Shyamnandan Kumar
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@2042925815
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Shyamnandan Kumar
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जिन्दगी एक किताब है और मैं इसका लेखक हु।
#💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘
💔दर्द भरी  कहानियां - नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी मिलीं जेक़रा से बाटे, ऊ परेशान भाई जी ई दुख-्मुसीबत ना घर से ओराले तनी-्तनी बतिया पे अँखियाँ लोराले चिंता धइले बा साझों बिहान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी हर समय संगे कहाँ चले ला लोगवा हवा के रुख देखीं , बदले ला लोगवा राखीं अपने से आपन ध्यान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी माटी के देहिया ह, मटिए में जाईं जब आई बुलावा त सब छूट जाईं उड़ जाईं पिंजरवे से परान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी मिलीं जेक़रा से बाटे, ऊ परेशान भाई जी ई दुख-्मुसीबत ना घर से ओराले तनी-्तनी बतिया पे अँखियाँ लोराले चिंता धइले बा साझों बिहान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी हर समय संगे कहाँ चले ला लोगवा हवा के रुख देखीं , बदले ला लोगवा राखीं अपने से आपन ध्यान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी माटी के देहिया ह, मटिए में जाईं जब आई बुलावा त सब छूट जाईं उड़ जाईं पिंजरवे से परान भाई जी नईखे जिनगी के रहियाँ आसान भाई जी - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💔दर्द भरी कहानियां
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - लागे जइसे भार होे गइल जिंदगी हमार हो गइल तिरछा तिरछी आँख जे मिलल सोझा सोझी प्यार हो गइल उघार भइल करमकांड अब आस्था उलार हा गइल जवरे कान्हवा बात साथ बा ২নিমা নাং নাং ক্ী মহল पुरवा गजबे याद के उठल घाव सब जितार हो गइल पहिले हमर मन रहे हमार अचके में तोहार हो गइल लागे जइसे भार होे गइल जिंदगी हमार हो गइल तिरछा तिरछी आँख जे मिलल सोझा सोझी प्यार हो गइल उघार भइल करमकांड अब आस्था उलार हा गइल जवरे कान्हवा बात साथ बा ২নিমা নাং নাং ক্ী মহল पुरवा गजबे याद के उठल घाव सब जितार हो गइल पहिले हमर मन रहे हमार अचके में तोहार हो गइल - ShareChat
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💔दर्द भरी  कहानियां - मोजर आम पे धरत बा खेत में मटर फ़रत बा गाँव, बहुते मन परत बा কথা বমলী বলন নিমা ঐ্কি ম মিধ কলন নিমা कोयल कुकु बोलत बिया पता पुरनका झरत बा नवका ओधी धरत बा गाँव, बहुते मन परत बा सरसो खूब फुलाइल बा देख के मन हर्षाइल बा होली भी नियराइल बा फ़ॉर्म छुट्टी के भरत बा, टिकट सभे अब करत बा, गाँव, 457 मन परत बा मोजर आम पे धरत बा खेत में मटर फ़रत बा गाँव, बहुते मन परत बा কথা বমলী বলন নিমা ঐ্কি ম মিধ কলন নিমা कोयल कुकु बोलत बिया पता पुरनका झरत बा नवका ओधी धरत बा गाँव, बहुते मन परत बा सरसो खूब फुलाइल बा देख के मन हर्षाइल बा होली भी नियराइल बा फ़ॉर्म छुट्टी के भरत बा, टिकट सभे अब करत बा, गाँव, 457 मन परत बा - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - गुस्सा सजी उतार ल राजा मौका बा मुँह फाड़ ल राजा अवसर हाथ से जाए ना दड, टटके बाजी मार ल राजा| थू-्थू हो ता होखे द५ तू ही-ही दाँत चियार ल राजा। ताकत आज देखावे के बा, गर्दा खूब कबार ल राजा। शोषण के अधिकार मिलल बा, नेबूआ जइसे गार ल राजा। पैर न पीछे सरकी तनिको , चाहैं जवन उखार ल राजा। 'सूर्य' अबे केहू देखल नाहीं, उठि के धूरा झार ल राजा। गुस्सा सजी उतार ल राजा मौका बा मुँह फाड़ ल राजा अवसर हाथ से जाए ना दड, टटके बाजी मार ल राजा| थू-्थू हो ता होखे द५ तू ही-ही दाँत चियार ल राजा। ताकत आज देखावे के बा, गर्दा खूब कबार ल राजा। शोषण के अधिकार मिलल बा, नेबूआ जइसे गार ल राजा। पैर न पीछे सरकी तनिको , चाहैं जवन उखार ल राजा। 