यह कहानी बिल्कुल 3 Idiots फिल्म के उस यादगार सीन जैसी लगती है—जहाँ सबकी सांसें थम जाती हैं, बिजली चली जाती है, हालात मुश्किल हो जाते हैं…लेकिन फिर भी सब मिलकर एक बच्चे को दुनिया में लाने की कोशिश करते हैं।
बस फर्क इतना है कि इस बार सीन फिल्म का नहीं, हकीकत का था—और इसका हीरो कोई अभिनेता नहीं, एक आम इंसान था।
मुंबई के गोरेगांव लोकल स्टेशन पर रात 12:40 बजे एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। भीड़ घबरा गई, माहौल अफरा-तफरी का था, लेकिन तभी एक युवक विकास बेंद्रे आगे आया। न मेडिकल डिग्री, न अनुभव—सिर्फ हिम्मत,र किसी को बचाने का जज्बा।
विकास ने तुरंत डॉक्टर देविका देशमुख को वीडियो कॉल लगाया और उनके हर निर्देश को ध्यान से सुनकर महिला की डिलीवरी करवाई। डॉक्टर फोन पर एक-एक कदम बताते गए और विकास ने बिना पैनिक हुए पूरी स्थिति अपने हाथों में ले ली।
कुछ ही मिनटों में बच्चे की पहली रोने की आवाज़ प्लेटफॉर्म पर गूंज उठी।
मां और बच्चा दोनों सुरक्षित थे।
यह नज़ारा देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे। आधी रात के सुनसान स्टेशन पर, एक अनजान महिला की जान बचाना—यह किसी भी फिल्मी हीरो से कम नहीं।
जब यह कहानी सोशल मीडिया पर आई, तो लाखों लोगों ने विकास को असली हीरो बताया, और हर जगह बस एक ही लाइन दोहराई गई—
“डिग्री नहीं…ंसान को बड़ा बनाती है।”
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