Shyamnandan Kumar
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Shyamnandan Kumar
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हम बोलतानी कविता सायर की जुबानी
#📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📚कविता-कहानी संग्रह - चोट खा-खा के जिनिगी ।। || चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल ऊ नाड जल्दी भरी घाव बड़हन भइलड, जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल केहूए  लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत না केहूए बा का गुजरत ना तनिको सोंचत रहनी जेकरा से दूर हम, उहे दाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास मरला से नीमन, रहलका उपास खाइके जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं "अजय" चुपचाप सहल, लरिकाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी ।। || चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल ऊ नाड जल्दी भरी घाव बड़हन भइलड, जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल केहूए  लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत না केहूए बा का गुजरत ना तनिको सोंचत रहनी जेकरा से दूर हम, उहे दाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास मरला से नीमन, रहलका उपास खाइके जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं "अजय" चुपचाप सहल, लरिकाही बनल चोट खा-खा के जिनिगी , ई घाही बनल - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अपने में अरे तरे होता पहिले वाला व्यवहार कहा बा परब तीज त फॉर्मेलिटी हो गईल बा पहिले वाला त्योहार कहा बा लोग इज्जा , पिज्जा , बर्गर में भुलाईल बा पहिले वाला आहार कहा बा जातिवाद चरम सीमा प बा पवनी पसारी वाला प्यार कहा बा गीत में खाली गारी गवाता पहिले वाला गीतकार कहा बा भुवन हो भाव के अभाव में जियता सभे पहिले वाला सुख से भरल संसार कहा बा अपने में अरे तरे होता पहिले वाला व्यवहार कहा बा परब तीज त फॉर्मेलिटी हो गईल बा पहिले वाला त्योहार कहा बा लोग इज्जा , पिज्जा , बर्गर में भुलाईल बा पहिले वाला आहार कहा बा जातिवाद चरम सीमा प बा पवनी पसारी वाला प्यार कहा बा गीत में खाली गारी गवाता पहिले वाला गीतकार कहा बा भुवन हो भाव के अभाव में जियता सभे पहिले वाला सुख से भरल संसार कहा बा - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - पहिले रहे तवन आजो बा। মননা ম অবিব্ধী না লাতী নাI ऊँच नीच भेदभाव लागल रही, बदलल कहाँ ई समाजो बा। बेटा चिल्लात हवे बापे पर, बड़ छोट के ना लेहाज़ो बा। आंखी ना फूटलो सुहानी हम, हमरे बीना अब अकाजो बा। जाति-पाति लागे ला धरम में, कोढ़ में भइल जइसे खाजो बा। কীভ বাল ম 'মুয' লাল না; अंधविश्वासी समाजो बा। पहिले रहे तवन आजो बा। মননা ম অবিব্ধী না লাতী নাI ऊँच नीच भेदभाव लागल रही, बदलल कहाँ ई समाजो बा। बेटा चिल्लात हवे बापे पर, बड़ छोट के ना लेहाज़ो बा। आंखी ना फूटलो सुहानी हम, हमरे बीना अब अकाजो बा। जाति-पाति लागे ला धरम में, कोढ़ में भइल जइसे खाजो बा। কীভ বাল ম 'মুয' লাল না; अंधविश्वासी समाजो बा। - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अब ढोता नहीं है देर तलक एहसान आदमी, रिश्तों में ढूँढता