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🦚 क्या आप जानते हैं? भगवान श्रीकृष्ण ने मात्र 64 दिनों में सीखी थीं 64 अद्भुत कलाएं! ✨ भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा उज्जैन (अवंतिका) स्थित गुरु सांदीपनि के आश्रम में ग्रहण की थी। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि उन्होंने वहां केवल 64 दिन बिताए और उतने ही दिनों में 64 कलाओं (विद्याओं) में महारत हासिल कर ली! यद्यपि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे और जन्म से ही सर्वज्ञ थे, लेकिन धरती पर एक साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेने के कारण, उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान किया और एक आदर्श विद्यार्थी की तरह गुरु के पास जाकर ये विद्याएं पुनः सीखीं। 📜 गुरु सांदीपनि के आश्रम में सीखी गईं 64 अद्भुत कलाओं की पूरी सूची: 1. नृत्य – नाचना। 2. वाद्य – तरह-तरह के बाजे (वाद्ययंत्र) बजाना। 3. गायन विद्या – सुरीली गायकी। 4. नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व बेहतरीन अभिनय। 5. इंद्रजाल – जादूगरी। 6. नाटक रचना – नाटक, आख्यायिका आदि की रचना करना। 7. सुगंध निर्माण – इत्र, तेल आदि सुगन्धित चीजें बनाना। 8. पुष्प श्रृंगार – फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना। 9. बेताल वशीकरण – बेताल आदि को वश में रखने की गुप्त विद्या। 10. बाल क्रीड़ा – बच्चों के खेल। 11. विजय विद्या – हर क्षेत्र में विजय प्राप्त कराने वाली विद्या। 12. मन्त्रविद्या – मंत्रों का गूढ़ ज्ञान। 13. शकुन-अपशकुन – प्रश्नों के उत्तर में शुभ-अशुभ बतलाना। 14. रत्न कला – रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना। 15. यन्त्र निर्माण – कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना। 16. सांकेतिक भाषा – गुप्त भाषा (Code language) बनाना। 17. जल बंधन – जल के प्रवाह को बांधना। 18. बेल-बूटे बनाना – चित्रकारी और नक्काशी। 19. उपहार रचना – देव पूजन में रंगीन चावल और फूलों से कलाकृतियां बनाना। 20. पुष्प शय्या – फूलों की सेज सजाना। 21. पक्षियों की भाषा – तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना व समझना। 22. वृक्षायुर्वेद – वृक्षों की चिकित्सा। 23. पशु-पक्षी क्रीड़ा – भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति। 24. उच्चाटन विधि – विरोधियों के मन को भ्रमित करना। 25. वास्तुकला – घर आदि बनाने की कारीगरी। 26. बुनाई कला – गलीचे, दरी आदि बनाना। 27. काष्ठ कला (बढ़ईगिरी) – लकड़ी की कारीगरी। 28. आसन निर्माण – पट्टी, बेंत, बाण आदि से पलंग व कुर्सी बनाना। 29. पाक कला – कई तरह की सब्जी, रस, मीठे पकवान बनाने की कला। 30. हस्त लाघव – हाथ की फूर्ती के काम (हाथ की सफाई)। 31. बहुरूपिया कला – चाहे जैसा वेष धारण कर लेना। 32. पेय निर्माण – तरह-तरह के पीने के स्वादिष्ट पदार्थ बनाना। 33. द्यूत क्रीड़ा – जुआ या पासे का खेल। 34. छन्द ज्ञान – समस्त छन्दों व वेदों का ज्ञान। 35. वस्त्र परिवर्तन – वस्त्रों को छिपाने या पल भर में बदलने की विद्या। 36. आकर्षण विद्या – दूर के मनुष्य या वस्तुओं को आकर्षित करना। 37. वस्त्र व आभूषण निर्माण – कपड़े और गहने बनाना। 38. पुष्प माला निर्माण – हार-माला आदि गूंथना। 