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Kamal Ashraf
@kamalasharaf786
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Kamal Ashraf
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1 दिन पहले
╭ *🕌﷽🕌* ╮ ╭┅━┅━┅━────━┅━┅━┅╮ *❂ रमजा़न की आखिरी रात ❂* ▦══─────────────══▦ *★_रमजान में तौबा इस्तगफार कसरत से करें खासतौर पर लैलतुल जायजा़ यानी आखिरी रमजान की रात ।* *"_ईद की तैयारियां और फिजूल कामों के बजाय इबादत में गुज़ारो इसकी बड़ी फजी़लत वारिद हुई है ।* *★_ ईद उल फितर की शब में इबादत करना मुस्तहब है जैसा की हदीस पाक में गुजरा है कि हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया :- रमज़ान के मुताल्लिक मेरी उम्मत को खासतौर पर पांच चीजें दी गई हैं जो पहली उम्मतों को नहीं मिली जिनमें एक यह है कि रमजान की आखिरी रात में रोजे़दारों की मगफिरत कर दी जाती है,* *सहाबा किराम रजियल्लाहू अन्हूम ने अर्ज किया क्या यह शबे मगफिरत शबे कदर ही तो नहीं ?* *आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया :- नहीं ! बल्कि दस्तूर यह है कि मजदूर का काम खत्म होते ही उसकी मजदूरी दे दी जाती है,* #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #❤️अस्सलामु अलैकुम #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲क़ुरान शरीफ़📗
Kamal Ashraf
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2 दिन पहले
*📛ऐतिकाफ़ के मसाइल* 1) ऐतिकाफ़ का वक्त 20 वें रमज़ान के सूरज डूबने (मग़रिब) से शूरू होता है और ईद उल फित्र का चांद दिखने पर खतम होता है, इस लिए ऐतिकाफ़ करने वाले के लिए जरूरी है कि वह रमज़ान की 20 तारीख को मग़रिब से पहले यानी सूरज डूबने से पहले अपने ऐतिकाफ़ #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 की जगह पहुंच जाए। 2) मर्द सिर्फ़ मस्जिद में ऐतिकाफ़ कर सकता है, और वह भी ऐसी मस्जिद होनी चाहिए कि जिसमें पांचों टाईम की नमाज़ जमात से अदा की जाती हो , मर्द के लिए घर में ऐतिकाफ़ करना जाइज़ नहीं। (नूरुल ईज़ाह पेज 153) 3) औरत अपने घर की मस्जिद में ही ऐतिकाफ़ करेगी, घर की मस्जिद उस जगह को कहा जाता है जो जगह घर में उसने नमाज़ के लिए मुतअय्यन कर रखी हो। (नूरुल एज़ाह पेज 154) *⛔नोट-* अगर दौरान-ए-ऐतिकाफ़ औरत के अय्याम शुरू हो जाएं तो ऐतिकाफ़ टूट जाएगा, ऐसी हालत में औरत ऐतिकाफ़ छोड़ देगी। और बाद में रोज़े के साथ एक दिन के ऐतिकाफ़ की क़ज़ा करेगी। साल के जिन दिनों में रोज़ा रखना ममनूअ है, उसके अलावा किसी भी दिन मगरिब से दूसरे दिन मगरिब तक एक दिन-रात के ऐतिकाफ़ की क़ज़ा की जाएगी। 4) औरत घर में जिस जगह ऐतिकाफ़ कर रही है उसके लिए बिना किसी उज़र के उस जगह से बाहर निकलना मना है इस से उसका ऐतिकाफ़ टूट जायेगा !(तहतावी अलल मराकी पेज 699) 5) ऐतिकाफ़ करने वाला अगर किसी शरई उज़र,(जुमा पढ़ने जाने वगैरह) या तबई (पैशाब पाखाने के लिए )ज़रूरत वगैरह के बगैर मस्जिद से बाहर निकलेगा तो उसका ऐतिकाफ़ टूट जायेगा।