सन् 2014 में जब संत रामपाल जी महाराज ने शास्त्रों के आधार पर सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान समाज के सामने रखना शुरू किया, तब कुछ संगठनों, विशेषकर आर्य समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। कारण यह था कि वे जनता को सरल भाषा में वास्तविक ज्ञान से अवगत करा रहे थे, जिससे लोग सत्य को पहचानने लगे।
विरोध इतना बढ़ा कि करोंथा आश्रम को बंद करवाया गया और अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न की गईं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने सत्य के मार्ग को नहीं छोड़ा।
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके आश्रम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, नेपाल और अन्य देशों में भी स्थापित हैं। उनका ज्ञान सीमाओं से परे जाकर विश्वभर में फैल रहा है।
आने वाले समय में यह ज्ञान पूरे विश्व में और अधिक व्यापक रूप से पहुँचेगा, और अधिक से अधिक लोग सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ेंगे।
संदेश स्पष्ट है — सत्य को कभी रोका नहीं जा सकता। सच्चा ज्ञान समय के साथ पूरी दुनिया में अपना प्रकाश फैलाता है।
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