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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - सम्मान से बढ के कवनो पद ना होला, एड़ी अलगईला से ऊँचा क़द ना होला। सूख जाला जब केहू के नज़री के पानी, त फेर ओकरा गिरे के कवनो हद ना होला। केहू न केहू त जड़ में देहले होई पानी, एके दिन में कवनो पेड़ बरगद ना होला। देश के खातिर लागे चाहे केतनो भी चोट, साँच कहत बानी, तनिको दरद ना होला। जे मुसिबत में छोड़़ देला अपनन के साथ, लाख धनी होखे, ऊ असली मरद ना होला। "नूरैन" दिल से माँगल कवनो भी दुआ, अनुभव हमार कहे,  कबो रद ना होला। सम्मान से बढ के कवनो पद ना होला, एड़ी अलगईला से ऊँचा क़द ना होला। सूख जाला जब केहू के नज़री के पानी, त फेर ओकरा गिरे के कवनो हद ना होला। केहू न केहू त जड़ में देहले होई पानी, एके दिन में कवनो पेड़ बरगद ना होला। देश के खातिर लागे चाहे केतनो भी चोट, साँच कहत बानी, तनिको दरद ना होला। जे मुसिबत में छोड़़ देला अपनन के साथ, लाख धनी होखे, ऊ असली मरद ना होला। "नूरैन" दिल से माँगल कवनो भी दुआ, अनुभव हमार कहे,  कबो रद ना होला। - ShareChat