उसे खोकर पाना और पाकर खोना आया
आज बड़े दिनों बाद मुझे फिर रोना आया
उलझा लिया खुद को उसमें तब ये जाना
अब तक भी हमें ना किसी का होना आया
सुनते है मन भीगते हैं इश्क़ की बारिशों में
हमें मगर अश्कों से ही इसे भिगोना आया
बेखुदी में जो इक बार उनके हो लिए हम
फिर कहाँ हमें किसी और का होना आया
रोज चली आती है रात ख़्वाब लिए दर पर
इश्किया आँखों को मगर कब सोना आया
बन रही थी जब लकीरें और बटी तकदीरें
तो मेरे हिस्से ताउम्र खुद ही को ढोना आया।।
#M.श्यामनंदन #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक