Shyamnandan Kumar
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Shyamnandan Kumar
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हम बोलतानी कविता सायर की जुबानी
#📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📚कविता-कहानी संग्रह - उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #26 jan
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - दिहलु 1 ना साथ हमार ,जब फसल रही मझधार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ बहुते रोअनि प्यार में तोहरा, कई बेर जोड़नि हाथ हो तोहरा बिना हम जी ना पाईब, बस तोहरे चाही साथ होे পইলু साथी हमरा प्यार में ना जाने कवन कमी निभईबु, जब लूट गइनी संसार में अब का हमार तू साथ दोस्ती के जन हाथ बढ़ाव&्ष आदत लगा के चल जईबु जईबु कवनों वार आई तोहपे, पल भर में बदल Jq हमके रहे भरोसा तोहपे, सपना टूटल हजार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ ना कॉल ना मैसेज करबु, ना कवो करबु बात हो दिल से कईसे निभईबु रिश्ता, हमरा नईखे बुझात हो दिल से प्यार दिमाग में नफरत, चलता तोहरा कपार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ श्यामनंदन दिहलु 1 ना साथ हमार ,जब फसल रही मझधार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ बहुते रोअनि प्यार में तोहरा, कई बेर जोड़नि हाथ हो तोहरा बिना हम जी ना पाईब, बस तोहरे चाही साथ होे পইলু साथी हमरा प्यार में ना जाने कवन कमी निभईबु, जब लूट गइनी संसार में अब का हमार तू साथ दोस्ती के जन हाथ बढ़ाव&्ष आदत लगा के चल जईबु जईबु कवनों वार आई तोहपे, पल भर में बदल Jq हमके रहे भरोसा तोहपे, सपना टूटल हजार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ ना कॉल ना मैसेज करबु, ना कवो करबु बात हो दिल से कईसे निभईबु रिश्ता, हमरा नईखे बुझात हो दिल से प्यार दिमाग में नफरत, चलता तोहरा कपार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ श्यामनंदन - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - कहीं दही सजाव नइखे मोह-माया भाव नइखे आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे हर जघे खाली स्टंट चले धोबी पछाड़  दाव नइखे मोछ राखता सभे बाकि बिलकुल  उहाँ ताव नइखे नफ़रत केहे आन्ही मे प्रीत के अब बहाव नइखे खाये के रोटी होखे ना दारू के आभाव नइखे शहर जवन रास्ता जाला गाँव ओकर घुमाव नइखे $64 लागे जब झुलनी माई के चिंता चाव नइखे के कला गजब बाटे छुपावे लउकत बस उ घाव नइखे दिल से एगो बात बताई भीतर तनाव नइखे रउवा आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे कहीं दही सजाव नइखे मोह-माया भाव नइखे आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे हर जघे खाली स्टंट चले धोबी पछाड़  दाव नइखे मोछ राखता सभे बाकि बिलकुल  उहाँ ताव नइखे नफ़रत केहे आन्ही मे प्रीत के अब बहाव नइखे खाये के रोटी होखे ना दारू के आभाव नइखे शहर जवन रास्ता जाला गाँव ओकर घुमाव नइखे $64 लागे जब झुलनी माई के चिंता चाव नइखे के कला गजब बाटे छुपावे लउकत बस उ घाव नइखे दिल से एगो बात बताई भीतर तनाव नइखे रउवा आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - इरखा से मादा नर जाला टूट भीतर के राउर सबर जाला टूट दखल जब देबे तिसरइत तब अच्छा से अच्छा घर जाला टूट जिनगी मे जहिया लागे गरहन पहर दू पहर जिगर जाला टूट सबके कहाँ हक़ीक़त बा मालूम कबो कबो त बेखबर जाला टूट समय के बाट जे जोहि सही सोझा से बड़हन कहर जाला टूट हौसला अगर बाटे जिये के तब भीतर जाके जहर जाला टूट इरखा से मादा नर जाला टूट भीतर के राउर सबर जाला टूट दखल जब देबे तिसरइत तब अच्छा से अच्छा घर जाला टूट जिनगी मे जहिया लागे गरहन पहर दू पहर जिगर जाला टूट सबके कहाँ हक़ीक़त बा मालूम कबो कबो त बेखबर जाला टूट समय के बाट जे जोहि सही सोझा से बड़हन कहर जाला टूट हौसला अगर बाटे जिये के तब भीतर जाके जहर जाला टूट - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - "नेहिया के डोरी" काहे रउआ रहत बानी मनवा के मार के, दिन ई गुजार दीं रउआ हंसी-मुस्का के। एक दिन तड छोड़ देब मेला ईजिहान के, चल देब हमनी सभे सब कुछ लुटा के। चार दिन के जिनगी बा रहीं सबके मिला के, नेकी के रस्ता अपना के। বালা S सनेहिया के नाता रउआ सबसे जुड़ा के, दुश्मन केभी राखिं लीं गले से लगा के। रहीं नेह के डोरी में नेहिया मिला के, में डूबा मन के देहिया के प्रेम के। केहू भी ना साथ जाई एह संसार के, अकेले  ही जाए के बा जग के भुला के। काहें रउआ   करत बानी एतना गुमान के, माटी के देहिया के माटी में मिला के। "नेहिया के डोरी" काहे रउआ रहत बानी मनवा के मार के, दिन ई गुजार दीं रउआ हंसी-मुस्का के। एक दिन तड छोड़ देब मेला ईजिहान के, चल देब हमनी सभे सब कुछ लुटा के। चार दिन के जिनगी बा रहीं सबके मिला के, नेकी के रस्ता अपना के। বালা S सनेहिया के नाता रउआ सबसे जुड़ा के, दुश्मन केभी राखिं लीं गले से लगा के। रहीं नेह के डोरी में नेहिया मिला के, में डूबा मन के देहिया के प्रेम के। केहू भी ना साथ जाई एह संसार के, अकेले  ही जाए के बा जग के भुला के। काहें रउआ   करत बानी एतना गुमान के, माटी के देहिया के माटी में मिला के। - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - दिन दुखीयारी ढलत रहो कलम फुलत फलत रहो माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो साहित्य कबो रुकाव ना कुछुउ बड़हन बुझाव ना मन मस्तिष्क निरोग रहे संकट   एहीपर आव ना दिया तोहरा नाव के एगो তলন ফ্ক্ী दुवारी घर आ माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो कलम कबो झुक ना पावे साँच लिखे से चूक ना पावे ম হান ক মাড়ী दुनिया एह राह मे कवनो रुक ना पावे आ एकता से प्रेम स्नेह देश आपन सम्हलत रहो माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो दिन दुखीयारी ढलत रहो कलम फुलत फलत रहो माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो साहित्य कबो रुकाव ना कुछुउ बड़हन बुझाव ना मन मस्तिष्क निरोग रहे संकट   एहीपर आव ना दिया तोहरा नाव के एगो তলন ফ্ক্ী दुवारी घर आ माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो कलम कबो झुक ना पावे साँच लिखे से चूक ना पावे ম হান ক মাড়ী दुनिया एह राह मे कवनो रुक ना पावे आ एकता से प्रेम स्नेह देश आपन सम्हलत रहो माई तोहर कृपा हरदम हे सेवका पर चलत रहो - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - हे माँ! - तू मेरे कंठ में शब्द बनकर विराज--मेरी बुद्धि में विवेक बनकर उतर और मेरी कलम को ऐसा स्पर्श दे कि वह असत्य नही बल्कि सिर्फ़ सत्य लिखे! - सिद्ध  मेरे अहं को नही- मेरे भाव को कर मेरे नाम को मेरे कर्म को उज्ज्वल कर-- जो मैं लिखूँ वह किसी की पीड़ा न बढ़ाए बल्कि किसी टूटे हृदय को थाम ले!- हे माँ सरस्वती ! - मुझे यश दे, योग्यता दे--मुझे प्रशंसा दे, पात्रता दे और यदि तू योग्य समझे तो बस इतना कर दे माँ! "मुझे धन्य कर दे,मुझे धन्य कर दे! " हे माँ! - तू मेरे कंठ में शब्द बनकर विराज--मेरी बुद्धि में विवेक बनकर उतर और मेरी कलम को ऐसा स्पर्श दे कि वह असत्य नही बल्कि सिर्फ़ सत्य लिखे! - सिद्ध  मेरे अहं को नही- मेरे भाव को कर मेरे नाम को मेरे कर्म को उज्ज्वल कर-- जो मैं लिखूँ वह किसी की पीड़ा न बढ़ाए बल्कि किसी टूटे हृदय को थाम ले!- हे माँ सरस्वती ! - मुझे यश दे, योग्यता दे--मुझे प्रशंसा दे, पात्रता दे और यदि तू योग्य समझे तो बस इतना कर दे माँ! "मुझे धन्य कर दे,मुझे धन्य कर दे! " - ShareChat