💔 शादी के मंडप से उठी आवाज… और उसने वरमाला उतार दी
गाँव के छोटे से मंदिर में शहनाइयाँ गूंज रही थीं। आँगन में रंगोली सजी थी, दीवारों पर गेंदे के फूल लटक रहे थे और हवा में हल्दी, इत्र और मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी।
लाल जोड़े में सजी सीमा मंडप में बैठी थी। हाथों में मेहंदी का गहरा रंग था, जिसमें छुपा नाम अभी तक किसी ने ढूँढने की कोशिश नहीं की थी। उसके सामने बैठे दूल्हे के चेहरे पर खुशी थी, परिवार वाले व्यस्त थे, पंडित मंत्र पढ़ रहा था — सब कुछ एक परफेक्ट शादी जैसा था।
लेकिन सीमा की आँखों में चमक नहीं थी।
उसकी निगाहें बार-बार मंदिर के दरवाजे की ओर उठ जाती थीं।
जैसे कोई आने वाला हो।
जैसे कोई जिसे वह आज भी भूल नहीं पाई।
तभी उसके हाथ में रखा फोन हल्का सा कांपा।
उसने नजर झुकाकर स्क्रीन देखी।
स्क्रीन पर नाम चमका —
अर्जुन ❤️
सीमा की सांस अटक गई।
छह महीने।
पूरा छह महीने हो गए थे उसकी आखिरी बात हुए।
अर्जुन भारतीय सेना में था और सीमा से बचपन से प्यार करता था। दोनों ने एक साथ स्कूल में पढ़ाई की, खेतों के रास्तों पर साथ चले, मेले में गुब्बारे खरीदे और मंदिर के पीछे पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर जिंदगी भर साथ रहने की कसम खाई थी।
फिर एक दिन अर्जुन भर्ती हो गया।
देश सेवा उसके लिए सपना नहीं, धर्म था।
सीमा इंतज़ार करती रही।
शुरू में फोन आते रहे। फिर पोस्टिंग कश्मीर के संवेदनशील इलाके में हो गई। बात कम होने लगी।
और फिर एक दिन फोन पूरी तरह बंद हो गया।
महीनों बीत गए।
कोई खबर नहीं।
गाँव में अफवाहें आने लगीं।
“शायद शहीद हो गया…”
“शायद लापता है…”
“अब जिंदगी रुकती नहीं…”
परिवार ने दबाव डाला।
समाज ने समझाया।
और आज सीमा मंडप में बैठी थी।
लेकिन उसका दिल… कहीं और था।
फोन फिर वाइब्रेट हुआ।
काँपते हाथों से उसने कॉल रिसीव की।
“हेलो…”
दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर धीमी, टूटी हुई आवाज आई —
“सीमा…”
उसकी आँखों से आँसू बह निकले।
“अर्जुन… तुम जिंदा हो?”
दूसरी तरफ हल्की सी हंसी आई, जिसमें दर्द छिपा था।
“जिंदा हूँ… पर पता नहीं कब तक…”
सीमा का दिल बैठ गया।
पंडित मंत्र पढ़ रहा था।
लोग फोटो खींच रहे थे।
और सीमा की दुनिया रुक गई।
अर्जुन की आवाज फिर आई —
“हमारी पोस्ट पर हमला हुआ था… कई साथी… वापस नहीं आए…”
कुछ सेकंड चुप्पी।
फिर वह बोला —
“अगर मैं लौटकर ना आ सका… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगी?”
सीमा रो पड़ी।
“ऐसा मत बोलो…”
अर्जुन ने धीरे कहा —
“अगर मैं जिंदा लौटा… तो क्या तुम इंतज़ार करोगी?”
सीमा ने आँखें बंद कर लीं।
मंडप में शोर था।
दिल में तूफान।
उसने धीरे कहा —
“मैंने कभी इंतज़ार करना छोड़ा ही नहीं…”
कॉल कट गया।
सीमा कुछ सेकंड तक फोन देखती रही।
फिर उसने सामने बैठे दूल्हे की ओर देखा।
फिर वरमाला की ओर।
फिर अपने हाथों की मेहंदी की ओर।
और अचानक उसने वरमाला नीचे रख दी।
पूरा मंडप सन्नाटे में डूब गया।
पंडित रुक गया।
परिवार स्तब्ध रह गया।
दूल्हा खड़ा हो गया।
सीमा उठी।
उसकी आवाज कांप रही थी, लेकिन शब्द मजबूत थे —
“मैं उस इंसान की हूँ… जो देश के लिए मरने खड़ा है।”
उसके पिता ने कुछ कहना चाहा।
पर उसकी माँ की आँखों में आँसू थे — और गर्व भी।
शादी रुक गई।
समाज ने बातें कीं।
लोगों ने ताने मारे।
पर सीमा ने इंतज़ार चुना।
🇮🇳 छह महीने बाद…
सर्दियों की सुबह थी।
गाँव में सेना की एक जीप आकर रुकी।
लोग इकट्ठा होने लगे।
दरवाजा खुला।
एक जवान नीचे उतरा।
कंधे पर पट्टी बंधी थी।
चेहरे पर थकान थी।
लेकिन आँखों में वही मुस्कान।
अर्जुन।
खबर आग की तरह फैल गई।
सीमा मंदिर की सीढ़ियों पर खड़ी थी।
उसकी आँखों में इंतज़ार के छह मौसम थे।
अर्जुन धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा।
दोनों कुछ पल तक एक-दूसरे को देखते रहे।
ना शब्द…
ना आवाज…
सिर्फ धड़कनें।
अर्जुन मुस्कुराया।
“इस बार छुट्टी लेकर आया हूँ…”
सीमा की आँखों से आँसू गिर पड़े।
वह आगे बोला —
“शादी करने।”
सीमा हँसते हुए रो पड़ी।
गाँव में फिर शहनाई बजी।
इस बार सच्चे इंतज़ार की।
इस बार वादे की नहीं… विश्वास की।
❤️ अंतिम पंक्तियाँ💞
प्यार कहना आसान है।
निभाना कठिन है।
इंतज़ार करना सबसे कठिन।
और एक फौजी से प्यार करना —
हिम्मत वालों का काम है।
🇮🇳 क्योंकि फौजी का प्यार शब्दों में नहीं… जिम्मेदारी में लिखा होता है।💞🚩🇮🇳
#💓 फ़ौजी के दिल की बातें
#🙏 जवानों को सलाम #🎖️देश के सिपाही #🎖️देश के जांबाज #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 @sushil sahiba shingh 🥰