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वर्तमान समय में गौ माता (गाय) के संरक्षण, संवर्धन और उनसे प्राप्त उत्पादों (गोबर-गौमूत्र) के उपयोग पर जोर इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि यह न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि जैविक खेती, स्वास्थ्य सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक वैज्ञानिक और टिकाऊ विकल्प है।
Gaushala seva
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यह भविष्य के 'स्वर्ण युग' (स्वस्थ और समृद्ध समाज) के लिए क्यों आवश्यक है, इसके प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं:
स्वास्थ्य के लिए लाभकारी (गौ-चिकित्सा): गौमूत्र और गोबर में ऐसे तत्व होते हैं जो चर्म रोगों, वात, पित्त और कफ जैसे कई रोगों के उपचार में सहायक माने जाते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए भी गौ-उत्पादों का उपयोग अनुसंधानों का विषय है।
जैविक खेती का आधार (कृषि): रासायनिक खादों के कारण जमीन बंजर हो रही है। गौ-गोबर और गौमूत्र से निर्मित खाद व कीटनाशक (जैसे- जीवामृत) भूमि की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाते हैं, जो भविष्य में शुद्ध और पौष्टिक भोजन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
आर्थिक और आत्मनिर्भरता (स्वर्ण युग की नींव): गाय केवल दूध ही नहीं, बल्कि गोबर से बायोगैस, वर्मीकम्पोस्ट और गौमूत्र से दवाएं बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती है, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक है।
पारिस्थितिक संतुलन: गाय पर्यावरण को शुद्ध करने और कृषि का सहारा देकर एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाने में मदद करती है।
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