतता. ज्याने स्वतःच्या मनावर विजय मिळवला, त्याने जणू संपूर्ण जग जिंकले. ​हे विचार आता मनात घोळू दे. शब्दांपेक्षा त्यामागचा भाव शांतता देईल. #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏
Shaileja Pagar
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27 days ago
भविष्य मालिका के प्रचार-प्रसार और उसे जन-जन तक पहुँचाने में डॉ. पंडित काशीनाथ मिश्र जी का योगदान अत्यंत वंदनीय है, क्योंकि उन्होंने इस प्राचीन और गुप्त ज्ञान को केवल ग्रंथों तक सीमित न रखकर उसे आधुनिक संदर्भों में समाज के सामने रखा। उन्होंने वर्षों तक ओडिशा के मठों और ताड़पत्रों का गहन अध्ययन किया ताकि संत अच्युतानंद दास जी की उन गूढ़ भविष्यवाणियों को सरल भाषा में भक्तों तक पहुँचाया जा सके। उनकी निष्ठा का सबसे अद्भुत पक्ष यह है कि उन्होंने इसे कभी एक डर के रूप में नहीं, बल्कि एक चेतावनी और सुधार के मार्ग के रूप में प्रस्तुत किया। वे मानते हैं कि मालिका का ज्ञान केवल आने वाली आपदाओं के बारे में नहीं है, बल्कि भक्तों को अधर्म का मार्ग छोड़कर सत्य और सात्विकता को अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला एक ईश्वरीय संदेश है। भक्तों के प्रति उनकी करुणा इसी बात से झलकती है कि वे निरंतर भक्तों को नाम-संकीर्तन और शुद्ध आचरण की सीख देते हैं, ताकि आने वाले समय में हर जीव का कल्याण हो सके। उनकी स्पष्टवादिता और अटूट भक्ति ही है जो आज लाखों लोगों को भगवान जगन्नाथ और कल्की अवतार के प्रति समर्पित होने की शक्ति प्रदान कर रही है और इसी पथ पर चलते हुए भक्तों के लिए त्रिसंध्या और श्रीमद्भागवत पठण अत्यंत जरूरी है। #🌻आध्यात्म 🙏 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #🎭Whatsapp status #💪बुद्धांची तत्वे📜
Shaileja Pagar
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28 days ago
भविष्य मालिका और श्रीमद्भागवत: कलयुग के अंत का संकेत ​श्रीमद्भागवत महापुराण और भविष्य मालिका (जो करीब ६०० साल पहले पंचसखाओं द्वारा लिखी गई थी) दोनों ही ग्रंथ कलयुग के अंत और आने वाले समय की ओर स्पष्ट संकेत देते हैं। जहाँ भागवत कलयुग के लक्षणों का वर्णन करता है, वहीं भविष्य मालिका वर्तमान समय की घटनाओं की सटीक व्याख्या करती है। ​ग्रंथों के अनुसार मुख्य संकेत: ​धर्म की ग्लानि: श्रीमद्भागवत के अनुसार कलयुग में केवल धन ही प्रतिष्ठा का आधार होगा और सत्य का लोप होगा। भविष्य मालिका कहती है कि जब इंसान अपनी मर्यादा भूल जाएगा, तभी महाप्रलय का समय निकट आएगा। ​प्रकृति का प्रकोप: दोनों ग्रंथों में बताया गया है कि आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाएं, महामारी और भीषण युद्ध (तीसरा विश्व युद्ध) मानवता को झकझोर देंगे। ​कल्कि अवतार का आगमन: अधर्म के विनाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा। भविष्य