'नारी' प्रकृति-स्वरूप है, 'नारी' शक्ति स्त्रोत।
'जीव' नारि पूजन करो, 'नारी' जीवन ज्योत॥१॥
🌹🌹 पोस्ट संख्या 322-1 🌹🌹
🏵️ यत्र नार्यास्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवताः। 🏵️
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जय मातेश्वरि! भगवती-स्वरूपा समस्त नारियों के श्रीचरणों में नमस्कार है। नारी, शक्ति का ही स्वरूप है। परमप्रकृति ही नारी है। भारतीय संस्कृति में नारीको मातृदेवता कहा गया है। पुत्र भले ही कुपुत्र निकल जाये परन्तु माता कभी कुमाता नहीं होती। जहाँ नारीकी पूजा होती है, वहाँ पर हमेशा सभी देवता निवास करते हैं और जहाँ उनकी पूजा नहीं होती, वहाँ सभी प्रकार के धर्मकार्य विफल हो जाते हैं।
जिस घरमें स्त्रियाँ विषाद को, दुःख को प्राप्त होती हैं। उस कुल की बर्बादी को कोई नहीं रोक सकता। इसके विपरीत, जिस घर में स्त्रियाँ आनन्द में रहती हैं वह कुल, परिवार निरन्तर कीर्ति, यश, प्रतिष्ठा, समृद्धि को प्राप्त होता है।
श्रीमद्देवीभागवत् में कहा गया हैै-
विद्याः समस्तास्तव देवी भेदाः
स्त्रियः समस्ता सकला जगत्सु॥
या याश्च ग्राम्यदेव्यः स्युस्ताः सर्वाः प्रकृतेः कलाः।
कलांशांशसमुद्भूताः प्रतिविश्वेषु योषितः॥
समस्त विद्या और सब स्त्रियाँ देवी का ही रूप हैं। सभी ग्राम्य देवियाँ और समस्त विश्वस्थिता स्त्रियाँ प्रकृति माता की अंशरूपणी हैं।
इसलिये, यदि हम अपना कल्याण चाहते हैं तो केवल निज पत्नीके प्रति अर्द्धाङ्गिनी का भाव रख उसे उचित सम्मान देते हुए विश्व की समस्त नारियों के प्रति मातृभाव रखते हुए व्यहार करें। आद्याशक्ति भगवती हमारा निश्चितरूप से कल्याण करेगीं।
🏵️ भवदीय-अशोक कुमार खरे 'जीव' 🏵️
'नारी' प्रकृति-स्वरूप है, 'नारी' शक्ति स्त्रोत।
'जीव' नारि पूजन करो, 'नारी' जीवन ज्योत॥१॥
'नारी' जन्मप्रदायिनी, तासों 'माँ' कहलाई।
जग माई सम देवता, अउर न दे दिखलाई॥२॥
जग महुँ जेती नारियाँ, करो सदा सत्कार।
नारि मान 'जगदंबिका', परिहरि काम बिकार॥३॥
देखे 'पूत' कपूत पर, 'मातु' कुमातु न होय।
देवी सम सब 'नारियाँ', यह मन राखो गोय॥४॥
जहँ 'नारी' पूजन तहाँ, सब देवन करि वास।
'जीव' अवज्ञा नारि जहँ, तहँ सब कारज नास॥५॥
(भवदीय-अशोक कुमार खरे 'जीव')
३०/०१/२०२६
🌹सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।🌹
🌹शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥🌹
!! जय जय श्री राधे !!
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