39. विचित्र सिद्धियां – शत्रु को कमजोर करने वाली औषधियां व मंत्र प्रयोग। 40. कर्ण-पुष्प निर्माण – स्त्रियों की चोटी और कानों के लिए फूलों के गहने बनाना। 41. कठपुतली कला – कठपुतली बनाना और नाचना। 42. मूर्तिकला – प्रतिमा आदि बनाना। 43. पहेली ज्ञान – जटिल पहेलियां बूझना। 44. सूचिका कर्म (सिलाई) – कपड़ों की सिलाई, रफू व कसीदाकारी। 45. केश विन्यास – बालों की सफाई और सजावट का कौशल। 46. मन की बात जानना – मुट्ठी में छिपी चीज या मन की बात बता देना। 47. विदेशी भाषा ज्ञान – कई देशों की भाषाओं का ज्ञान। 48. मलेच्छ-काव्य ज्ञान – कूट संकेतों (Ciphers) को लिखने व समझने की कला। 49. धातु व रत्न परीक्षण – सोने, चांदी तथा रत्नों की शुद्धता परखना। 50. धातु कर्म – सोना-चांदी आदि बना लेना (कीमियागिरी)। 51. मणि ज्ञान – मणियों के रंग और गुणों को पहचानना। 52. खानों की पहचान – खदानों (Mines) की पहचान करना। 53. चित्रकारी – अद्भुत चित्र बनाना। 54. रंगाई कला – दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना। 55. शय्या-रचना – बिस्तर या शय्या को कलात्मक रूप से सजाना। 56. मणि-फर्श निर्माण – घर के फर्श को मोती और रत्नों से जड़ना। 57. कूटनीति – राजनीति और कूटनीति का गहरा ज्ञान। 58. ग्रंथ पठन चातुराई – ग्रंथों को पढ़ाने और समझाने की कला। 59. नवाचार (Innovation) – नई-नई बातें और विचार निकालना। 60. समस्यापूर्ति – किसी अधूरी बात या काव्य को पूरा करना। 61. कोश ज्ञान – समस्त शब्दकोशों का ज्ञान। 62. कटक रचना – श्लोक या काव्य में छूटे पद को मन से तुरंत पूरा करना। 63. छल विद्या – आवश्यकता पड़ने पर धर्म रक्षार्थ छल से काम निकालना। 64. कर्ण आभूषण रचना – शंख, हाथीदांत आदि से कान के सुंदर गहने तैयार करना। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि व्यक्ति चाहे कितना भी ज्ञानी क्यों न हो, गुरु का स्थान और शिक्षा का महत्व जीवन में सर्वोपरि होता है। 🙏 ।। जय श्री कृष्ण ।। 🚩 . 🪷।। राधे राधे ।।🪷 . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🌷शुभ बुधवार #🌺हरियाली अमावस्या🙏 #😇बुधवार भक्ति स्पेशल🌟 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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#🌺 श्री गणेश 🕉️ शास्त्रों के अनुसार पुत्र कितने प्रकार के होते हैं? 🕉️ सनातन धर्म में 'पुत्र' का बहुत गहरा अर्थ है। शास्त्रों के अनुसार, 'पुत' का अर्थ है नरक और 'त्र' का अर्थ है बचाने वाला। अर्थात् जो श्राद्ध और कर्मों से माता-पिता तथा पितरों को नरक से बचाए, वही पुत्र है। धर्मशास्त्रों (जैसे मनुस्मृति) में मुख्य रूप से 12 प्रकार के पुत्रों का वर्णन है। आइए जानते हैं इनके बारे में: 🟢 प्रथम 6 पुत्र (जो ऋण, पिण्ड, गोत्र और कुल के अधिकारी होते हैं): १. औरस: अपनी धर्मपत्नी से उत्पन्न अपना प्रकृत पुत्र (सबसे श्रेष्ठ)। २. क्षेत्रज: पति के अस्वस्थ या अक्षम होने पर, उसकी आज्ञा से पत्नी द्वारा उत्पन्न पुत्र। ३. दत्तक: गोद लिया हुआ पुत्र (जिसके बदले कोई धन न लिया गया हो)। ४. कृत्रिम: किसी श्रेष्ठ जन या मित्र द्वारा स्वेच्छा से दिया गया पुत्र। ५. गूढज: वह पुत्र जो घर में उत्पन्न हुआ हो, लेकिन जिसके वास्तविक स्रोत का ज्ञान न हो। ६. अपविद्ध: बाहर से स्वयं लाया गया और अपनाया गया पुत्र। 