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Swami Shri Shrijee Maharaj
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12 hours ago
नयनं गलदश्रुधारया वदनं गदगदरुद्धया गिरा।पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति।। ६।। हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रोंसे अश्रुओं की धारा बहेगी, कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंठ गद गद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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1 days ago
हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हर्षातिपादिते। नमामि भगवंतं तं राधाकान्तं राधिका।" हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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2 days ago
अन्याभिलाषिता-शून्यं ज्ञान-कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमा॥ रूप गोस्वामी कहते हैं कि भक्ति सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान और कर्म आदि से ढकी हुई नहीं, और केवल भगवान कृष्ण की प्रसन्नता के लिए की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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3 days ago
श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए,मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं । अभ्यास करें, मन लगने लगेगा, अभ्यास से सबकुछ संभव है। मन मायिक है, संसार की ओर ही भागता है, तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में लगाया जा सकता है । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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4 days ago
श्री राधा रानी श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं । श्री राधा रानी की कृपा से ही श्रीकृष्ण ने ब्रज गोपियों को सर्वश्रेष्ठ महारास रस का पान कराया । श्री कृष्ण रोम रोम से राधा राधा रटते रहते हैं । अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक श्रीकृष्ण भी नित्य गहवर वन की खोर में श्री राधा रानी की चरण सेवा करते हैं । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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5 days ago
श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति करके उनकी नित्य सेवा प्राप्त करना ही जीव का एकमात्र लक्ष्य है । यह निष्काम भक्ति गुरु द्वारा बताए हुए उपदेश द्वारा ही की जाएगी, उनकी आज्ञा पालन द्वारा ही विशुद्ध भक्ति संभव है । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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7 days ago
बडे भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा॥ गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि मनुष्य शरीर पाना बहुत सौभाग्य की बात है, यह मनुष्य शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है । इस मानव देह में ही हम भक्ति करके भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, अन्य किसी देह में भक्ति करने की छूट नहीं है । केवल मानव देह ही कर्म योनि है, बाकि सारी योनियां भोग योनियां हैं । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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10 days ago
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते। श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः॥ भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—जो मन को मुझमें लगाकर श्रद्धा से भक्ति करते हैं, वे श्रेष्ठ हैं। संसार में मन का राग नहीं होना चाहिए, केवल ईश्वर में हो । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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12 days ago
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः। अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते॥ तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥ भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि हे पार्थ ! जो लोग अपने सभी कर्म मुझे अर्पित करके, अनन्य रूप से केवल मुझे ही परम मानकर मेरी भक्ति करते हैं, मैं उन्हें मृत्यु रूपी संसार सागर से शीघ्र पार कराता हूँ। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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13 days ago
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥ सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥ जो किसी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रभाव और दया रखता है, अहंकार रहित है, सुख-दुःख में समान रहता है—ऐसा भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है। श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