है बस नफ़ा ्नुक़सान आदमी। मुफ़लिसी के वो दिन, भूल जाता है जल्द अपनी दिखलाता है दौलत की अब झूठी 9TT आदमी | बुलंदियों की आख़िरी पायदान पे पहुँच के भी॰ हमने देखा है अकसर रहता है परेशान आदमी| झूठ , फ़रेब , मक्कारी के आग़ोश में पड़कर, হীড়  ही लहूलुहान आदमी। सच को करता है लाखों की भीड में भी , रहता है कितना तन्हा, ख़ुद से ही हो रहा है अनजान आदमी। সাত की ख़ातिर नूरैन, क़समें खाकर, झूठी বমুলী बेच देता है अपनी ग़ैरत ओ ईमान आदमी| अब ढोता नहीं है देर तलक एहसान आदमी, रिश्तों में ढूँढता है बस नफ़ा ्नुक़सान आदमी। मुफ़लिसी के वो दिन, भूल जाता है जल्द अपनी दिखलाता है दौलत की अब झूठी 9TT आदमी | बुलंदियों की आख़िरी पायदान पे पहुँच के भी॰ हमने देखा है अकसर रहता है परेशान आदमी| झूठ , फ़रेब , मक्कारी के आग़ोश में पड़कर, হীড়  ही लहूलुहान आदमी। सच को करता है लाखों की भीड में भी , रहता है कितना तन्हा, ख़ुद से ही हो रहा है अनजान आदमी। সাত की ख़ातिर नूरैन, क़समें खाकर, झूठी বমুলী बेच देता है अपनी ग़ैरत ओ ईमान आदमी| - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - बतिया केहू के खल जाला হ২স্রা মন ম কল जाला शक रहेला दुश्मन पर जी आपन ही केहू छल जाला केहू जोर लगावे बाकिर केहू के गल जाला aal होखे जहिया নযা ৭ং খন घमंड आपरूपी पल जाला पावे के जब लकम बा धरत खोवे के आदत टल जाला केहू मेहनत से भाग बदलेला ೫೯ बपौति से हाथ মল তালা के चिंता करते करते बुढ़वती जवानी के सुरूज ढल जाला से हाथ पसारी दुनिया एह आदमी एकदिन चल जाला बतिया केहू के खल जाला হ২স্রা মন ম কল जाला शक रहेला दुश्मन पर जी आपन ही केहू छल जाला केहू जोर लगावे बाकिर केहू के गल जाला aal होखे जहिया নযা ৭ং খন घमंड आपरूपी पल जाला पावे के जब लकम बा धरत खोवे के आदत टल जाला केहू मेहनत से भाग बदलेला ೫೯ बपौति से हाथ মল তালা के चिंता करते करते बुढ़वती जवानी के सुरूज ढल जाला से हाथ पसारी दुनिया एह आदमी एकदिन चल जाला - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - जब आपने आपन ना होई तब दोसर आपन का होई जब दोसरो आपन बनि जाई तब अपने आपन ना होई | जब आपने आपन ना होई तब दोसर आपन का होई जब दोसरो आपन बनि जाई तब अपने आपन ना होई | - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📚कविता-कहानी संग्रह - कबों दुःख कबों सुख में कटडता ज़िंदगी बेगाना ज़िन्दगी मे आपन बटडता लोग खुश  हो के बर्थडे पर केक काटडता तन्का तन्का  कर के रोज़ घटडता ज़िंदगी केहू नइखे जेकरा चेहरा पर मुस्कान होखे मोही केजस   सबका के मठडता ज़िन्दगी তন ল নানী নীতনান ন নংনন্ধী ব্ংলী ढलत सूरज के साथ अपनो ढलड़ता जिंदगी ना मिलेला कबों माफ़ी एकरा अदालत में बड़ा गौर से सब ग़लती के लखडता जिंदगी सर से लेके पांव तक जकड़ के रख देला बा  नादान जे आसान समझड्ता ज़िन्दगी कबों दुःख कबों सुख में कटडता ज़िंदगी बेगाना ज़िन्दगी मे आपन बटडता लोग खुश  हो के बर्थडे पर केक काटडता तन्का तन्का  कर के रोज़ घटडता ज़िंदगी केहू नइखे जेकरा चेहरा पर मुस्कान होखे मोही केजस   सबका के मठडता ज़िन्दगी তন ল নানী নীতনান ন নংনন্ধী ব্ংলী ढलत सूरज के साथ अपनो ढलड़ता जिंदगी ना मिलेला कबों माफ़ी एकरा अदालत में बड़ा गौर से सब ग़लती के लखडता जिंदगी सर से लेके पांव तक जकड़ के रख देला बा  नादान जे आसान समझड्ता ज़िन्दगी - ShareChat
