फॉलो करें
❤️dolly 🥰
@dufermissyou
1,060
पोस्ट
6,073
फॉलोअर्स
❤️dolly 🥰
573 ने देखा
घना जंगल, ठंडी हवा और अँधेरा… भारत–नेपाल बॉर्डर पर SSB की 27वीं बटालियन गश्त पर थी। कमांड कर रहे थे सब-इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह—शांत चेहरा, लेकिन आँखों में आग। रात करीब 2:30 बजे वॉकी-टॉकी पर आवाज़ आई— “सर, बॉर्डर पिलर 112 के पास संदिग्ध मूवमेंट।” अर्जुन ने हाथ का इशारा किया। पूरी टीम जमीन से चिपककर आगे बढ़ी। नाइट विज़न में साफ दिख रहा था— हथियारों की तस्करी करने वाला गिरोह, भारी बैग्स के साथ बॉर्डर पार करने वाला था। अचानक क्लिक! एक सूखी टहनी टूटी। “कौन है?” अगले ही पल गोलियों की आवाज़ गूँज उठी। “कवर लो!” अर्जुन गरजे। जंगल गोलियों से काँप उठा। एक तस्कर भागने लगा— हवलदार राकेश ने दौड़ लगाई, छलाँग मारी और उसे ज़मीन पर पटक दिया। दूसरी तरफ़ दो लोग नदी में कूद गए। अर्जुन ने बिना सोचे पानी में छलांग लगा दी। तेज़ बहाव, अँधेरा, लेकिन पकड़ मजबूत। एक तस्कर ने चाकू निकाला— धप्प! अर्जुन की राइफल का बट उसके हाथ पर पड़ा। चाकू पानी में गिर गया। 10 मिनट का ऑपरेशन। 6 तस्कर गिरफ्तार। हथियार बरामद। बॉर्डर सुरक्षित। सुबह की पहली रोशनी में जवान चुपचाप खड़े थे। कोई जश्न नहीं, कोई शोर नहीं। राकेश ने कहा, “सर, लोग कहते हैं बॉर्डर पर शांति है।” अर्जुन मुस्कुराए, “क्योंकि SSB जाग रही है।” जब देश चैन से सोता है, तब SSB का जवान जंगल, नदी और अँधेरे से लड़ रहा होता है। जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 🇮🇳🌹 #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के जांबाज #🎖️देश के सिपाही #🙏 जवानों को सलाम #💓 फ़ौजी के दिल की बातें @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
529 ने देखा
रात के 2 बजे थे। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में सन्नाटा इतना गहरा था कि पत्ते की आवाज़ भी गोली जैसी लग रही थी। DRG की अल्फा टीम धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। टीम लीडर — कमांडेंट अर्जुन सिंह — आँखों में आग, चेहरे पर सख़्ती। अचानक— धड़ाम! आईईडी ब्लास्ट! ज़मीन कांपी, धुआँ छा गया। “कवर लो!” अर्जुन की दहाड़ जंगल में गूँज गई। चारों तरफ़ से फायरिंग शुरू। नक्सली सोच रहे थे—आज DRG खत्म। लेकिन उन्हें नहीं पता था… ये DRG है, भागने वालों की फौज नहीं। अर्जुन ने मिट्टी से उठते हुए AK पकड़ी। धीमी आवाज़ में बोला— “आज नहीं… आज जवाब मिलेगा।” टीम के जवान एक-एक कर पोज़िशन लेने लगे। कोई पेड़ के पीछे, कोई चट्टान के पास। तड़-तड़-तड़! जवानो की जवाबी फायरिंग ने जंगल की खामोशी चीर दी। एक नक्सली सामने आया— अर्जुन दौड़ा, स्लो-मोशन में कूदकर हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट! एक घूँसा, एक लात— धड़ाम! ज़मीन पर गिरा दुश्मन। रेडियो पर आवाज़ आई— “सर, बैक-अप नहीं आएगा… हमें ही निकलना होगा।” अर्जुन ने आसमान की तरफ़ देखा, फिर मिट्टी उठाकर माथे से लगाई— “भारत माँ की कसम… एक क़दम भी पीछे नहीं।” अंतिम हमला। जवानों की गूंजती आवाज़ें— “जय हिन्द!” कुछ ही मिनटों में जंगल शांत था। धुआँ था, थकान थी… लेकिन तिरंगा सीधा खड़ा था। सुबह की पहली किरण जब जंगल पर पड़ी, अर्जुन ने शहीद साथी की तरफ़ देखा और बोला— “कह देना घर पर… देश सुरक्षित है।” 🇮🇳🔥जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🎖️देश के सिपाही #🎖️देश के जांबाज #🙏 जवानों को सलाम #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
753 ने देखा
मोहब्बत भी दिसम्बर की धुंध की तरह होती है, अगर हो जाए तो इसके आगे कुछ नजर नहीं आता। #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🙏 जवानों को सलाम #🎖️देश के जांबाज #🎖️देश के सिपाही #💓 फ़ौजी के दिल की बातें @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
