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Praveen Kumar Yadav
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Praveen Kumar Yadav
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2 दिन पहले
भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक,महान विचारक,लेखक, दार्शनिक,महिलाओं,वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्षरत एवं अस्पृश्यता,ऊंच-नीच, वर्ण-व्यवस्था और पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था का विरोध करने वाले तथा युगों के मिथ्या पाखंड-आडंबर पर तार्किक व वैज्ञानिक सोच से गहरी चोट देने वाले महान समाज सुधारक एवं सत्यशोधक समाज के संस्थापक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की 135 वी पुण्यतिथि पर मैं उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।आप ने जो बराबरी और आपसी भाईचारे का सपना देखा था उस सपने को हम सभी संविधान को मानने वाले भारतीय संविधान की मदद से आज साकार कर रहे हैं क्योंकि हमारे देश का संविधान हम लोगों को किसी भी तरह से आपसी भाईचारा बना के रखने में मदद करता है।हमारे संविधान ने देश के हर नागरिक को समान बताया है और समानता का अधिकार भी दिया है।महात्मा फुले ने समय रहते शिक्षा के महत्व को पहचाना. उन्होंने महसूस किया कि बहुजन समाज और उनके आसपास की महिलाएं शिक्षा की कमी के कारण गुलामी में हैं.उन्होंने महिलाओं में शिक्षा का अलख जगाने का फ़ैसला लिया. महात्मा फुले जी ने महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य क्यों किया,इस बारे में उन्होंने जो कहा, उसका विवरण कुछ इस तरह है,वे कहते हैं, ''सबसे पहले महिला स्कूल ने मेरा ध्यान खींचा.मेरे ख़्याल से महिलाओं के लिए स्कूल पुरुषों से ज़्यादा अहम थे.इस विचार के मुताबिक महात्मा फुले ने अपने सहयोगियों के साथ 1848 ई में पुणे के भिडेवाड़ा में एक लड़कियों के स्कूल की शुरुआत की.इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया है कि ज्ञान की कमी के चलते बहुजन समाज को दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का जीवन भर सामना करना पड़ता है.उन्होंने निदान बताते हुए कहा है कि इस दुर्भाग्य की जड़ अज्ञानता है.महात्मा फुले की शिक्षा पहले एक मराठी स्कूल और फिर एक मिशनरी स्कूल में हुई.उनके पिता जी गोविंदराव जी का फूलों का व्यवसाय था.आप ने जो हम भारतीयों को भाईचारे और समानता का रास्ता दिखाया है उसी रास्ते पर चल के हमारा भारत देश फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है तथा देश का हर नागरिक संपन्न हो सकता है।शत् शत् नमन🙏🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🥰मोटिवेशन वीडियो #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌 #ज्योतिबा फुले
Praveen Kumar Yadav
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3 दिन पहले
हिंदी भाषा के सबसे लोकप्रिय कवि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की 118वी जयंती पर मैं उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।27 नवंबर 1907 ई को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में जन्में हरिवंश राय बच्चन जी का नाम हरिवंश श्रीवास्तव था।बच्चन जी ने सीधी,सरल भाषा में अपने साहित्यिक रचना की थी। 'मधुशाला', 'आत्म परिचय' 'दिन जल्दी जल्दी ढलता है' आप की प्रसिद्ध रचनाएं हैं।आप ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के तौर पर भी काम किया था।आप को राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी नॉमिनेट किया गया था। हिन्दी कविता की साहित्य अकादमी पुरस्कार,सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और एफ्रो एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार से भी आप को नवाजा गया था।इसके साथ ही आप को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में 'पद्मभूषण' सम्मान से नवाजा गया था। हरिवंश राय बच्चन जी को उनकी जयंती पर सादर नमन।🙏 शत् शत् नमन 🙏 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🌞 Good Morning🌞 #हरिवंशराय बच्चन 📖✏
Praveen Kumar Yadav
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4 दिन पहले