🔴 अन्य 6 पुत्र (जो केवल नामधारी होते हैं, इन्हें पिण्ड या गोत्र का अधिकार नहीं होता): ७. कानीन: कुँवारी कन्या से उत्पन्न पुत्र। ८. सहोढ़: गर्भिणी कन्या से विवाह के बाद उत्पन्न पुत्र। ९. क्रीत: मूल्य देकर (खरीदा गया) पुत्र। १०. पौनर्भव: पुनर्विवाह से उत्पन्न या किसी स्त्री को दूसरे पति को सौंपने पर उत्पन्न पुत्र। ११. स्वयंदत्त: अकाल या विपत्ति के कारण जो स्वयं आकर खुद को किसी को सौंप दे। १२. पार्शव (शौद्र): ब्राह्मण पिता और शूद्र माता से उत्पन्न पुत्र। ✨ कर्मों (पूर्व जन्म) के आधार पर 4 प्रकार के पुत्र ✨ शास्त्रों में कर्मों के हिसाब से भी पुत्र की ४ श्रेणियां बताई गई हैं: 💸 ऋणानुबंध पुत्र: यदि आपने पूर्व जन्म में किसी का कर्ज नहीं चुकाया है, तो वह इस जन्म में आपका पुत्र बनकर आएगा। वह तब तक आपका धन बर्बाद करेगा, जब तक उसका पिछला हिसाब बराबर नहीं हो जाता। ⚔️ शत्रु पुत्र: यदि पिछले जन्म में आपने किसी को बहुत कष्ट दिया है, तो वह शत्रु इस जन्म में पुत्र बनकर जन्म लेगा और आपको जीवन भर दुःख देगा। 😐 उदासीन पुत्र: ऐसा पुत्र माता-पिता से कोई लगाव नहीं रखता। विवाह होते ही वह अलग हो जाता है और उसे माता-पिता के सुख-दुःख से कोई वास्ता नहीं होता। 🙏 सेवक पुत्र (सबसे श्रेष्ठ): यदि आपने पिछले जन्म में निःस्वार्थ भाव से किसी की या गौ-माता की सेवा की है, तो वही पुण्य इस जन्म में 'सेवक पुत्र' के रूप में जन्म लेता है, जो जीवन भर आपकी नि:स्वार्थ सेवा करता है। सार: हमारे जीवन में आने वाली संतान हमारे ही पूर्व जन्मों के कर्मों का फल होती है। ॥ जय सनातन धर्म ॥ ॥ हर हर महादेव ॥ ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। हर हर महादेव ।। . !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #😇बुधवार भक्ति स्पेशल🌟 #🌺हरियाली अमावस्या🙏 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🌷शुभ बुधवार https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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#🌺 श्री गणेश 🚩 श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा: इतिहास और संघर्ष का अनसुना सच 🚩 1949 में ली गई मथुरा की शाही ईदगाह की ऐतिहासिक तस्वीरों में एक नष्ट किए गए भव्य मंदिर के अवशेष स्पष्ट देखे जा सकते हैं। वहीं पास में ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) का एक पुराना बोर्ड भी था, जिस पर लिखा था— "यह वह स्थान है जिसे हिंदू अपने भगवान कृष्ण का जन्मस्थान मानते हैं और यह आस्था हजारों साल पुरानी है।" आइए जानते हैं श्री कृष्ण जन्मभूमि का वह ऐतिहासिक घटनाक्रम, जो हर किसी को जानना चाहिए: 🛕 भव्य मंदिर का निर्माण (1618): ओरछा के राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने 33 लाख रुपये की भारी लागत से यहाँ एक अत्यंत भव्य श्री कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया था। (अंदाजा लगाइए: उस समय 1 रुपये में 296 किलो चावल मिलता था, तो 33 लाख की कीमत आज के समय में कितनी विशाल रही होगी!) ⚔️ मंदिर का विध्वंस (1670): औरंगजेब ने इस भव्य कृष्ण मंदिर को नष्ट कर दिया और इसके खंडहरों के ठीक ऊपर 'शाही ईदगाह' का निर्माण करा दिया। 