Shyamnandan Kumar
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Shyamnandan Kumar
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जिन्दगी एक किताब है और मैं इसका लेखक हु।
#💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह
💔दर्द भरी  कहानियां - ೫೯ खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे माया से बनल रिश्ता दिल में जज्बात रहे उमर भर उनका साथ निभाव के कारर रहे %8` खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे ना जाने नजर केकर लागल कहीं कइसे जब अपने आप पर ना एतबार रहे दूरियां अइसन बढल हक हमार ना रहे केहु खास रहेउ दिल के बहुत पास रहे याद के काकही बिन मौसम तो बरसात रहे बूंद अखियां के पानी में मिले के तरसत रहे जज्बत  लिखे से पहीले हालत लिखत रहे केहु खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे ೫೯ खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे माया से बनल रिश्ता दिल में जज्बात रहे उमर भर उनका साथ निभाव के कारर रहे %8` खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे ना जाने नजर केकर लागल कहीं कइसे जब अपने आप पर ना एतबार रहे दूरियां अइसन बढल हक हमार ना रहे केहु खास रहेउ दिल के बहुत पास रहे याद के काकही बिन मौसम तो बरसात रहे बूंद अखियां के पानी में मिले के तरसत रहे जज्बत  लिखे से पहीले हालत लिखत रहे केहु खास रहे उ दिल के बहुत पास रहे - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - काहे भाई- भाई करत बानी, आपस में लड़ाई करत बानी। हिस्सा में पोखरा का मिलल, करत बानी। समुंदर के बुराई टूट गईल दिल , रहे दीं अब, काहे के तूरपाई करत बानी। दोसरा के चक्कर में पड़ के, आपस में खाई करत बानी। तनी मनी लालच के खातिर, आँगन के खुदाई करत बानी। डाह भरल बा मन में बाकिर, मुँह पर बड़ाई करत बानी। नूरैन कुछ ना जाई दुनिया से, झूठे पाई- पाई करत बानी। काहे भाई- भाई करत बानी, आपस में लड़ाई करत बानी। हिस्सा में पोखरा का मिलल, करत बानी। समुंदर के बुराई टूट गईल दिल , रहे दीं अब, काहे के तूरपाई करत बानी। दोसरा के चक्कर में पड़ के, आपस में खाई करत बानी। तनी मनी लालच के खातिर, आँगन के खुदाई करत बानी। डाह भरल बा मन में बाकिर, मुँह पर बड़ाई करत बानी। नूरैन कुछ ना जाई दुनिया से, झूठे पाई- पाई करत बानी। - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - प्रेम तड प्रेम हड कबों ओराई का ? अ जे बिछड़ गइल  ऊ फेर भेटाई का ? हम केहू के छोड़ल अधूरा मोहब्बत हई केहू ೯ಾT ಫ आपन बनाई का ? आंख से जेकरा लोर के दरिया बहल होखे ओकरा के अब ई दुनिया   रोवाई का ? जे टूट के छीटा गइल होखे शीशा नियन उ फेर केकरों से दिल आपन लगाई का ? श्यामनंदन नफ़रत के दौर मे मोहब्बत के तोहर दोकान चल पाई का प्रेम तड प्रेम हड कबों ओराई का ? अ जे बिछड़ गइल  ऊ फेर भेटाई का ? हम केहू के छोड़ल अधूरा मोहब्बत हई केहू ೯ಾT ಫ आपन बनाई का ? आंख से जेकरा लोर के दरिया बहल होखे ओकरा के अब ई दुनिया   रोवाई का ? जे टूट के छीटा गइल होखे शीशा नियन उ फेर केकरों से दिल आपन लगाई का ? श्यामनंदन नफ़रत के दौर मे मोहब्बत के तोहर दोकान चल पाई का - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - मुहब्बत के सजा हमके , बहुत