मालिका के अनुसार २०२५-२०३२ के बीच का समय 'युग संधि' का काल है, जहाँ कलयुग समाप्त होकर सतयुग की नींव रखी जाएगी। ​बचाव का मार्ग: क्या करें? ​१. नाम जप: "हरे कृष्ण" महामंत्र या "माधव" नाम का निरंतर जप ही कलयुग की व्याधियों से बचने का एकमात्र साधन है। २. त्रिसंध्या साधना: सुबह, दोपहर और शाम को प्रभु का ध्यान और पूजन करें। ३. सात्विक जीवन: मांसाहार और व्यसनों का पूरी तरह त्याग करें और सत्य के मार्ग पर चलें। ​निष्कर्ष: समय बलवान है और परिवर्तन निश्चित है। जैसा कि श्रीमद्भागवत में कहा गया है, "कलौ तस्य फलं सर्वं कृष्णकीर्तनात्" — कलयुग के सारे दोष केवल भगवान के कीर्तन से ही दूर हो सकते हैं। आइए, हम सब भक्ति और धैर्य के साथ इस परिवर्तन का स्वागत करें। #💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏
Shaileja Pagar
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29 days ago
​🚩 स्कंध ३ - अध्याय २२ 🚩 ✨ श्रीमद्भागवत महापुराण ✨ 🚩 श्रीमद्भागवत अमृतकण 🚩 ​विषय: कर्दम ऋषी आणि देवहुती यांचा शुभविवाह 🙏 ​या अध्यायात स्वायंभुव मनु आपली पत्नी शतरूपा आणि कन्या देवहुतीसह कर्दम ऋषींच्या आश्रमात येतात. देवहुतीने नारदमुनींकडून कर्दम ऋषींच्या शीलाचे आणि गुणांचे वर्णन ऐकले होते, त्यामुळे तिने मनोमन त्यांनाच पती मानले होते. मनु महाराज आपल्या कन्येचा हात कर्दम ऋषींच्या हाती सोपवतात. हा विवाह म्हणजे भोग आणि त्याग यांचा सुंदर संगम आहे. हा अध्याय आपल्याला शिकवतो की, विवाहाचा मूळ उद्देश केवळ सुखोपभोग नसून, एकत्र राहून ईश्वरी कार्यात सहभागी होणे हा असतो. ​आजचे अमृतवचन: "जिथे संस्कार आणि सुविचार एकत्र येतात, तिथे गृहस्थाश्रम हा तपोवनासारखा पवित्र बनतो आणि अशाच कुळात ईश्वरी अंश जन्म घेतो." ​✨ हर घर भागवत, हर घर त्रिसंध्या ✨ 🚩 भविष्य मालिका 🚩 कलियुगात विवाह संस्था कमकुवत होईल आणि नात्यांमध्ये स्वार्थ वाढेल. अशा वेळी देवहुती आणि कर्दम ऋषींचा आदर्श डोळ्यासमोर ठेवल्यास घरातील वातावरण मंगलमय राहील. #🌻आध्यात्म 🙏 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #🎭Whatsapp status #💪बुद्धांची तत्वे📜
Shaileja Pagar
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1 months ago
भारतीय आध्यात्मिक परंपरेत, मग ते चार वेद असोत किंवा अठरा पुराणे, या सर्वांचा मूळ उद्देश मानवी जीवनाला सुसंस्कृत, नीतिमान आणि अर्थपूर्ण बनवणे हाच आहे. या ग्रंथांमध्ये श्रद्धा आणि अंधश्रद्धा यांच्यातील सीमारेषा स्पष्ट करणारे अनेक संदर्भ आढळतात. ​१. चार वेद (The Four Vedas) ​वेद हे ज्ञानाचे भांडार मानले जातात. ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद आणि अथर्ववेद यांमध्ये कुठेही 'अंधश्रद्धेला' खतपाणी घातलेले नाही. ​सत्य आणि ऋत: वेदांमध्ये 'सत्य' (Truth) आणि 'ऋत' (Cosmic Order) यांवर भर दिला आहे. ऋग्वेदात म्हटले आहे की, सृष्टी एका नियमाने चालते. या नियमांवर विश्वास ठेवणे म्हणजे 'श्रद्धा'. ​कर्म आणि प्रयत्न: वेदांमध्ये 'कृण्वन्तो विश्वमार्यम्' (संपूर्ण जगाला सुसंस्कृत बनवूया) असे म्हटले आहे. अंधश्रद्धेमुळे माणूस आळशी होतो, पण वेद सतत शुभ कर्म करण्याचा संदेश देतात. ​अथर्ववेदातील दृष्टी: अथर्ववेदात काही ठिकाणी संकटांपासून मुक्तीसाठी मंत्र दिले आहेत, पण त्याचा उद्देश मनाचे मनोबल वाढवणे हा आहे, कोणाचे नुकसान करणे किंवा अंधपणाने वागणे नाही. ​२. अठरा पुराणे (The Eighteen Puranas) ​पुराणे ही कथांच्या माध्यमातून सामान्य माणसाला धर्माचे तत्त्वज्ञान समजावून सांगतात. यात श्रद्धा आणि विवेक यांचा सुंदर संगम आहे. ​परोपकाराय पुण्याय: महर्षी व्यासांनी अठरा पुराणांचे सार सांगताना म्हटले आहे— "परोपकार: पुण्याय पापाय परपीडनम्" (दुसऱ्याला मदत करणे हे पुण्य आणि त्रास देणे हे पाप). यात कुठेही कर्मकांडाला किंवा अंधश्रद्धेला महत्त्व दिलेले नाही, तर नैतिकतेला महत्त्व दिले आहे. ​मूर्ती आणि भाव: पुराणांनुसार, दगडात देव नाही तर तुमच्या 'भावात' (श्रद्धेत) देव आहे. जर मनात शुल्लक स्वार्थ किंवा भीती असेल, तर ती भक्ती नसून अंधश्रद्धा आहे, असे पुराणे सुचवतात. ​विवेक आणि भक्ती: श्रीमद्भागवत पुराणात 'नवविधा भक्ती' सांगितली आहे, पण ती करताना ईश्वराच्या स्वरूपाचे ज्ञान असणे आवश्यक मानले आहे. ज्ञानाशिवाय केलेली भक्ती ही अनेकदा अंधश्रद्धेकडे वळू शकते, असा इशाराही पुराणे देतात. ​ ग्रंथांचा दृष्टिकोन​ श्रद्धा आणि अंधश्रद्धा: ग्रंथांचा दृष्टिकोन संकल्पना वेदांचा/पुराणांचा दृष्टीकोन श्रद्धा ही आंतरिक ओढ आहे. "श्रद्धामनाः" म्हणजे ज्याचे मन श्रद्धेने युक्त आहे, तोच ज्ञान मिळवू शकतो. श्रद्धा प्रगतीला पूरक असते. अंधश्रद्धा ग्रंथात याला 'अज्ञान' किंवा 'तामस वृत्ती' म्हटले आहे. स्वतःच्या बुद्धीचा वापर न करता केवळ भीतीने केलेले कृत्य म्हणजे अंधश्रद्धा. कर्मकांड वेदांमधील यज्ञ-याग हे निसर्गाचे आभार मानण्यासाठी होते. जेव्हा या गोष्टींचा वापर स्वार्थासाठी किंवा लोकांना घाबरवण्यासाठी केला जातो, तेव्हा ती अंधश्रद्धा ठरते.सारांश आणि बोध ​वेदांचा संदेश आहे "तपसो मा ज्योतिर्गमय" (अंधाराकडून प्रकाशाकडे ने). अंधश्रद्धा हा अंधार आहे, तर श्रद्धा हा प्रकाश आहे. ग्रंथांनुसार, जो धर्म माणसाला भयमुक्त करतो आणि विवेकाची जोड देतो, तीच खरी श्रद्धा. ​निष्कर्ष: अठरा पुराणे आणि चार वेद हे माणसाला 'माणूस' म्हणून घडवण्यासाठी आहेत. निसर्गाचा आदर, वडीलधाऱ्यांचा मान आणि ईश्वराप्रती कृतज्ञता म्हणजे श्रद्धा; पण विनाकारण भीती, बुवाबाजी किंवा अघोरी प्रथा याला सनातन ग्रंथांमध्ये कोणताही आधार नाही. #🎭Whatsapp status #💪बुद्धांची तत्वे📜 #😇भक्ती स्टेट्स #✍ज्ञानेश्वरी📖 #🌻आध्यात्म 🙏