हर रिश्ता शब्दों से नहीं, ऊर्जा से चलता है। जब मन शिकायत, आलोचना और अपेक्षाओं से भर जाता है, तो दूरियाँ बढ़ने लगती हैं। लेकिन जब वही मन दुआ, शुभभावना और स्वीकारभाव से भर जाता है, तो रिश्तों में मौन रूप से उपचार शुरू हो जाता है।
हर आत्मा के लिए शुभ सोचिए। किसी को बदलने की कोशिश मत कीजिए। कई बार एक सच्ची दुआ वह परिवर्तन कर देती है, जो हजारों शब्द नहीं कर पाते।
रिश्तों को सही साबित करने से अधिक, उन्हें शुभ संकल्पों से सींचिए। क्योंकि जहाँ दुआएँ होती हैं, वहाँ विश्वास लौटता है, प्रेम गहराता है और संबंध फिर से जीवंत हो उठते हैं।
#📃लाइफ कोट्स ✒️