गम्भीर देहलू तू॰ करेजा बसवनी तहके, करेजा चीर देहलू तू वफ़ा के नाम से हमके बहुत, अब डर बाटे लागत, दिन आ दुनियां, तहरे पीछे पीछे भागत, भुलईनी देहलू तू कईनी आजाद हम तहके, हमके जंजीर मुहब्बत के सज़ा हमके, बहुत गम्भीर देहलू तू बिखरल फूल बीने में, किफायत का भईल हमसे, भईल बड़ी भूल चीन्हें में , शिकायत का करी तहसे, चलड अब दिन कवनो गा, हमरियो कटिए नू जाई, देहलू तु मरल ज़मीर तहरो अब, फुटल तक़दीर मुहब्बत के सज़ा हमके, बहूत गंभीर देहलू तू 44 & करेजा में बसवनी तहके, करेजा चीर मुहब्बत के सजा हमके , बहुत गम्भीर देहलू तू॰ करेजा बसवनी तहके, करेजा चीर देहलू तू वफ़ा के नाम से हमके बहुत, अब डर बाटे लागत, दिन आ दुनियां, तहरे पीछे पीछे भागत, भुलईनी देहलू तू कईनी आजाद हम तहके, हमके जंजीर मुहब्बत के सज़ा हमके, बहुत गम्भीर देहलू तू बिखरल फूल बीने में, किफायत का भईल हमसे, भईल बड़ी भूल चीन्हें में , शिकायत का करी तहसे, चलड अब दिन कवनो गा, हमरियो कटिए नू जाई, देहलू तु मरल ज़मीर तहरो अब, फुटल तक़दीर मुहब्बत के सज़ा हमके, बहूत गंभीर देहलू तू 44 & करेजा में बसवनी तहके, करेजा चीर - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - अपने बन के आपन लोगवा ব্রুস্রাবলা दिल बाडा आपने होला ऊ सभे जे वक्त पर कामे ना आवेला देखे के ना चाहे आखीया सोझा रोज आवेला पर पिठ पिछे ऊ रोज गरीआवे पर सामने निमन बतावेला दुखे सुख मे आपन पराया वक्त सबके चिनावेला अपने बन के आपन लोगवा दुखावेला  িল নাভা 7777/ अपने बन के आपन लोगवा ব্রুস্রাবলা दिल बाडा आपने होला ऊ सभे जे वक्त पर कामे ना आवेला देखे के ना चाहे आखीया सोझा रोज आवेला पर पिठ पिछे ऊ रोज गरीआवे पर सामने निमन बतावेला दुखे सुख मे आपन पराया वक्त सबके चिनावेला अपने बन के आपन लोगवा दुखावेला  িল নাভা 7777/ - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - तोहार नयन के काजल, याद आवेला মন ম ও8ল ও কলবল,যান সানলা| बीत गईल जमाना परदेस में रहत, तोहरा साथे बितावल हर पल, याद आवेला। कइसे बताईं कि मन केतना व्याकुल बा, तोहार बोली जइसन गंगा के जल, याद आवेला। दुनिया के ई झमेला में मन जब हार जाला, तोहार आँचरा के शीतल आँचल याद आवेला। प्यार में जब ' आई लव यू' कहलू धीरे से, उ शरमाईल चेहरा सजल याद आवेला। तोहार नयन के काजल, याद आवेला মন ম ও8ল ও কলবল,যান সানলা| बीत गईल जमाना परदेस में रहत, तोहरा साथे बितावल हर पल, याद आवेला। कइसे बताईं कि मन केतना व्याकुल बा, तोहार बोली जइसन गंगा के जल, याद आवेला। दुनिया के ई झमेला में मन जब हार जाला, तोहार आँचरा के शीतल आँचल याद आवेला। प्यार में जब ' आई लव यू' कहलू धीरे से, उ शरमाईल चेहरा सजल याद आवेला। - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - #fd6R_f4H बड़ी मजबूरी में शहर में आइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम बहुत मन पडे़ बचपन के दिन मितवा नाचे अँखिया के आगे हर सीन मितवा सोना बेच के माटी लेहनी किन मितवा आदमी हो गइल बंधुआ मशीन मितवा रोज़ी रोटी में ईहवा अझुराइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम छूट गइल गाँव में ही सुन्दर सपनवा दूर भइल हमनी से खेत खलिहनवा डहकेला हमनी के खातिर अंगनवा हेरा गइलेन शहर में आके ललनवा कई हिस्सा