(तहतावी अलल मराकी पेज 702) 6) ऐतिकाफ़ करने वाला पाखाना, पेशाब, वुज़ू , और नापाकी से गुसल के लिए मस्जिद से बाहर जा सकता है पर फारिग होते ही फौरन मस्जिद में आ जाए वरना उसका ऐतकाफ़ टूट जायेगा। (तहतावी अलल मराकी पेज 702) 7) औरत घर में जिस जगह ऐतिकाफ़ कर रही है वह उसी जगह बैठे बैठे घर के ज़रूरी काम सब्ज़ी काटना, खाना बनाना वगेरह कर सकती है। (तबयीनुल हकाईक भाग 2 पेज 229) 8) ऐतिकाफ़-ए-मसनून और वाजिब में मोअतकिफ़ के लिए ग़ुस्ल-ए-वाजिब के सिवा किसी ग़ुस्ल के लिए बाहर निकलना जाइज़ नहीं है। अगर वह बाहर निकलेगा तो ऐतिकाफ़ फासिद हो जाएगा, अगरचे ग़ुस्ल न करने की वजह से सेहत की खराबी का अंदेशा ही क्यों न हो। दारुल इफ्ता देवबंद Fatwa ID: 1384-930/L=11/1435- *बाक़ी पेश आने वाले इतकाफ़ के मसाईल के लिये अपने मक़ामी उलमा से राब्ता करें।* •┅┅━━═۞═━━┅┅• इमदाद सोशल फॉउंडेशन, कोल्हापुर
Kamal Ashraf
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2 दिन पहले
*आहिस्ता आहिस्ता तिलावत करें!* > "...क़ुरआन को ठहर ठहर कर पढ़ो" (73:4) > हमें क़ुरआन की तिलावत तजवीद और तरतील के साथ करनी चाहिए। तरतील से मुराद आहिस्ता और सुकून के साथ तिलावत करना है, हर लफ़्ज़ को वाज़ेह तौर पर अदा करना और हद से तजावुज़ न करना। इस तरह तिलावत करने से ज़बान, दिल और जिस्म के दीगर हिस्से हम आहंग हो जाते हैं। कभी कभी हम बहुत तेज़ तिलावत करते हैं, सिर्फ़ सूरत या पारह मुकम्मल करने के लिए। इसी तरह, हम तरावीह की नमाज़ में "बहुत ज़्यादा रफ़्तार" देख सकते हैं।, ये सुन्नत के ख़िलाफ़ है और हमें क़ुरआन के मक़ासिद हासिल करने में मदद नहीं देता। आहिस्ता तिलावत करना क़ुरआन के पैग़ाम को समझने और अल्लाह तआला के इरशादात पर ग़ौर करने के लिए ज़रूरी है। अगर हम अपने ईमान को क़ुरआन के ज़रिए मज़बूत करना चाहते हैं तो बाज़ आयात को बार बार दोहराना बहुत अहम है। "ऐ इब्ने आदम, तुम्हारा दिल कैसे नर्म होगा जब तुम्हारी वाहिद फ़िक्र सिर्फ़ सूरह का इख़्तिताम तक पहुंचना है ..?" 🥀 > (हसन बसरी रह.) > दुआ: ﴿रब्बिशरह ली सदरी, व यस्सिर ली अमरी﴾ "ऐ मेरे रब! मेरे दिल को सुकून अता फ़रमा, और मेरे काम को मेरे लिए आसान बना दे।" (20:26) #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋
Kamal Ashraf
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4 दिन पहले
*💵सदक़तूल फ़ित्र क्यूँ💰* मालदार पर सदक़ा ए फ़ित्र क्यूँ वाज़िब है ? 🔵जवाब🔵 حامدا و مصلیا و مسلما ★ हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायात है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने रोज़ो को फ़िज़ूल व् लायानी और फहश बातो के असरात से पाक साफ़ करने के लिए और मिस्कीनों मोहताजों के खाने का बंदोबस्त करने के लिए सदक़तूल फ़ित्र वाजिब क़रार दिया हे। 📕 सुनन अबी दावूद ★ फायदा: – इस हदीस में सदक़ा ए फ़ित्र की 2 हिकमते और उसके 2 ख़ास फ़ायदा की तरफ इशारा फ़रमाया गया हे। एक यह के मुसलमानो के जशन व मशर्रत के इस दिन में सदक़ा ए फ़ित्र के ज़रिया मोहताजों मिस्कीनों की भी शिकम सेरी और आसूदगी का इन्तेज़ाम हो जाएगा। ओर दुसरे यह के ज़ुबाँन की बे-अहतयातियो और बे-बाकियो से रोज़े पर जो बुरे असरात पडते होंगे यह सदक़ा ए फ़ित्र उनका भी कफ्फाराह और फ़िदयाह हो जाएगा। ★ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायात है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुस्लमानो में से हर गुलाम आज़ाद पर, हर मर्द और औरत पर छोटे और बड़े पर सदक़ा ए फ़ित्र लाज़िम किया हे। एक सा’अ खजूर या एक सा'अ जव और हुक्म दिया है के यह सदक़ा ए फ़ित्र नमाज़े ईद के लिए जाने से पहले अदा कर दिया जाए। 📗 सहीह बुख़ारी व् मुस्लिम, 📘फ़िक्हुल इबादात, 301 و الله اعلم بالصو #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #❤️अस्सलामु अलैकुम