📜 कानूनी लड़ाई (1804 - 1935): 1804 में जब मथुरा ब्रिटिश नियंत्रण में आया, तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस जमीन की नीलामी की। बनारस के एक धनी बैंकर राजा पटनीमल ने इसे खरीद लिया। इसके मालिकाना हक़ को लेकर अदालत में चुनौती दी गई, लेकिन 1935 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजा पटनीमल के वंशजों के पक्ष में फैसला सुनाया। ⚠️ निर्माण में बाधाएँ: अदालत का फैसला पक्ष में होने के बावजूद, लगातार धमकियों और उपद्रवों के कारण राजा के वंशज वहाँ मंदिर का निर्माण शुरू नहीं कर सके। 🤝 1968 का विवादित समझौता: स्वतंत्रता के बाद, बिड़ला परिवार ने यह जमीन खरीदी और 'कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट' का गठन किया। 1968 में ट्रस्ट और शाही ईदगाह समिति के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते ने ईदगाह के अस्तित्व को कानूनी मान्यता दे दी, जिसका तब तक कोई वैधानिक आधार नहीं था। 🏛️ वर्तमान आधुनिक मंदिर (1982): इस समझौते के तहत हिंदुओं को ईदगाह के दक्षिण में जमीन का एक छोटा सा हिस्सा दिया गया, जहाँ 1982 में आज का आधुनिक श्री कृष्ण मंदिर बनकर तैयार हुआ। ध्यान देने योग्य बात: 1968 के इस समझौते से पहले आम जनता या किसी अन्य हिंदू संगठन से कोई परामर्श नहीं किया गया था। यह समझौता सीधे बिड़ला और ईदगाह समिति के बीच था। यही कारण है कि आज भी यह माना जाता है कि इस समझौते में हिंदुओं के अधिकारों के साथ न्याय नहीं हुआ और वे ठगे गए। 📚 (स्रोत एवं अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: हंस बकर (1990), "द हिस्ट्री ऑफ सेक्रेड प्लेसेस इन इंडिया") ॥ जय श्री कृष्ण ॥ ॥ राधे राधे ॥ . 🪷।। राधे राधे ।।🪷 . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😇बुधवार भक्ति स्पेशल🌟 #🌷शुभ बुधवार https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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4 days ago
🌿 सावन के शनिवार का विशेष महत्व: भगवान शिव के साथ ऐसे पाएं 'न्यायाधीश' शनिदेव की असीम कृपा! ✨⚖️ क्या आप जानते हैं कि सावन के महीने में भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की उपासना का विशेष महत्व क्यों है? दरअसल, महादेव ही शनिदेव के गुरु हैं! शिव जी ने ही उन्हें कर्मों के अनुसार फल देने वाले 'न्यायाधीश' का सर्वोच्च पद सौंपा था। स्कन्द पुराण के अनुसार, सावन के शनिवार को विशेष विधि से शनि पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। आइए जानते हैं यह अत्यंत फलदायी विधान: ⚖️ सावन के शनिवार को ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न: सेवा और भोजन: किसी असहाय/दिव्यांग ब्राह्मण (या किसी भी योग्य ब्राह्मण) के शरीर पर तिल का तेल लगाकर उन्हें गर्म जल से स्नान कराएं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक उन्हें खिचड़ी का भोजन कराएं। विशेष दान: तेल, लोहा, काले तिल, काली उड़द और काले कंबल का दान करें। दान करते समय मन में भाव रखें: "मैंने यह सब शनिदेव की प्रसन्नता के लिए किया है, वे मुझ पर प्रसन्न हों।" काली वस्तुओं का दान: शनिदेव की कृपा पाने के लिए ब्राह्मण को दो काले वस्त्र और काले बछड़े सहित काली गाय का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजन सामग्री: शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक करें। ध्यान रहे, इनके पूजन में चावल (अक्षत) की जगह काले तिल और उड़द का प्रयोग करना चाहिए। 