में इहवाँ बँटाइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम #fd6R_f4H बड़ी मजबूरी में शहर में आइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम बहुत मन पडे़ बचपन के दिन मितवा नाचे अँखिया के आगे हर सीन मितवा सोना बेच के माटी लेहनी किन मितवा आदमी हो गइल बंधुआ मशीन मितवा रोज़ी रोटी में ईहवा अझुराइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम छूट गइल गाँव में ही सुन्दर सपनवा दूर भइल हमनी से खेत खलिहनवा डहकेला हमनी के खातिर अंगनवा हेरा गइलेन शहर में आके ललनवा कई हिस्सा में इहवाँ बँटाइल बानी हम कहाँ अपना बिहार के भुलाइल बानी हम - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां
📚कविता-कहानी संग्रह - ज़ब भी प्यार के बात होखे हमार हाथ तहरे हाथ होखे दिन कवनो शुरुआत होखे चाहे कइसन हालात होखे..... ! ! ज़ब भी दिल के बात होखे दूजा के साथ होखे एक ज़ब तक चलत सांस होखे घनघोर अंहरिया रात होखे.... ! ! बगिया में कतनो फूल होखे आपन बस एक वसूल होखे दिन भर में कतनो भूल होखे जिंदगी में कबो ना तूल होखे.... ! ! तन दिल्ली चाहे गुजरात होखे मन हरदम हरपल पास होखे ना कबो उदास होखे जिंदगी ऊपर वाला के बस हाथ होखे... ! ! ज़ब भी प्यार के बात होखे हमार हाथ तहरे हाथ होखे दिन कवनो शुरुआत होखे चाहे कइसन हालात होखे..... ! ! ज़ब भी दिल के बात होखे दूजा के साथ होखे एक ज़ब तक चलत सांस होखे घनघोर अंहरिया रात होखे.... ! ! बगिया में कतनो फूल होखे आपन बस एक वसूल होखे दिन भर में कतनो भूल होखे जिंदगी में कबो ना तूल होखे.... ! ! तन दिल्ली चाहे गुजरात होखे मन हरदम हरपल पास होखे ना कबो उदास होखे जिंदगी ऊपर वाला के बस हाथ होखे... ! ! - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - पर्व खातिर आदमी सपरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। गाँवे में नीक लागे कौनो त्योहार, परदेश में ई मन बुझाला लाचार। अखिया में घर-्दुआर गहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। याद आवे माई के हाथ के पकवान, परदेस के रोटी लागे बे-्जान। भीतरे भीतर जियरा हहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। जन्मधरती पर जब पड़ेला ई पाँव, लागे कि मिल गइल दुनिया के छाँव। चेहरा तब निखरेला खूब, मुरझाइल ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। परबे में झलके पलायन के पीर, बँधले बा पाँव में करज के जंजीर। मजबूरी में ई मन डहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। पर्व खातिर आदमी सपरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। गाँवे में नीक लागे कौनो त्योहार, परदेश में ई मन बुझाला लाचार। अखिया में घर-्दुआर गहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। याद आवे माई के हाथ के पकवान, परदेस के रोटी लागे बे-्जान। भीतरे भीतर जियरा हहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। जन्मधरती पर जब पड़ेला ई पाँव, लागे कि मिल गइल दुनिया के छाँव। चेहरा तब निखरेला खूब, मुरझाइल ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। परबे में झलके पलायन के पीर, बँधले बा पाँव में करज के जंजीर। मजबूरी में ई मन डहरेला खूब, ना मिले छुट्टी तड अखरेला खूब। - ShareChat