Kamal Ashraf
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5 दिन पहले
> अपनी आँखों की हिफाज़त करें! रज़मान के अहम मक़ासिद में से एक ये होना चाहिए कि हम हराम देखने से खुद को रोकने की तरबियत करें। ये ख़ास तौर पर हमारे दौर में ज़्यादा ज़रूरी है, जहाँ हराम नज़ारों तक पहुंच बहुत आसान हो चुकी है। आँख दिल के लिए एक दरवाज़ा है। जो कुछ हम देखते हैं, वो हमारे जज़्बात, ख़्वाहिशात और ख़यालात को मुतास्सिर करता है। हराम को देखना शैतान को हमारे दिलों तक खुली रसाई दे देता है। रोज़े और नज़र की हिफाज़त के दरमियान गहरा ताल्लुक़ है। * नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: "और जो शख़्स निकाह की ताक़त न रखता हो, उसे चाहिए कि रोज़ा रखे, क्योंकि रोज़ा शहवत को ख़त्म करने वाला है।" (बुख़ारी) सही तरीक़े से रोज़ा रखना (ज़्यादा न खाना, आँखों और ज़बान पर क़ाबू रखना वग़ैरह) इंसान में ज़्यादा ज़ब्त-ए-नफ्स पैदा करता है, और जब वो दोबारा हराम देखने की आज़माइश में पड़े, तो वो खुद को रोकने के क़ाबिल हो जाता है। हराम को देखना एक ज़हर है जो हमें ईमान की मिठास और अल्लाह की इबादत से महरूम कर देता है। हमें अपनी नज़रों को हर उस चीज़ से बचाना चाहिए जो शहवत को उभारती है, और दुनिया की चमक-दमक से भी परहेज़ करना चाहिए, क्योंकि ये हमें ग़ाफ़िल और अल्लाह को भूल जाने वाला बना देती है।। दुआ: अल्लाहुम् म अहसिन आक़ि ब त ना फ़िल-उमूरि कुल्लिहा, व अजिरना मिन खिज़यिद-दुनिया व अज़ाबिल-आख़िरह। तर्जमा :ऐ अल्लाह! हमें हमारे तमाम मुआमलात का बेहतरीन अंजाम अता फ़र्मा, और हमें दुनिया की रुस्वाई और आख़िरत के अज़ाब से बचा। > (मुसनद ए अहमद) #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤗रमजान स्पेशल😍🤝
Kamal Ashraf
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9 दिन पहले
⚫☆⚫ ▤━─━─━▓━﷽━▓━─━─━▤ ✿●•· *सेहरी खाना_* *➠फरमाया नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने कि सेहरी खाया करो,क्योंकि सेहरी में बरकत है.. ( बुखारी व मुस्लिम अन अनस रज़ियल्लाहु अन्हु)* *➠और ये भी फरमाया की हमारे और अहले किताब के रोज़ो में सेहरी खाने का फर्क है..* *( मुस्लिम अन अमरु बिन आस रज़ियल्लाहु अन्हु)* *➠और एक हदीस में हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया की सेहरी खाने वालों पर ख़ुदा और उसके फरिश्ते रहमत भेजते हैं,,* *(तबरानी अन इब्ने उमर रजियल्लाहु अन्हु )* *✿●•·_ रोज़े में भूल कर खा पी लेना_* *➠फरमाया रहमतुल्लिल आलमीन सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने कि जो शख्स रोज़े में भूल कर खा पी ले तो वो रोज़ा पूरा कर ले ,क्योंकि उसका कसूर नही उसे अल्लाह ने खिलाया और पिलाया,, ( बुखारी व मुस्लिम अन अबी हुरैरा रजियल्लाहु अन्हु)* *✿●•· __ अफ्तार में जल्दी करना_* *➠फरमाया नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने की लोग हमेशा खैर पर रहेंगे जब तक अफ्तार में जल्दी करते रहेंगे यानी गुरूबे आफताब होते ही फौरन रोज़ा खोल लिया करे,,* *( बुखारी व मुस्लिम अन सहल रज़ियल्लाहु अन्हु)* *➠और