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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - पइसा से चलत बा सब रिश्तेदारी, पइसे हड बाप , पइसे महतारी| पइसा अगर नइखे तड केहू ना पूछी, पइसा से बढ़ेला शुभचिंतक के सूची | लोग पइसे से आपन, पइसे से बेगाना, पइसे से चलत बाटे ई सारा जमाना। धरम-करम सब ह पइसा के दासी , पइसा ह काशी पइसा ह काबा लोग सभे पइसे के दुवारी, झुकेला पइसे हड बाप , पइसे महतारी।| ई पइसे करावेला झगड़ा लडाई, पइसे से दुश्मन बनेला भाई-भाई। खून के रिश्ता भी पानी हो जाला, पइसा जब बीच में कहानी हो जाला। पइसे से कुटिया बन जाला किला, गजबे बा भइया ई पइसा के लीला। नेहन्नाता सब पर पइसा बा भारी, पइसे हड बाप , पइसे महतारी। | पइसा से चलत बा सब रिश्तेदारी, पइसे हड बाप , पइसे महतारी| पइसा अगर नइखे तड केहू ना पूछी, पइसा से बढ़ेला शुभचिंतक के सूची | लोग पइसे से आपन, पइसे से बेगाना, पइसे से चलत बाटे ई सारा जमाना। धरम-करम सब ह पइसा के दासी , पइसा ह काशी पइसा ह काबा लोग सभे पइसे के दुवारी, झुकेला पइसे हड बाप , पइसे महतारी।| ई पइसे करावेला झगड़ा लडाई, पइसे से दुश्मन बनेला भाई-भाई। खून के रिश्ता भी पानी हो जाला, पइसा जब बीच में कहानी हो जाला। पइसे से कुटिया बन जाला किला, गजबे बा भइया ई पइसा के लीला। नेहन्नाता सब पर पइसा बा भारी, पइसे हड बाप , पइसे महतारी। | - ShareChat