वो लड़का अब किसी से कुछ नहीं कहता। जैसे उसके भीतर शब्दों का एक पूरा शहर था, जो एक दिन अचानक उजड़ गया हो। अब उसकी खामोशी में कोई शोर नहीं बचा, कोई शिकायत नहीं, कोई आग्रह नहीं, बस एक गहरी, स्थिर झील-सी निस्तब्धता है, जिसमें कभी-कभी यादों के कंकड़ गिरते हैं और लहरें उठती भी हैं, पर वो उन्हें भी बिना हलचल के अपने भीतर समेट लेता है।
पहले वो बहुत कहता था, छोटी-छोटी बातों में अपनी पूरी दुनिया उकेर देता था, जैसे हर वाक्य उसके दिल का एक टुकड़ा हो। लेकिन अब..अब उसके शब्द जैसे थक गए हैं, या शायद उसने समझ लिया है कि हर भावना को आवाज़ देना ज़रूरी नहीं होता। कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जो जितना कहे जाएं, उतना ही अपने अर्थ खो देते हैं और वो अब अपने एहसासों को खोना नहीं चाहता।
उसकी आँखों में अब भी कहानियाँ हैं, पर वो जानता है कि उन्हें पढ़ने का हुनर हर किसी में नहीं रहा। वो अब मुस्कुराता है, पर वो मुस्कान पहले जैसी बेफिक्र नहीं होती। उसमें एक सधी हुई दूरी है, एक अजीब-सी परिपक्वता, जैसे उसने अपने ही भीतर एक लंबा सफर तय कर लिया हो। अब वो किसी को रोकता नहीं, किसी से उम्मीद नहीं रखता, किसी के लौटने का इंतज़ार नहीं करता, क्योंकि उसने जाना है कि जो सच में अपना होता है, वो बिना कहे भी साथ रहता है और जो चला जाता है, उसे रोकने के लिए शब्द भी कम पड़ जाते हैं।
वो लड़का अब भीतर से शांत हो चुका है, लेकिन ये शांति कोई सुकून नहीं, ये एक स्वीकार है हर उस दर्द का, हर अधूरेपन का, हर टूटे हुए विश्वास का, जिसे उसने बिना आवाज़ किए अपने भीतर जगह दी है। उसने अब सीख लिया है कि हर सवाल का जवाब ज़रूरी नहीं होता, और हर रिश्ते का अंत समझना भी ज़रूरी नहीं, कुछ बातें बस यूं ही अधूरी रह जाती हैं, और वही अधूरापन इंसान को पूरा बना देता है।
अब वो रातों को जागता तो है, पर बेचैनी में नहीं, बस अपने ख्यालों के साथ, जैसे कोई पुराना दोस्त हो, जिससे बातें करने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती। वो अपने ही भीतर बैठकर खुद को सुनता है…समझता है…और हर दिन थोड़ा-थोड़ा खुद को माफ़ भी करता है।
वो अब किसी से कुछ नहीं कहता क्योंकि उसने जाना है कि हर किसी के पास सुनने का वक्त नहीं होता, और हर कोई समझने की कोशिश भी नहीं करता। इसलिए उसने अपनी बातों को अपने भीतर ही एक सुरक्षित जगह दे दी है, जहाँ कोई उन्हें तोड़ नहीं सकता, कोई उन्हें गलत नहीं समझ सकता।
और सच कहूँ, उसकी ये खामोशी अब बोझ नहीं लगती, बल्कि एक अजीब-सी गरिमा लिए हुए है, जैसे कोई टूटा हुआ इंसान नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान हो जो टूटकर भी बिखरा नहीं,बल्कि खुद को समेटकर एक नई शक्ल में ढाल चुका है।
वो लड़का अब शांत है, पर उसकी ये शांति, उसकी हार नहीं…ये उसके भीतर की सबसे गहरी जीत है।
#👫ਮੈਂ ਤੇ ਓਹ #🧾 ਟੈਕਸਟ ਸ਼ਾਇਰੀ #📗ਸ਼ਾਇਰੀ ਅਤੇ ਕੋਟਸ 🧾 #📃ਲਾਈਫ ਕੋਟਸ✒️ #📄 ਜੀਵਨ ਬਾਣੀ