🙏राम राम जी : CJC🙏
*जो आता है, उसका आनंद लो*
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गांव के एक छोटे से घर में रामकिशोर और उसकी पत्नी सीता रहते थे। जीवन साधारण था, परंतु संतोष से भरा हुआ। दोनों का मानना था कि *सुख-दुख बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन की स्थिति से तय होते हैं।*
एक दिन अचानक गांव के एक दानी व्यक्ति ने उन्हें एक गाय भेंट कर दी। सीता ने खुशी से पति को बताया –
*“सुनो जी, हमें गाय दान में मिली है।”*
रामकिशोर मुस्कुराए, *“बहुत अच्छा! अब सबको ताज़ा दूध मिलेगा, बच्चों को ताक़त मिलेगी और घर में बरकत होगी।”*
गाय के आने से घर में चहल-पहल बढ़ गई। *सुबह दूध निकालना, दही जमाना, मक्खन बनाना – सब कामों में नया उत्साह था। पड़ोसी भी दूध लेने आने लगे।* सीता को लगा जैसे घर में समृद्धि का नया अध्याय शुरू हो गया हो।
*लेकिन कुछ ही दिनों बाद, एक शाम सीता ने उदास स्वर में कहा – “गाय दान करने वाला अपनी गाय वापस ले गया।”*
रामकिशोर ने बिना किसी शिकवे के कहा – *“अच्छा हुआ, अब गोबर उठाने से छुटकारा मिला। काम भी कम हो जाएगा।”*
सीता हैरान रह गई। उसने सोचा कि पति को दुख होगा, परंतु रामकिशोर का चेहरा शांत था। उन्होंने समझाया –
*“देखो, गाय आई तो हमने उसका स्वागत किया। अब चली गई तो धन्यवाद देकर विदा कर दो। जीवन में हर चीज़ अस्थायी है। जो आता है, उसका आनंद लो; जो जाता है, उसे जाने दो। यही मन की शांति है।”*
रामकिशोर का यह दृष्टिकोण धीरे-धीरे सीता के मन में भी उतरने लगा। *उसने महसूस किया कि बदलाव चाहे सुखद हो या दुखद, यदि मन को संतुलित रखा जाए तो पीड़ा नहीं होती।*
दोस्तों, *जीवन में हर चीज़ अस्थायी है – रिश्ते, संपत्ति, शरीर तक। इसलिए जो आता है उसका स्वागत करो, जो जाता है उसे धन्यवाद देकर विदा करो। मन को इतना लचीला बनाओ कि कोई भी बदलाव पीड़ा न दे। तनाव मत लो, क्योंकि सच्चा सुख स्वीकार करने में है, पकड़ने में नहीं।*
👉इ मीडिया से साभार उद्धरित👈
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