🙏 शनिदेव का ध्यान मंत्र: शनैश्चरः कृष्णवर्णो मन्दः काश्यपगोत्रजः। सौराष्ट्रदेशसम्भूतः सूर्यपुत्रो वरप्रदः। दण्डाकृतिर्मण्डले स्यादिन्द्रनीलसमद्युतिः। बाणबाणासनधरः शूलधृग्गृध्रवाहनः। यमाधिदैवतश्चैव ब्रह्मप्रत्यधिदैवतः। कस्तूर्यगुरुगन्ध: स्यात्तथा गुग्गुलुधूपकः। कृसरान्नप्रियश्चैव विधिरस्य प्रकीर्तितः। 📿 शनि पूजन का वैदिक मंत्र: ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभिस्र वन्तु न:। ॐ शनैश्चराय नम:। 🛡️ संकट मोचक उपाय: जो भक्त सावन में शिव जी के साथ शनिदेव की पूजा करते हैं, उन्हें उत्तम फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा भगवान शिव के अवतार महर्षि पिप्पलाद, श्री काल भैरव और रुद्रावतार हनुमान जी की उपासना भी शनि के प्रकोप से हमारी रक्षा करती है। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो कमेंट में 'ॐ नमः शिवाय' और 'जय शनिदेव' अवश्य लिखें और इसे अपने प्रियजनों के साथ शेयर करें! 🙏 ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। हर हर महादेव ।। . !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🪔शुभ शनिवार🙏 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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4 days ago
🚩 सावन के शनिवार पर कैसे करें बजरंगबली को प्रसन्न? जानिए स्कंद पुराण में वर्णित विशेष पूजा विधि! 🐒✨ भगवान शिव के ही रुद्रावतार, संकटमोचन श्री हनुमान जी की सावन मास के शनिवार को उपासना करने का अत्यंत विशेष महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन एक विशेष विधि से बजरंगबली की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट नष्ट हो जाते हैं। आइए जानते हैं यह अचूक और चमत्कारी विधि: 🙏 पूजन विधि (स्कंद पुराण के अनुसार): तैलाभिषेक: "रुद्रमंत्र" का उच्चारण करते हुए हनुमान जी को तेल से स्नान (अभिषेक) कराएं। सिंदूर लेपन: भगवान की प्रसन्नता के लिए उन्हें तेल में मिला हुआ सिंदूर (चोला) लेपित करें। पुष्प व माला: जपाकुसुम (गुड़हल), आक और मंदार के फूलों की माला पहनाएं और श्रद्धापूर्वक नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। 📿 श्री हनुमान जी के 12 चमत्कारी नाम: बुद्धिमान मनुष्य को सावन के शनिवार को हनुमान जी के इन 12 नामों का जाप अवश्य करना चाहिए: हनुमानञ्जनी सूनुर्वायुपुत्रो महाबल:। रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिङ्गाक्षोमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।। ✨ लाभ: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर श्री हनुमान जी के इन 12 नामों का पाठ करता है, उसका कभी अमंगल नहीं होता और उसे संसार की सभी संपदाएं सुलभ हो जाती हैं। इसके साथ ही, मंदिर में बैठकर 'हनुमत्कवच' का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। 💪 सावन शनिवार की इस पूजा का महात्म्य: श्रावणे मंदवारे तु एवमाराध्य वायुजं। वज्रतुल्यशरीरः स्यादरोगो बलवान्नरः।। वेगवान्कार्यकरणे बुद्धिवैभवभूषितः। शत्रु: संक्षयमाप्नोति मित्रवृद्धि: प्रजायते।। वीर्यवान्कीर्तिमांश्चैव प्रसादादंञ्जनीजने।। अर्थात्: श्रावण मास के शनिवार को वायुपुत्र हनुमान जी की इस प्रकार आराधना करने से मनुष्य का शरीर वज्र के समान मजबूत, निरोगी और बलवान हो जाता है। वह कार्यों में फुर्तीला और अत्यंत बुद्धिमान बनता है। अंजनीपुत्र की कृपा से उसके शत्रुओं का नाश होता है, मित्रों की वृद्धि होती है और वह जीवन में अपार यश-कीर्ति प्राप्त करता है। संकटमोचन आप सभी के कष्ट दूर करें! 