Shyamnandan Kumar
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@2042925815
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Shyamnandan Kumar
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जिन्दगी एक किताब है और मैं इसका लेखक हु।
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - गुस्सा सजी उतार ल राजा मौका बा मुँह फाड़ ल राजा अवसर हाथ से जाए ना दड, टटके बाजी मार ल राजा| थू-्थू हो ता होखे द५ तू ही-ही दाँत चियार ल राजा। ताकत आज देखावे के बा, गर्दा खूब कबार ल राजा। शोषण के अधिकार मिलल बा, नेबूआ जइसे गार ल राजा। पैर न पीछे सरकी तनिको , चाहैं जवन उखार ल राजा। 'सूर्य' अबे केहू देखल नाहीं, उठि के धूरा झार ल राजा। गुस्सा सजी उतार ल राजा मौका बा मुँह फाड़ ल राजा अवसर हाथ से जाए ना दड, टटके बाजी मार ल राजा| थू-्थू हो ता होखे द५ तू ही-ही दाँत चियार ल राजा। ताकत आज देखावे के बा, गर्दा खूब कबार ल राजा। शोषण के अधिकार मिलल बा, नेबूआ जइसे गार ल राजा। पैर न पीछे सरकी तनिको , चाहैं जवन उखार ल राजा। 'सूर्य' अबे केहू देखल नाहीं, उठि के धूरा झार ल राजा। - ShareChat
#✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍प्रेमचंद की कहानियां - में केकरा पास नइखे. दुनिया दुख एह बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. ज्यादा सोचेब त तिल ताड़ बन जाई. चार दिन के जिनगी पहाड़ बन जाई. ননা$ না के, केकरा तलाश नइखे. Rg9f बाकिर हर केहू रउआ खान उदास नइखे. सबर करेब त रात भी बिहान हो जाई. ক্ী তিমান কী তাৎ आ बेसब्री में ख़ुशी केकरा मन में अशांति के निवास नइखे. बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. मत चिंता से चेहरा के चमक बिगाड़ी. डगरे दी लाहे - लाहे जिनगी के गाड़ी. हँसे खातिर कवनो मास में खरमास नइखे. बाकिर हर केह रउआ खानि उदास नडखे. में केकरा पास नइखे. दुनिया दुख एह बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. ज्यादा सोचेब त तिल ताड़ बन जाई. चार दिन के जिनगी पहाड़ बन जाई. ননা$ না के, केकरा तलाश नइखे. Rg9f बाकिर हर केहू रउआ खान उदास नइखे. सबर करेब त रात भी बिहान हो जाई. ক্ী তিমান কী তাৎ आ बेसब्री में ख़ुशी केकरा मन में अशांति के निवास नइखे. बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. मत चिंता से चेहरा के चमक बिगाड़ी. डगरे दी लाहे - लाहे जिनगी के गाड़ी. हँसे खातिर कवनो मास में खरमास नइखे. बाकिर हर केह रउआ खानि उदास नडखे. - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - केहू झुठहूं के खुश बा  केहू झुठहूं के परेशान बा 4 खत्म होत बा जिनगी धिरे धिरे, भी सबके गुमान बा ।। कहीं दुई मिनिट के दरद बा, कहीं चार मिनिट के सम्मान बा | के नजरी में रखी के जियत बा | दूसरे इ कईसन पापी जहान बा ।। कबहुं बेइज्जती में सीना फुलान बा, कबहुं इज़्ज़त में भी अपमान बा जरुरी समान के साथे साथे सब बिकात बा हंसले आ बोलले खातिर भी सजल दुकान बा।। केहू झुठहूं के खुश बा  केहू झुठहूं के परेशान बा 4 खत्म होत बा जिनगी धिरे धिरे, भी सबके गुमान बा ।। कहीं दुई मिनिट के दरद बा, कहीं चार मिनिट के सम्मान बा | के नजरी में रखी के जियत बा | दूसरे इ कईसन पापी जहान बा ।। कबहुं बेइज्जती में सीना फुलान बा, कबहुं इज़्ज़त में भी अपमान बा जरुरी समान के साथे साथे सब बिकात बा हंसले आ बोलले खातिर भी सजल दुकान बा।। - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #26 jan
