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shubhamchechi56
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shubhamchechi56
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भागवत 1.1.1 जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञ: स्वराट् तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत्सूरय: । तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि।। #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 मैं उस परम सत्य (श्री कृष्ण/वासुदेव) का ध्यान करता हूँ, जो सृष्टि, पालन और संहार के मूल कारण हैं, जो सर्वज्ञ हैं और स्वयं प्रकाशमान हैं। वे ही परम ब्रह्म हैं, जिन्होंने ब्रह्माजी के हृदय में वैदिक ज्ञान प्रकट किया और जो भौतिक माया से हमेशा मुक्त हैं।
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3 मार्च को 3: 20 से 6ः67 तक चंद्र ग्रहण है । ग्रहण के समय सोना , खाना, पीना, मूत्र त्याग या मल त्याग करना वर्जित है। ये सब नुकसानदायक है। और हरिनाम जप अत्यधिक लाभदायक है। Grahan #chandra grahan #chandra grahan ke bare mein #chandra grahan #grahan
shubhamchechi56
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श्रीनमद भागवत गीता 7.7 मत्त: परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय | मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव || 7|| धनंजय (अर्जुन)! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी (परम कारण) नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत धागे में मणियों (मोतियों) की तरह मुझमें ही पिरोया हुआ (ओत-प्रोत) है। #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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श्री मद भगवत गीता 9.4 #geeta #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना। मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः।। 9.4।। अर्थ: यह समस्त ब्रह्मांड मेरे निराकार (अव्यक्त) रूप द्वारा व्याप्त है। सभी जीव मुझमें स्थित हैं, लेकिन मैं उनमें स्थित नहीं हूँ (मैं उनसे पृथक हूँ)।
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