स्वतंत्र भारत के प्रत्येक नागरिक को मैं 76 वे संविधान दिवस की हार्दिक बधाईयां देता हूं। भारत के प्रत्येक स्वतंत्र नागरिक आज,26 नवंबर,2025 को संविधान को अंगीकृत करने की 76 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं जो अपने आप में ऐतिहासिक है।26 नवंबर, 1949 के दिन,भारतीय संविधान सभा ने औपचारिक रूप से संविधान को अंगीकृत किया और 26 जनवरी,1950 को इसे लागू किया गया,जिससे भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया।भारत का संविधान 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था। संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा जी थे,स्थायी अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र प्रसाद जी थे जबकि प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ.भीम राव अम्बेडकर जी थे।संवैधानिक सलाहकार बी.एन.राव जी थे। डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने कहा था कि हम लोग शुरू से लेकर अंत तक केवल भारतीय है। भारतीय नागरिकों को हमारे संविधान ने छ्ह मौलिक अधिकार दिए है जिनका हम भारतीयों को अनुसरण करना चाहिए जो इस प्रकार है:- समानता का अधिकार : अनुच्छेद 14 से 18 तक। स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद 19 से 22 तक। शोषण के विरुध अधिकार : अनुच्छेद 23 से 24 तक। धार्मिक स्वतंत्रता क अधिकार : अनुच्छेद 25 से 28 तक। सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार : अनुच्छेद 29 से 30 तक। संवैधानिक उपचारों का अधिकार : अनुच्छेद 32 डॉ. बी.आर. अंबेडकर जी ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार (अनुच्छेद 32) को "संविधान का हृदय और आत्मा" कहा था। आइए हम सभी भारतीय आज संविधान की प्रस्तावना का शपथ ले तथा संविधान के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प ले। जय हिन्द जय भारत जय संविधान 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 (My YouTube channel name is Praveen Yadav Basic knowledge). #🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #संविधान
Praveen Kumar Yadav
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5 दिन पहले
ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था,हम ही सो गए दास्ताँ कहते कहते। हिंदी सिनेमा के ही-मैन एवं वयोवृद्ध महान अभिनेता धर्मेंद्र जी का निधन हो गया है।ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें तथा परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इस खबर से फिल्म जगत और उनके लाखों प्रशंसकों में शोक की लहर है।भारतीय फिल्मों के स्वर्णिम दौर के इस चमकते सितारे ने अपने लंबे करियर में ऐसी यादगार भूमिकाएं निभाईं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद करेंगी। अपने लंबे करियर में धर्मेंद्र जी ने कई कालजयी फिल्मों में ऐसी भूमिकाएं निभाईं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा की दिशा और पहचान दोनों को प्रभावित किया। ‘शोले’, ‘सीता और गीता’, ‘चुपके चुपके’, ‘आंखें’, ‘धरम वीर’, ‘यकीन’ के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और संवेदनशील फिल्मों में भी अद्वितीय अभिनय किया — जिनमें ‘बंधन’, ‘हकीकत’, ‘सत्यकाम’, ‘गुड्डी’ जैसी क्लासिक्स विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।इन फिल्मों में उनकी अभिनय क्षमता, संवाद-अभिव्यक्ति और भावनात्मक गहराई ने उन्हें अपने दौर का सबसे विश्वसनीय कलाकार स्थापित किया। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने सिर्फ़ एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी विनम्र, प्रेरणादायक और सदाबहार शख़्सियत खो दी है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। यह भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है। ईश्वर आप की आत्मा को शांति प्रदान करें। 🙏😭😭शत् शत् नमन😭😭🙏 #🙌 Never Give Up #✈Last travel memories😎 #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #📚कविता-कहानी संग्रह #sad
Praveen Kumar Yadav
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8 दिन पहले
उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे तथा देश के रक्षामंत्री रहे 'पद्म विभूषण' से सम्मानित धरतीपुत्र स्व माननीय मुलायम सिंह यादव जी की 86 वी जन्मजयंती पर मैं उन्हें कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता हूं।आप का जन्म 22 नवम्बर 1939 ई को इटावा जिले के सैफई गाँव में मूर्ति देवी जी व सुघर सिंह यादव जी के घर किसान परिवार में हुआ था।पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु चौधरी नत्थूसिंह जी को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थूसिंह जी के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।राजनीति में आने से पूर्व मुलायम सिंह यादव जी आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम०ए०) और बी० टी० करने के उपरान्त इन्टर कालेज में प्रवक्ता नियुक्त हुए और सक्रिय राजनीति में रहते हुए नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। मुलायम सिंह यादव जी की राष्ट्रवाद,लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में अटूट आस्था थी।आप ने राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जी की विचारधारा को आगे बढ़ाया।आप को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।आप ने मुख्यमंत्री रहते हुए लड़कियों को कन्या विद्याधन,युवाओं को बेरोजगारी भत्ता,लैपटॉप दिया तथा किसानों के हित में अनेकों काम किया।आप ने मुख्यमंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू किया जिससे पिछड़ो और दलितों को उत्तर प्रदेश में आरक्षण का लाभ मिलने लगा।आजादी के बाद से कई सालों तक अगर सीमा पर कोई जवान शहीद होता था,तो उनका शव घर पर नहीं पहुंचाया जाता था उस समय तक शहीद जवानों की टोपी उनके घर पहुंचाई जाती थी लेकिन जब मुलायम सिंह यादव जी रक्षा मंत्री बने,तब उन्होंने कानून बनाया कि अब से कोई भी सैनिक अगर शहीद होता है तो उसका शव सम्मान के साथ उसके घर तक पहुंचाया जाए जो परंपरा आज भी जारी है इन्हीं सब कामों के लिए आप को धरतीपुत्र कहा जाता है।शत् शत् नमन।भारत माता की जय।एक भारत एकजुट भारत।🇮🇳🇮🇳🇮🇳🤝🕉️☪️🪯✝️🙏 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🙌 Never Give Up #🌞 Good Morning🌞 #✈Last travel memories😎
Praveen Kumar Yadav
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9 दिन पहले
समाजवादी पार्टी को जनपद मऊ में अपने अथक परिश्रम से सींचने वाले,विभिन्न आंदोलनों में अपनी सक्रिय भागीदारी देने वाले घोसी विधानसभा के माननीय विधायक श्री सुधाकर सिंह जी का असामयिक निधन अत्यंत दुःखद एवं स्तब्ध करने वाला है। ईश्वर,माननीय विधायक जी की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस आघात को सहन करने का साहस प्रदान करें। 1996 ई में पहली बार विधायक बनने वाले सुधाकर सिंह जी खांटी समाजवादी पार्टी नेता रहे.सुधाकर सिंह जी ने 2023 में दारा सिंह चौहान जी को चुनाव हराया था। ॐ शांति…! विनम्र श्रद्धांजलि 😭दुखद😭😭🙏🏻 #✈Last travel memories😎 #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #sad #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #❤️जीवन की सीख
Praveen Kumar Yadav
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11 दिन पहले
"बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।" देश की आजादी के लिए अंग्रेजो से लोहा लेने वाली महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जी की 197 वी जयंती पर मैं उन्हे कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता हूं।बनारस में 19 नवंबर 1828 ई को जन्मी लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मणिकर्णिका था।प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था।उनके पिता मोरोपंत तांबे और मां भागीरथी सप्रे थीं।वह मनु चार साल की थीं,तभी उनकी मां की निधन हो गया।पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजी राव द्वितीय के लिए काम करते थे। उन्होंने लक्ष्मी बाई का पालन पोषण किया।इस दौरान उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाजी,शआत्मरक्षा और निशानेबाजी की ट्रेनिंग ली।14 साल की उम्र में 1842 में मनु की शादी झांसी के शासक गंगाधर राव नेवलेकर से कर दी गई।शादी के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा।उस दौर में शादी के बाद लड़कियों का नाम बदल जाता था।विवाह के बाद लक्ष्मी बाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसकी मृत्यु महज चार महीने में ही हो गई। बाद में उनके पति और झांसी के राजा का भी निधन हो गया।पति और बेटे को खोने के बाद लक्ष्मी बाई ने खुद ही अपने साम्राज्य और प्रजा की रक्षा की ठान ली।उस समय ब्रिटिश इंडिया कंपनी के वायसराय डलहौजी ने झांसी पर कब्जे का यह बेहतर समय समझा क्योंकि राज्य की रक्षा के लिए कोई नहीं था।उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई पर दबाव बनाना शुरू किया कि झांसी को अंग्रेजी हुकूमत के हवाले कर दें।