❇️ *बोकारो:बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया,"कागजों में जिंदा"होने के लिए बुजुर्ग लगा रहे सरकारी कार्यालयों का चक्कर*
बोकारो जिले में एक बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिए जाने का मामला सामने आया है. 83 वर्षीय धरनीधर मांझी की पेंशन सत्यापन के बाद बंद कर दी गई, जबकि वे जीवित हैं. उन्होंने कई अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन समाधान नहीं मिला. अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और पीड़ित को मदद का भरोसा दिलाया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दामुडीह पंचायत के गोपीनाथपुर निवासी 83 वर्षीय धरनीधर मांझी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित हैं और अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं. धरनीधर मांझी को वर्ष 2021-22 में वृद्धावस्था पेंशन मिलनी शुरू हुई थी, लेकिन 2022-23 में हुए संयुक्त भौतिक सत्यापन के बाद पंचायत स्तर पर उन्हें 'मृत' दिखा दिया गया, जिसके चलते उनकी पेंशन अचानक बंद कर दी गई.जब बुजुर्ग को इस बात की जानकारी मिली तो उसने अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।पीड़ित बुजुर्ग अब लगातार ब्लॉक कार्यालय, और अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं हर जगह उसे सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन सुधार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी गलतियां केवल कागजों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम होने के बावजूद ऐसी त्रुटियां यह दर्शाती हैं कि फील्ड स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया अभी भी कमजोर है।मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और जल्द ही गलती को सुधारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में तुरंत सुधार सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।यह मामला दिखाता है कि सरकारी रिकॉर्ड में छोटी सी गलती भी किसी व्यक्ति के जीवन को कितना प्रभावित कर सकती है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि बुजुर्ग को कब "कागजों में जिंदा" किया जाता है।
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