🙏 अगर आपको यह पौराणिक जानकारी लाभप्रद लगी हो, तो कमेंट में 'जय बजरंगबली' या 'जय श्री राम' अवश्य लिखें और इस पोस्ट को अपने मित्रों व परिजनों के साथ शेयर करें। . ॥ सियापति रामचंद्र की जय ॥ ॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥ 🙏👇 . 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩 ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔शुभ शनिवार🙏 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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4 days ago
आखिर कैसे बने बाबा काल भैरव 'काशी के कोतवाल'? जानिए यह अद्भुत और रहस्यमयी कथा! 🙏✨ क्या आप जानते हैं कि काशी (वाराणसी) में भगवान शिव से भी पहले बाबा काल भैरव की अनुमति क्यों ली जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा: 🔱 भैरव जी का प्राकट्य जब देवताओं और साधु-संतों के समक्ष ब्रह्माजी का पांचवा शीश भगवान शिव के बारे में अनुचित शब्द कह रहा था, तब उनके झूठे अहंकार को नष्ट करने के लिए एक दिव्य शिवलिंग से 'भैरव' का जन्म हुआ। ⚠️ ब्रह्म हत्या का पाप क्रोधित होकर जब भैरव जी ने अपने नाखूनों से ब्रह्मा जी का वह पांचवा शीश काट लिया, तब महादेव प्रकट हुए। उन्होंने भैरव जी को बताया कि इस कृत्य से उन्हें 'ब्रह्म हत्या' का पाप लगा है और एक सामान्य व्यक्ति की तरह उन्हें भी इसका दुःख भोगना होगा। 🌍 प्रायश्चित की यात्रा और विकराल कन्या पापमुक्ति का मार्ग बताते हुए शिव जी ने कहा, "तुम्हें त्रैलोक्य का भ्रमण करना होगा। जिस स्थान पर यह शीश तुम्हारे हाथ से स्वतः ही छूट जाएगा, वहीं तुम इस पाप से मुक्त हो जाओगे।" इतना कहकर शिव जी ने एक अत्यंत विकराल और भयानक कन्या को उत्पन्न किया, जो 'ब्रह्म हत्या' का ही रूप थी। खप्पर और तीक्ष्ण तलवार लिए यह कन्या भैरव जी के पीछे लग गई, ताकि उन्हें कहीं भी शांति न मिल सके। ✨ काशी में प्रवेश और मुक्ति तीनों लोकों की अनंत काल की यात्रा के बाद, एक दिन भैरव जी ने पवित्र काशी नगरी में प्रवेश किया। शिव की आज्ञा के अनुसार, उस विकराल कन्या (ब्रह्म हत्या) का काशी में प्रवेश वर्जित था। इस प्रकार कन्या से उनका पीछा छूटा। 🏛️ कपाल मोचन और काशी के कोतवाल काशी में गंगा तट पर पहुंचते ही ब्रह्माजी का शीश भैरव जी के हाथ से छूटकर गिर गया और वे हमेशा के लिए पापमुक्त हो गए। यह पवित्र स्थान आज 'कपाल मोचन तीर्थ' के नाम से विख्यात है। यहीं भगवान शिव ने भैरव जी को अपने परम धाम काशी के 'कोतवाल' (रक्षक/guardian) का सर्वोच्च पद प्रदान किया। आज भी काशी में बाबा काल भैरव का ही पहरा है! 🙏 जय बाबा काल भैरव! 🙏 अगर आपको यह कथा पसंद आई हो, तो कमेंट में 'हर हर महादेव' या 'जय काल भैरव' जरूर लिखें और अपने मित्रों के साथ शेयर करें। ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। हर हर महादेव ।। . !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🔱बम बम भोले🙏 #🔱शिवपुराण कथा📖 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏शिव पार्वती #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/