रानी ने रिश्तेदार के एक बच्चे को अपना दत्तक पुत्र बनाया,जिनका नाम दामोदर था।अंग्रेजी हुकूमत ने दामोदर को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झांसी का किला उनके हवाले करने को कहा।अंग्रेजों ने साम्राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन लक्ष्मी बाई ने काशी बाई समेत 14000 बागियों की एक बड़ी फौज तैयार की।23 मार्च 1858 को ब्रिटिश फौज ने झांसी पर आक्रमण कर दिया और 30 मार्च को बमबारी करके किले की दीवार में सेंध लगाने में सफल हुए।17 जून 1858 को लक्ष्मीबाई आखिरी जंग के लिए निकली।पीठ पर दत्तक पुत्र को बांधकर हाथ में तलवार लिए झांसी की रानी ने अंग्रेजों से जंग की।लाॅर्ड कैनिंग की रिपोर्ट के मुताबिक,लक्ष्मीबाई को एक सैनिक ने पीछे से गोली मारी,फिर एक सैनिक ने एक तलवार से उनकी हत्या कर दी।शत् शत् नमन।भारत माता की जय।🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #देशभक्ति #🥰मोटिवेशन वीडियो #👍 डर के आगे जीत👌 #🙌 Never Give Up #रानी लक्ष्मीबाई जयंन्ती
Praveen Kumar Yadav
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12 दिन पहले
महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त जी की 115 वी जयंती पर मैं उन्हे कोटिश नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।आप का जन्म 18 नवम्बर 1910 ई को ग्राम-ओँयाड़ि,जिला - नानी बेदवान (बंगाल) में एक कायस्थ परिवार में हुआ था।बटुकेश्वर दत्त जी के पिताजी का नाम गोष्ठ बिहारी दत्ता जी था।आप का बचपन अपने जन्म स्थान के अतिरिक्त बंगाल प्रान्त के वर्धमान जिला अंतर्गत खण्डा और मौसु में बीता।आप की स्नातक स्तरीय शिक्षा पी॰पी॰एन॰ कॉलेज कानपुर में सम्पन्न हुई।1924 ई में कानपुर में इनकी सिख भगत सिंह जी से भेंट हुई।इसके बाद इन्होंने हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के लिए कानपुर में कार्य करना प्रारंभ किया। इसी क्रम में बम बनाना भी सीखा। 8 अप्रैल 1929 ई को दिल्ली स्थित केंद्रीय विधानसभा (वर्तमान में संसद भवन) में भगत सिंह के साथ बम विस्फोट कर ब्रिटिश राज्य की तानाशाही का विरोध किया।बम विस्फोट बिना किसी को नुकसान पहुँचाए सिर्फ पर्चों के माध्यम से अपनी बात को प्रचारित करने के लिए किया गया था।उस दिन भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल लाया गया था,जो इन लोगों के विरोध के कारण एक वोट से पारित नहीं हो पाया।इस घटना के बाद बटुकेश्वर दत्त जी और सिख भगत सिंह जी को गिरफ्तार कर लिया गया।12 जून 1929 ई को इन दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।सजा सुनाने के बाद इन लोगों को लाहौर फोर्ट जेल में डाल दिया गया।यहाँ पर सिख भगत सिंह जी और बटुकेश्वर दत्त जी पर लाहौर षडयंत्र केस चलाया गया।उल्लेखनीय है कि साइमन कमीशन के विरोध-प्रदर्शन करते हुए लाहौर में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय जी को अंग्रेजों के इशारे पर अंग्रेजी राज के सिपाहियों द्वारा इतना पीटा गया कि उनकी मृत्यु हो गई।इस मृत्यु का बदला अंग्रेजी राज के जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को मारकर चुकाने का निर्णय क्रांतिकारियों द्वारा लिया गया था।इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप लाहौर षड़यंत्र केस चला,जिसमें भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई थी।बटुकेश्वर दत्त जी को आजीवन कारावास काटने के लिए काला पानी जेल भेज दिया गया।जेल में ही उन्होंने 1933 ई और 1937 ई में ऐतिहासिक भूख हड़ताल की।सेल्यूलर जेल से 1937 ई में बांकीपुर केन्द्रीय कारागार,पटना में लाए गए और 1938 ई में रिहा कर दिए गए।काला पानी से गंभीर बीमारी लेकर लौटे बटुकेश्वर दत्त जी को फिर गिरफ्तार कर लिया गया।आज़ादी के बाद, 1947 में जेल से रिहा होने के बाद वे पटना चले गए।दत्त जी ने इसके बाद सक्रिय राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लिया लेकिन लेख लिखना जारी रखा। दत्त का स्वास्थ्य,जो लंबे समय तक कारावास, भूख हड़ताल और यातना के कारण दुर्बल था,और भी खराब हो गया।दत्त जी ने 20 जुलाई 1965 को एम्स, दिल्ली,में कैंसर के कारण दम तोड़ दिया।🇮🇳🇮🇳🇮🇳🫡😭🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🙌 Never Give Up #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #देशभक्ति
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