छत्तीसगढ़ के मड़ई मेला
छत्तीसगढ़ के मड़ई मेला, अड़बड़ मजा आथे जी
बछर म एक बार हंसी-ठिठोली के मउका लाथे जी ।।
नाना-नानी ममा-मामी फूफा-फूफी अउ
संग-संगवारी, जम्मो नेवता पा के आथे जी।
किसम किसम के दुकान एक दिन पहली सज जाथे जी
आनी-बानी के मेवा मिठई एक जघा मिल जाथे जी ।
टीकली-फुंदरी अउ माला-मुंदरी पलभर म बिक जाथे जी ।
टुरा-टुरी मटक-2 के मया-पीरीत के गोठ गोठियाथे जी ।
झुला झुले के ढेलवा घुमे के बड़ मजा आथे जी ।
लईकामन जंपिंगजापान अउ मिकीमाउस के मंजा पाथे जी ।
संझा बेरा म मड़ई हा बिहाथे जी
राऊत नाचा के धुन म, सबों झन झूम जाथे जी ।
रात म खा पीके फेर नाचा देखें ब जिम्मो आथे जी ।
परी-जोकड़ के नाच-नकल देख मन गुदगुदाथे जी ।
छत्तीसगढ़ के मड़ई मेला, अड़बड़ मजा आथे जी
बछर म एक बार हंसी ठिठोली के मउका लाथे जी ।।
CLk Dahak
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