मेरी कलम से
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221 2122 1221 212 झूठी सही खता मेरी कोई बता तो दे बहने दे आँसु मेरे तू कोई सजा तो दे जीना मुहाल हो गया तेरे बिना मेरा हक़ में तू मेरे फैसला कोई सुना तो दे तू ही बता में कैसे बिताऊँ ये ज़िन्दगी हो जाऊँ में फ़ना एसी कोई दुआ तो दे तूने संभाल क्यों रखे खत आज भी मेरे उन्हें बहा दे या फिर उनको जला तो दे होती तु ख्वाब कोई भुला भी देते तुझे कैसे भुलाऊं तुझे मुझे हौसला तो दे हम खोये रहते है उन राहो पे आज भी आके मंजिल कि राहमुझे तू दिखा तो दे ( लक्ष्मण दावानी ) 17/12/2016 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
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