*📛ऐतिकाफ़ के मसाइल*
1) ऐतिकाफ़ का वक्त 20 वें रमज़ान के सूरज डूबने (मग़रिब) से शूरू होता है और ईद उल फित्र का चांद दिखने पर खतम होता है, इस लिए ऐतिकाफ़ करने वाले के लिए जरूरी है कि वह रमज़ान की 20 तारीख को मग़रिब से पहले यानी सूरज डूबने से पहले अपने ऐतिकाफ़
#🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 की जगह पहुंच जाए।
2) मर्द सिर्फ़ मस्जिद में ऐतिकाफ़ कर सकता है, और वह भी ऐसी मस्जिद होनी चाहिए कि जिसमें पांचों टाईम की नमाज़ जमात से अदा की जाती हो , मर्द के लिए घर में ऐतिकाफ़ करना जाइज़ नहीं। (नूरुल ईज़ाह पेज 153)
3) औरत अपने घर की मस्जिद में ही ऐतिकाफ़ करेगी, घर की मस्जिद उस जगह को कहा जाता है जो जगह घर में उसने नमाज़ के लिए मुतअय्यन कर रखी हो। (नूरुल एज़ाह पेज 154)
*⛔नोट-* अगर दौरान-ए-ऐतिकाफ़ औरत के अय्याम शुरू हो जाएं तो ऐतिकाफ़ टूट जाएगा, ऐसी हालत में औरत ऐतिकाफ़ छोड़ देगी। और बाद में रोज़े के साथ एक दिन के ऐतिकाफ़ की क़ज़ा करेगी। साल के जिन दिनों में रोज़ा रखना ममनूअ है, उसके अलावा किसी भी दिन मगरिब से दूसरे दिन मगरिब तक एक दिन-रात के ऐतिकाफ़ की क़ज़ा की जाएगी।
4) औरत घर में जिस जगह ऐतिकाफ़ कर रही है उसके लिए बिना किसी उज़र के उस जगह से बाहर निकलना मना है इस से उसका ऐतिकाफ़ टूट जायेगा !(तहतावी अलल मराकी पेज 699)
5) ऐतिकाफ़ करने वाला अगर किसी शरई उज़र,(जुमा पढ़ने जाने वगैरह) या तबई (पैशाब पाखाने के लिए )ज़रूरत वगैरह के बगैर मस्जिद से बाहर निकलेगा तो उसका ऐतिकाफ़ टूट जायेगा।(तहतावी अलल मराकी पेज 702)
6) ऐतिकाफ़ करने वाला पाखाना, पेशाब, वुज़ू , और नापाकी से गुसल के लिए मस्जिद से बाहर जा सकता है पर फारिग होते ही फौरन मस्जिद में आ जाए वरना उसका ऐतकाफ़ टूट जायेगा। (तहतावी अलल मराकी पेज 702)
7) औरत घर में जिस जगह ऐतिकाफ़ कर रही है वह उसी जगह बैठे बैठे घर के ज़रूरी काम सब्ज़ी काटना, खाना बनाना वगेरह कर सकती है। (तबयीनुल हकाईक भाग 2 पेज 229)
8) ऐतिकाफ़-ए-मसनून और वाजिब में मोअतकिफ़ के लिए ग़ुस्ल-ए-वाजिब के सिवा किसी ग़ुस्ल के लिए बाहर निकलना जाइज़ नहीं है। अगर वह बाहर निकलेगा तो ऐतिकाफ़ फासिद हो जाएगा, अगरचे ग़ुस्ल न करने की वजह से सेहत की खराबी का अंदेशा ही क्यों न हो। दारुल इफ्ता देवबंद Fatwa ID: 1384-930/L=11/1435-
*बाक़ी पेश आने वाले इतकाफ़ के मसाईल के लिये अपने मक़ामी उलमा से राब्ता करें।*
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इमदाद सोशल फॉउंडेशन, कोल्हापुर