948 ने देखा
हरियाणा के एक छोटे से गाँव ढोला में सूरज निकलते ही एक नौजवान खेत की मिट्टी को माथे से लगाकर बोला, “माँ, आज इसी मिट्टी की रक्षा के लिए जा रहा हूँ।” उसका नाम था हवलदार अजय सिंह, भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट का सिपाही। जाट रेजिमेंट में भर्ती होना सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा थी। अजय के दादा 1965 की जंग में लड़े थे और पिता कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे। गाँव में आज भी लोग कहते थे— “जाट रेजिमेंट पीछे हटना नहीं जानती।” सीमा पर दुश्मन की हरकतें बढ़ रही थीं। एक रात अचानक दुश्मन ने ऊँचाई पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। मौसम खराब था, बर्फ़ गिर रही थी और साँस लेना मुश्किल हो रहा था। कमान्डिंग ऑफिसर ने कहा, “ये मिशन आसान नहीं है।” अजय आगे बढ़ा और बोला, “सर, जाट रेजिमेंट मुश्किल से नहीं डरती।” रात के अँधेरे में “जाट बलवान – जय भगवान” का नारा गूँजा। गोलियों की बौछार के बीच अजय और उसके साथी चट्टानों पर चढ़ते गए। कई घायल हुए, लेकिन कोई रुका नहीं। अजय ने दुश्मन के बंकर पर तिरंगा फहराया, तभी एक गोली उसके सीने में लगी। गिरते हुए उसने बस इतना कहा— “ऊँचाई हमारी है, सर…” सुबह जब सूरज निकला, तो पहाड़ी पर तिरंगा लहरा रहा था। मिशन सफल हो चुका था। आज ढोला गाँव के स्कूल के बाहर अजय की मूर्ति लगी है। बच्चे रोज़ उसे सलाम करते हैं और मास्टर जी कहते हैं— “ये कहानी सिर्फ अजय की नहीं, ये जाट रेजिमेंट की रूह है।” जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🎖️देश के जांबाज #🙏 जवानों को सलाम #🎖️देश के सिपाही #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
7.5K ने देखा
Happy birthday sahiba 🥺🌍♥️ Wish you many many happy returns of the day 🌍🫂♥️ god bless you always 😊🤍 the birthday caption endless 🥺 I want to wish your happy life❣️ 💐always keep smile😊on your face dear....❣️ 💕😚 Happy birthday wishes my dear 💋🥺♥️ #mahadev 🙏🚩__bless__you 😌❤️‍🩹🙌 #stay__safe 😗💜💁 #Stay__Beautiful😙🌷💟 Once again birthday to you 😘🎉🎊🎂😘🥰🎂🥳 #❤️प्यार वाले स्टेटस ❤️ #💕 प्यार भरी शुभकामनाएं #🎂 जन्मदिन🎂 #💕दिल वाली शुभकामनाएं @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
678 ने देखा
बर्फ से ढकी उस ऊँची पहाड़ी पर रात गहराने लगी थी। ठंडी हवाएँ ऐसे चल रही थीं मानो परीक्षा ले रही हों—हिम्मत की, संकल्प की। सीमा चौकी पर तैनात उप निरीक्षक अर्जुन सिंह, सशस्त्र सीमा बल का जवान, अपनी राइफल थामे दूर क्षितिज को निहार रहा था। देश की सीमा उसके सामने थी और देश का विश्वास उसके कंधों पर। हज़ारों किलोमीटर दूर, एक छोटे से गाँव में, उसकी माँ हर शाम एक दीया जलाती थी। “जब तक दीया जलता है, मेरा बेटा सुरक्षित है,” वह खुद से कहती। अर्जुन को याद आया—पिछली छुट्टी में उसकी बेटी ने मासूमियत से पूछा था, “पापा, आप हमेशा दूसरों की रखवाली करते हो, आपकी रखवाली कौन करता है?” उस सवाल का जवाब शायद उसके पास नहीं था, पर आँखों में गर्व ज़रूर था। उस रात सीमा पर हलचल हुई। दुश्मन की नापाक हरकत को अर्जुन और उसके साथियों ने समय रहते रोक लिया। गोलियों की आवाज़, बर्फ में दौड़ते कदम और “भारत माता की जय” का नारा—सब कुछ कुछ ही पलों में इतिहास बन गया। अर्जुन घायल हुआ, पर डटा रहा… क्योंकि उसे पता था—अगर वह रुका, तो देश असुरक्षित होगा। सुबह जब सूरज निकला, सीमा सुरक्षित थी। और गाँव में माँ का दीया अब भी जल रहा था। आज अर्जुन जैसे अनगिनत जवान हैं— जो अपने परिवार से दूर, अपने सुख-दुख को पीछे छोड़, देश की सीमाओं पर खड़े हैं। और उनके पीछे खड़े हैं उनके परिजन— माँ, जो हर दिन प्रार्थना करती है पत्नी, जो आँसू छुपाकर मुस्कुराती है बच्चे, जो गर्व के साथ कहते हैं— “मेरे पापा SSB में हैं।” नमन है उन वीरों को जो सीमा पर खड़े हैं, ताकि हम चैन की नींद सो सकें। नमन है उन परिजनों को, जिनका त्याग भी उतना ही महान है। सशस्त्र सीमा बल स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपका साहस, आपका बलिदान—भारत की पहचान है। 🇮🇳 जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🙏 जवानों को सलाम #🎖️देश के सिपाही #🎖️देश के जांबाज @shahiba🫡🫡
