●● गीता-भारती: अध्याय १८ छंद २ ●●
[ भगवद गीता १८ अध्याय का काव्यात्मक रूपांतरण हिंदी मुक्तक द्वारा मेरे रचित ग्रंथ गीता-भारती का कार्य अंतिम चरण मे ७८६ छंद के संकल्प के साथ आज तक ७०२ छंद पूर्ण ]
सात्विक, राजसिक, तामसिक, तीन है गुण आधार।
लेकिन सात्विक गुण सर्वश्रेष्ठ है, यहीं सत्यमेव प्रकार।
ज्ञान, कर्म, कर्ता, धृति और सुख का विभाजन है स्पष्ट,
जिसने इस सत्य को समझ लिया, उसका बेड़ा पार।।।
परिश्रम करो कठोर, करो निष्काम कर्म।
फल की चिंता न करो, कर्म है मानव धर्म।
कर्म करो बस कर्म करो।
पंडित मुस्तफ़ा आरिफ
आध्यात्मिक रचनाकार मुंबई
आत्मिक निवास उज्जैन
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