फरमाया रहमते कायनात सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने की अल्लाह ताला फरमाते हैं की बन्दों में मुझे सबसे ज़्यादा प्यारा वो है जो अफ्तार में सबसे ज़्यादा जल्दी करने वाला है, यानी गुरूबे आफताब होते ही फौरन अफ्तार करता है और इसमें जल्दी का खूब एहतेमाम रहता है,,,( तिरमिज़ी अन अबी हुरैरा रजियल्लाहु अन्हु)* *➠और फरमाया सय्यदुल कौनैन सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने की जब इधर से (यानी मशरिक से) रात आ गई और उधर से (यानी मग़रिब से) दिन चला गया तो रोज़ा अफ्तार करने का वक़्त हो गया (आगे इंतज़ार करना फ़िज़ूल है बल्कि मकरूह है)_," ( मुस्लिम अन अमरु बिन आस रज़ियल्लाहु अन्हु)* •═══▦☆☆▦═══• #❤️अस्सलामु अलैकुम #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤗रमजान स्पेशल😍🤝
Kamal Ashraf
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10 दिन पहले
🔴 *सवाल-* ज़कात किसको कहते है? *जवाब-* ज़कात ये अरबी ज़बान का लफ्ज़ है। जिसके कई माना है पाक होना, ज्यादती, पाकीज़गी.. ज़कात अपने देने वाले को गुनाहों और बुख्ल (कंजूसी) जैसी घटिया आदत से पाक करती है। *सिर्फ अल्लाह की ख़ुशनूदी और रज़ामन्दी के लिए एक मुक़र्रर व मुताय्यन माल का किसी मुस्तहिक़ (फ़क़ीर, मिसकीन) मुसलमान को मालिक बना देना है।* 🔴 *सवाल-* ज़कात किस पर वाजिब है? *जवाब-* ज़कात उस शख्स पर वाजिब होती है जो 🔹मुसलमान हो। 🔹अकलमंद, समझदार हो। (पागल और दीवाने पर ज़कात वाजिब नहीं।) 🔹बालिग हो। (नाबालिग और छोटे बच्चे के माल पर ज़कात नही।) 🔹निसाब की मिक़दार का मालिक हो। (साढे सात तोला सोना इस ज़माने के ग्राम के हिसाब से *87 ग्राम 480 मिली ग्राम* और साढे बावन तोला चाँदी= *612 ग्राम 360 मिली ग्राम* होता है।) 🔹माल पर एक साल मुकम्मल हो गया हो। (माल आने के एक साल पूरा होने पर अगर निसाब के बराबर या निसाब से ज़ाइद माल बाकि रहे तो साल के आखिर में जितना भी माल मौजूद है उस पुरे माल की ज़कात अदा करनी होगी।) *नोट-* साल के बिच में माल निसाब से कम हो जाये तो इस से कोई फ़र्क़ नही पड़ेगा। साल के शुरू और आखिर में निसाब के बराबर या निसाब से ज़ाइद माल होना चाहिए। हाँ! साल के बीच में माल बिलकुल खतम होकर ज़ीरो बॅलेन्स नही होना चाहिए। 🔹माल ज़रूरतें असलिया और क़र्ज़ से खाली हो। (ज़रूरते असलिया में रहने का घर, इस्तेमाल के कपड़े, सवारी का जानवर या गाड़ी, राहत व आराम और सजावट का सामान घर के बरतन वगैरा दाखिल है।) 🔹ज़कात वाजिब होने के लिए ज़रूरी है के ज़कात का माल मुकम्मल तौर पर उसकी मिलकियत में हो। (दूसरे का माल अगर हमारे पास अमानत रखा है तो उसपर ज़कात नही। और अगर हमने दूसरे के पास माल अमानत के तौर पर या बैंक में या फिक्स डिपॉज़िट करके जो माल रखा है उसपर ज़कात वाजिब होगी।) ⛔ज़कात के मसाईल को यहाँ पढ़ कर अपने मक़ामी उलमा से खूब अच्छी तरह समजे। 📚किताबुल फतावा 📚मुहक़्क़क़ व मुदल्लल जदीद मसाईल 📚किताबुल मसाईल •┄┄┅┅━━═۞═━━┅┅┄┄• *ⓘⓜⓓⓐⓓ* *ⓢⓞⓒⓘⓐⓛ* *ⓕⓞⓤⓝⓓⓐⓣⓘⓞⓝ* *ⓚⓞⓛⓗⓐⓟⓤⓡ* *सवाब की निय्यत से अपने सभी ग्रुप में शेयर करें।* *➤ⓢⓔⓝⓓ-②-ⓐⓛⓛ* ⛔कोई मसअला समझ में न आये तो अपने मक़ामी उलमा से राब्ता करें। #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #❤️अस्सलामु अलैकुम
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