'सूर्य' अबे केहू देखल नाहीं, उठि के धूरा झार ल राजा। - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - में केकरा पास नइखे. दुनिया दुख एह बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. ज्यादा सोचेब त तिल ताड़ बन जाई. चार दिन के जिनगी पहाड़ बन जाई. ননা$ না के, केकरा तलाश नइखे. Rg9f बाकिर हर केहू रउआ खान उदास नइखे. सबर करेब त रात भी बिहान हो जाई. ক্ী তিমান কী তাৎ आ बेसब्री में ख़ुशी केकरा मन में अशांति के निवास नइखे. बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. मत चिंता से चेहरा के चमक बिगाड़ी. डगरे दी लाहे - लाहे जिनगी के गाड़ी. हँसे खातिर कवनो मास में खरमास नइखे. बाकिर हर केह रउआ खानि उदास नडखे. में केकरा पास नइखे. दुनिया दुख एह बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. ज्यादा सोचेब त तिल ताड़ बन जाई. चार दिन के जिनगी पहाड़ बन जाई. ননা$ না के, केकरा तलाश नइखे. Rg9f बाकिर हर केहू रउआ खान उदास नइखे. सबर करेब त रात भी बिहान हो जाई. ক্ী তিমান কী তাৎ आ बेसब्री में ख़ुशी केकरा मन में अशांति के निवास नइखे. बाकिर हर केहू रउआ खानि उदास नइखे. मत चिंता से चेहरा के चमक बिगाड़ी. डगरे दी लाहे - लाहे जिनगी के गाड़ी. हँसे खातिर कवनो मास में खरमास नइखे. बाकिर हर केह रउआ खानि उदास नडखे. - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - केहू झुठहूं के खुश बा  केहू झुठहूं के परेशान बा 4 खत्म होत बा जिनगी धिरे धिरे, भी सबके गुमान बा ।। कहीं दुई मिनिट के दरद बा, कहीं चार मिनिट के सम्मान बा | के नजरी में रखी के जियत बा | दूसरे इ कईसन पापी जहान बा ।। कबहुं बेइज्जती में सीना फुलान बा, कबहुं इज़्ज़त में भी अपमान बा जरुरी समान के साथे साथे सब बिकात बा हंसले आ बोलले खातिर भी सजल दुकान बा।। केहू झुठहूं के खुश बा  केहू झुठहूं के परेशान बा 4 खत्म होत बा जिनगी धिरे धिरे, भी सबके गुमान बा ।। कहीं दुई मिनिट के दरद बा, कहीं चार मिनिट के सम्मान बा | के नजरी में रखी के जियत बा | दूसरे इ कईसन पापी जहान बा ।। कबहुं बेइज्जती में सीना फुलान बा, कबहुं इज़्ज़त में भी अपमान बा जरुरी समान के साथे साथे सब बिकात बा हंसले आ बोलले खातिर भी सजल दुकान बा।। - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले साथ तोहरा चलीं कहाँ तकले अपनहीं के छली कहाँ तकले मन के बाती जरा चुकल बानी रोज तिल-तिल गलीं कहाँ तकले बदल गइल बा सोच के साँचा ओह में हम ढलीं कहाँ तकले आग लागल बा एह जमाना के हमहूँ आखिर जलीं कहाँ तकले सह ना पावस ऊ कबो हमरा के उनका नजरी खलीं कहाँ तकले बात कहला बिना रहाला ना बंद मुँह हम क लीं कहाँ तकले - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया बड़ी उम्मीद रहे आदमी होई आपन एहू खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया देस खातिर हहा के जे गरदन दीहल নিল্কল ओकरो इयाद के भुला गइलि दुनिया 'मुफलिस' विचार ना कबो چ बुराई 260 समझि उनको के बेगाना बना गइलि दुनिया | - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. धीरे धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन. बर्फ़ नियन नेकी पिघल जाला एक दिन. जेक़रा पर रहेला अपनो से बेसी भरोसा, ऊहे निर्मोही बन के छल जाला एक दिन. अपने ही लोगवा से टूट जाला आस, घर के दीया से घर जल जाला एक दिन. भूल जाला लोग सब दिनवा पुरानका, बनके रेंगनी के काँट हल जाला एक दिन. बिछड़ के कहाँ क़ेहु मिले ला दोबारा, रो रो विरह मे देहिया गल जाला एक दिन. - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #26 jan
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। आन जरूरी बा, देश के शान जरूरी बा, संस्कृति, पहचान जरूरी बा। সাণন সংযনা, माथा पर तिलक होखे, चाहे सर पर टोपी, दिल में सबसे पहिले हिंदुस्तान जरूरी बा। जे लुटा दिहल देशवा के खातिर परानवा, ओ सब वीर शहीदन के सम्मान जरूरी बा। देश आपन बनल बा गाँव, खेत, खलिहान से, देश के खातिर समृद्ध किसान जरूरी बा। देश आपन बने फेर से सोने के चिरइया, अमीर, ग़रीब सबकर योगदान जरूरी बा। जात-पात, ऊँच ्नीच के भेद मिटे ' नूरैन', एकरा खातिर आपन संविधान जरूरी बा। - ShareChat