❤️dolly 🥰
730 ने देखा
थार का तपता सूरज ज़मीन को इस तरह जलाता था, जैसे उसके नीचे लावा बह रहा हो। हवा में धूल के बवंडर उठते, और दूर कहीं ऊँटों की घंटियाँ सुनाई देतीं। लेकिन उस दोपहर, इस वीरान रेगिस्तान में कोई अलग ही हलचल थी—राजपूताना राइफ़ल्स की चार्ली कंपनी एक गुप्त ऑपरेशन के लिए निकली थी। कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे कैप्टन रणवीर सिंह राठौड़, जिनकी आँखें दूर से ही खतरा पहचान लेती थीं। मरुभूमि की हर लपट उनके इरादों को और तपाती थी। खुफ़िया रिपोर्ट थी कि सीमा के पास एक पुराना किला—भैरवगढ़—दुश्मन ने अपना छिपा अड्डा बना लिया है। वहां से ड्रोन और हथियार भारत में भेजे जा रहे थे। काम साफ़ था— दुश्मन को ढूंढना, उसके नेटवर्क को तोड़ना… और फिर रेगिस्तान जितनी ख़ामोशी में लौट जाना। कैप्टन रणवीर ने हाथ उठाकर इशारा किया। सब सिपाही ज़मीन पर झुककर आगे बढ़ने लगे—घुटनों में रेती, माथे पर पसीना, लेकिन आँखों में वही चमक… राजपूताना की चमक। दूर किले की दीवारों पर हलचल दिखी। “दुश्मन के दो सेंट्री। यह लोग हमें रोक नहीं पाएँगे।” कैप्टन रणवीर फुसफुसाए। सिपाही अर्जुन चौधरी और बजरंग चौहान ने निशाना साधा—दो हल्की आवाज़ें… और किले की हवा अचानक शांत हो गई। पर असली रोमांच तो भीतर इंतज़ार कर रहा था। किले में कदम रखते ही हवा में एक ठंडी बदबू फैली। दीवारों पर जली मशालें, टूटी तलवारें, और एक लंबा गलियारा—जैसे कोई कहानी डर और इतिहास दोनों को अपने भीतर छुपाए बैठी हो। सिपाही हिम्मत दिखा रहे थे, लेकिन भीतर हर किसी की धड़कन तेज़ थी। अचानक पीछे से आवाज़ आई— “कैप्टन! मूवमेंट!” सामने तीन हथियारबंद आतंकी निकल आए। गोलियाँ चलीं… किले की दीवारें गूँज उठीं। राजपूताना के जवान पत्थर की तरह टिके रहे— दो मिनट में पूरा गलियारा साफ़। लेकिन तभी सबसे पीछे खड़े वीरसिंह ने दीवार में लगी एक काली दरार पर हाथ लगाया। दीवार खिसकी—और नीचे जाता एक गुप्त रास्ता दिखा। “यही है असली अड्डा…” कैप्टन रणवीर ने कहा। नीचे उतरते ही सिपाही रुक गए— चारों तरफ़ बक्से थे—RDX, ड्रोन, नक्शे… और एक टाइमर! दुश्मन किला उड़ाने की तैयारी में था, ताकि सबूत मिट जाएँ। घड़ी पर सिर्फ़ 3 मिनट 18 सेकंड। रणवीर ने बिना सोचे टाइमर उठाया। अर्जुन ने पूछा, “सर… ये जोखिम है!” रणवीर मुस्कुराए— “राजपूताना पीछे हटना नहीं जानता, अर्जुन… देश पहले है, हम बाद में।” उन्होंने वायर काटे— एक… दो… तीन… और टाइमर रुक गया। ऊपर सायरन बज उठा—दुश्मन को राजपूताना की मौजूदगी का पता चल चुका थाकिले के बाहर निकलते ही दुश्मन की गाड़ियों ने घेर लिया। लेकिन राजपूताना राइफ़ल्स रेगिस्तान की वो आँधी है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। तीन मिनट की भिड़ंत… और चार्ली कंपनी विजयी। ऑपरेशन सफल—हथियार बरामद, दुश्मन ढेर। थक चुके जवान जब जीप में बैठे तो सूरज ढल रहा था। आसमान के रंग में रेत की महक घुल रही थी। कैप्टन रणवीर ने आख़िरी बार किले की तरफ़ देखा— “मरुभूमि हमेशा याद रखेगी… आज राजपूताना फिर जगा था।” भारत माता की जय की आवाज़ दूर तक गूँज गई। 🇮🇳🔥 जय हिन्द 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳!! #🎖️देश के जांबाज #🙏🏻माँ तुझे सलाम #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🎖️देश के सिपाही @shahiba🫡🫡
See other profiles for amazing content