कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं।
सतगुरू पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।
कबीर परमात्मा हर युग में आते हैं
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18
कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी
प्राप्त करता है अर्थात् उसे कवि कहने लग जाते हैं।
सत्ययुग में पूर्ण प्रभु कबीर जी (कविर्देव) सतयुकृत नाम से स्वयं प्रकट हुए थे। उस समय गरुड़ जी, श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी आदि को सतज्ञान समझाया था।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
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