#💔दर्द भरी कहानियां #👩‍🌾खान सर मोटिवेशन💡 #🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #💞Heart touching शायरी✍️ #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍
💔दर्द भरी  कहानियां - बस तुझे याद दिलाते है चले आते है हम तेरे शह्र में जाते है चले आते है क्योंकि वादा था तेरा साथ नहीं छोड़ेगे अपने वादे को निभाते है चले आते है लिए मिलने के हा वहीं तू जहाँ आता था अब वहाँ अश्क़ बहाते है चले आते है ये भी मालूम है मिलने नहीं आएगा तू फिर भी आवाज़़ लगाते है चले आते है वो तेरे साथ हुए लम्हें आरिज़ TR याद करते है भुलाते है चले आते है बस तुझे याद दिलाते है चले आते है हम तेरे शह्र में जाते है चले आते है क्योंकि वादा था तेरा साथ नहीं छोड़ेगे अपने वादे को निभाते है चले आते है लिए मिलने के हा वहीं तू जहाँ आता था अब वहाँ अश्क़ बहाते है चले आते है ये भी मालूम है मिलने नहीं आएगा तू फिर भी आवाज़़ लगाते है चले आते है वो तेरे साथ हुए लम्हें आरिज़ TR याद करते है भुलाते है चले आते है - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - मिल के बिछुड़ल तड किस्मत के बात होखेला दिल मे केहूके बस पावल दुआ के बात होखेला मिल के बिछुड़ल तड........ 3 केहु मुकर गइल तड मुकद्दर के बात होखेला चाहत में ना पावल किस्मत के बात होखेला मिल के बिछुड़ल तड .3 चाँदनी रात मे चान ना आइल मलाल के बात होखेला মনম ব মনাবল নs পীড়া ক নান ক্ীষ্রলা নিত্ত্ভল মিল ক तड........3 जुगनुअन के पहरा तड चारू ओर होखेला ठंड़ा रात में सनम के आइल किस्मत के बात होखेला बिछुड़ल मिल के तड........3 मिल के बिछुड़ल तड किस्मत के बात होखेला दिल मे केहूके बस पावल दुआ के बात होखेला मिल के बिछुड़ल तड........ 3 केहु मुकर गइल तड मुकद्दर के बात होखेला चाहत में ना पावल किस्मत के बात होखेला मिल के बिछुड़ल तड .3 चाँदनी रात मे चान ना आइल मलाल के बात होखेला মনম ব মনাবল নs পীড়া ক নান ক্ীষ্রলা নিত্ত্ভল মিল ক तड........3 जुगनुअन के पहरा तड चारू ओर होखेला ठंड़ा रात में सनम के आइल किस्मत के बात होखेला बिछुड़ल मिल के तड........3 - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - हीरा मोती ना चानी चले নামী সীনা ক পানী বল देखीं आज गली-गली मे टेंशन  के  प्रधानी 4 I6 -516 3${ পভল नफरत   के आन्ही चले हाथ मे आ'सेर खर्ची लेके बड़का-बड़का दानी चले केतना सहीं घाव 379( पीठ-पीछे रोज बानी चले कहल   जाव जुग के ক্া बड़ा   उतानी चले समय साँचो अपना बस मे कहाँ जब बाउर हवा पानी चले बताईं ना रउवा देख रेख मे राउर   जनानी चले केतना देखीं ना अन्हरन मे अब 4 3177- 3177 ஈி  # $ 3 ஈ सीना  तानी चले সসানসী हीरा मोती ना चानी चले নামী সীনা ক পানী বল देखीं आज गली-गली मे टेंशन  के  प्रधानी 4 I6 -516 3${ পভল नफरत   के आन्ही चले हाथ मे आ'सेर खर्ची लेके बड़का-बड़का दानी चले केतना सहीं घाव 379( पीठ-पीछे रोज बानी चले कहल   जाव जुग के ক্া बड़ा   उतानी चले समय साँचो अपना बस मे कहाँ जब बाउर हवा पानी चले बताईं ना रउवा देख रेख मे राउर   जनानी चले केतना देखीं ना अन्हरन मे अब 4 3177- 3177 ஈி  # $ 3 ஈ सीना  तानी चले সসানসী - ShareChat