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - दिहलु 1 ना साथ हमार ,जब फसल रही मझधार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ बहुते रोअनि प्यार में तोहरा, कई बेर जोड़नि हाथ हो तोहरा बिना हम जी ना पाईब, बस तोहरे चाही साथ होे পইলু साथी हमरा प्यार में ना जाने कवन कमी निभईबु, जब लूट गइनी संसार में अब का हमार तू साथ दोस्ती के जन हाथ बढ़ाव&्ष आदत लगा के चल जईबु जईबु कवनों वार आई तोहपे, पल भर में बदल Jq हमके रहे भरोसा तोहपे, सपना टूटल हजार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ ना कॉल ना मैसेज करबु, ना कवो करबु बात हो दिल से कईसे निभईबु रिश्ता, हमरा नईखे बुझात हो दिल से प्यार दिमाग में नफरत, चलता तोहरा कपार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ श्यामनंदन दिहलु 1 ना साथ हमार ,जब फसल रही मझधार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ बहुते रोअनि प्यार में तोहरा, कई बेर जोड़नि हाथ हो तोहरा बिना हम जी ना पाईब, बस तोहरे चाही साथ होे পইলু साथी हमरा प्यार में ना जाने कवन कमी निभईबु, जब लूट गइनी संसार में अब का हमार तू साथ दोस्ती के जन हाथ बढ़ाव&्ष आदत लगा के चल जईबु जईबु कवनों वार आई तोहपे, पल भर में बदल Jq हमके रहे भरोसा तोहपे, सपना टूटल हजार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ ना कॉल ना मैसेज करबु, ना कवो करबु बात हो दिल से कईसे निभईबु रिश्ता, हमरा नईखे बुझात हो दिल से प्यार दिमाग में नफरत, चलता तोहरा कपार में निभईबु, जब लूट गईनी संसार में अब का हमार तू साथ श्यामनंदन - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। जीत के भी हार हो गइल, अँगना में दीवार हो गइल। आपन भाई दुश्मन बनल, आ ग़ैर रिश्तेदार हो गइल। भाई जबसे बोलल छोड़लस, लोग हज़ार हो गइल। सार-सरहज से नाता बढ़ल, माई-बाबुजी भार हो गइल घर-आँगन सब सूना भइल, फीका हर त्योहार हो गइल। जब अपने आपन ना रहल, जिनगी फेर दुश्वार हो गइल। नूरैन टूट गइल हर इक सपना, घर के रौनक बेकार हो गइल। - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - कहीं दही सजाव नइखे मोह-माया भाव नइखे आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे हर जघे खाली स्टंट चले धोबी पछाड़  दाव नइखे मोछ राखता सभे बाकि बिलकुल  उहाँ ताव नइखे नफ़रत केहे आन्ही मे प्रीत के अब बहाव नइखे खाये के रोटी होखे ना दारू के आभाव नइखे शहर जवन रास्ता जाला गाँव ओकर घुमाव नइखे $64 लागे जब झुलनी माई के चिंता चाव नइखे के कला गजब बाटे छुपावे लउकत बस उ घाव नइखे दिल से एगो बात बताई भीतर तनाव नइखे रउवा आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे कहीं दही सजाव नइखे मोह-माया भाव नइखे आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे हर जघे खाली स्टंट चले धोबी पछाड़  दाव नइखे मोछ राखता सभे बाकि बिलकुल  उहाँ ताव नइखे नफ़रत केहे आन्ही मे प्रीत के अब बहाव नइखे खाये के रोटी होखे ना दारू के आभाव नइखे शहर जवन रास्ता जाला गाँव ओकर घुमाव नइखे $64 लागे जब झुलनी माई के चिंता चाव नइखे के कला गजब बाटे छुपावे लउकत बस उ घाव नइखे दिल से एगो बात बताई भीतर तनाव नइखे रउवा आँख खोल के देखीं ना गँउवे मे अब गाँव नइखे - ShareChat