#SacrificedAll_LostMoksha
♦️काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नहीं ढंग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है, करो साथ सत्संग रे ।। मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है:
God KabirJi Nirvan Diwas
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