"जल का जलजला"
जो पानी से जितना दूर है वह सफलता से भी उतना ही दूर है, जल से प्यास बुझती है, तन स्वच्छ होता है, मन प्रसन्न होता है, लेकिन एक और बड़ा काम होता है,....
स्फूर्ति , उत्साह,
आलस्य मनुष्य का इतना बड़ा दुश्मन है कि वह चाहे दिन हो या रात आदमी को कुछ नहीं करने देता,
लेकिन पानी आलस को ठहरने नहीं देता,
केवल दो बार नहाना शुरू कर दीजिए आलस्य ढूंढने से नहीं मिलेगा,
यह बात श्रीमद् भागवत में देवर्षि नारद जी ने श्री ध्रुव जी को बताई थी।
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