अक्सर हम खुशी को चेहरे की मुस्कान, बाहर की हँसी या हालात के ठीक होने से जोड़ देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ये सब सिर्फ उसके संकेत हैं, स्रोत नहीं। असली खुशी तब जन्म लेती है जब हमारा मन अपने मूल से जुड़ा होता है। जब कनेक्शन सही होता है, तो परिस्थितियाँ बदलें या न बदलें, अंदर की स्थिति स्थिर रहती है।
सही कनेक्शन मतलब अपनी पहचान से जुड़ना, अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानना और उस सर्वोच्च स्रोत से लिंक रहना जहाँ से शांति, सुरक्षा और आत्मविश्वास स्वतः बहता है। इस कनेक्शन में रहने वाला व्यक्ति खुशी को दिखाने की कोशिश नहीं करता, वह खुशी में रहता है।
जब कनेक्शन टूटता है, तब हम खुशी को बाहर ढूँढते हैं। और जब कनेक्शन मजबूत होता है, तब खुशी स्वाभाविक हो जाती है। यही फर्क है एक्सप्रेशन और रिज़ल्ट में।
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