"अल्लाह क़ुरआन में फ़रमाता है कि बनी इसराईल के पास एक मुक़द्दस संदूक़ था,
जिसे ताबूत-ए-सकीना कहा जाता था।
इस ताबूत में “सकीना” थी —
यानी अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल होने वाली तसल्ली, सुकून और रहमत।
जब बनी इसराईल डर, बेचैनी या जंग की हालत में होते,
तो यह ताबूत उनके दिलों में हौसला, इत्मिनान और यक़ीन पैदा करता।
इस ताबूत के अंदर
हज़रत मूसा और हज़रत हारून अलैहिमुस्सलाम की मुक़द्दस निशानियाँ मौजूद थीं,
जो उन्हें अल्लाह की मदद की याद दिलाती थीं।
अल्लाह ने इसे एक बड़ी निशानी बनाया,
और फ़रिश्ते इस ताबूत को उठाकर लाते थे,
ताकि बनी इसराईल जान लें कि यह अल्लाह की तरफ़ से है। यह ताबूत अल्लाह की मदद, रहमत और दिलों के इत्मिनान की अज़ीम निशानी था।
"यह किस्सा क़ुरआन-ए-मजीद मे, सूरह अल-बक़रह में मौजूद है।
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