हौसले ने रचा इतिहास: दोनों पैर गंवाने के बाद भी एवरेस्ट फतह!
अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के दौरान IED धमाके में अपने दोनों पैर गंवा चुके ब्रिटिश आर्मी के रिटायर्ड गोरखा जवान हरि बुद्धा मागर ने इतिहास रच दिया है। वे बिना दोनों पैरों के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले दुनिया के पहले पर्वतारोही बन गए हैं।
43 वर्षीय हरि बुद्धा मागर, जो वर्तमान में ब्रिटेन के कैंटरबरी में रहते हैं, ने यह चुनौती दिव्यांगता के प्रति सोच बदलने और लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वीकार की थी।
उनकी टीम के अनुसार, वे भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचे। सैटेलाइट फोन पर उन्होंने बताया कि यह चढ़ाई उनकी कल्पना से कहीं अधिक कठिन थी, लेकिन दर्द और थकान के बावजूद आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी बना।
साल 2010 में हुए हादसे के बाद उन्होंने स्कीइंग, गोल्फ, साइक्लिंग और क्लाइंबिंग के ज़रिए दोबारा खुद को खड़ा किया। नेपाली पर्वतारोहियों की टीम के साथ 11 दिन पहले शुरू हुई इस चढ़ाई में हर मुश्किल घड़ी में परिवार और सहयोगियों की याद ने उन्हें हिम्मत दी। उनका संदेश साफ है सही सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं।🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏
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